छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मामलों में गुरुवार को अहम मोड़ आया, जब बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने चैतन्य बघेल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध शाखा–एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW/ACB) द्वारा दर्ज मामलों में नियमित जमानत दे दी।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा ने 2 जनवरी 2026 को पारित विस्तृत आदेशों में कहा कि लंबी प्री-ट्रायल हिरासत, मुकदमे में देरी और सह-आरोपियों को मिली राहत जैसे पहलू जमानत के पक्ष में जाते हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
ये मामले 2019 से 2023 के बीच कथित तौर पर संचालित एक शराब सिंडिकेट से जुड़े हैं, जिसमें राज्य को भारी राजस्व नुकसान होने का आरोप है।
EOW/ACB ने FIR दर्ज कर धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जांच शुरू की थी। इसी FIR के आधार पर ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत कार्रवाई करते हुए कथित रूप से ₹2,000 करोड़ से अधिक की अवैध आय के शोधन का आरोप लगाया।
अदालत के समक्ष यह तथ्य भी सामने आया कि कई चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल होने के बावजूद चैतन्य बघेल का नाम किसी भी चार्जशीट में आरोपी के रूप में नहीं था। बाद में उन्हें जुलाई 2025 में ED और सितंबर 2025 में EOW द्वारा गिरफ्तार किया गया।
अदालत में रखे गए तर्क
बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दलील दी कि चैतन्य बघेल से न तो कोई अवैध धन बरामद हुआ और न ही कोई आपत्तिजनक दस्तावेज। आरोप मुख्यतः PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों और कथित “संबंधों” पर आधारित हैं, जिनमें किसी ठोस प्रत्यक्ष कृत्य का उल्लेख नहीं है।
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यह भी कहा गया कि कई सह-आरोपी, जिनकी भूमिका कथित रूप से अधिक गंभीर बताई गई, पहले ही उच्च अदालतों से जमानत पा चुके हैं।
वहीं, ED और राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए आर्थिक अपराध की गंभीरता और जांच सामग्री का हवाला दिया।
कोर्ट की टिप्पणियाँ
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए कहा कि आवेदक किसी भी समय आबकारी विभाग, राज्य विपणन निगम या नीति निर्धारण से जुड़े किसी पद पर नहीं था।
अदालत ने इस तथ्य को भी महत्वपूर्ण माना कि लंबे समय तक जांच के बावजूद आवेदक से किसी भी “अपराध की आय” की बरामदगी नहीं हुई।
पीठ ने कहा,
“केवल आरोपों की गंभीरता के आधार पर किसी व्यक्ति को अनिश्चित काल तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता।”
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अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि इतने बड़े मामले में, जहां दर्जनों आरोपी और सैकड़ों गवाह हैं, निकट भविष्य में ट्रायल के समाप्त होने की संभावना नहीं दिखती।
अदालत का निर्णय
इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, हाईकोर्ट ने चैतन्य बघेल को ED और EOW/ACB दोनों मामलों में नियमित जमानत देने का आदेश दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत सख्त शर्तों के अधीन होगी, ताकि ट्रायल के दौरान आवेदक की उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके और जांच या गवाहों पर कोई प्रभाव न पड़े।
Case Details:-
Chaitanya Baghel v. EOW,ACB
Chaitanya Baghel v. ED
Case Numbers:-
- ED / PMLA Case: MCRC No. 8716 of 2025
- EOW / ACB Case: MCRC No. 8224 of 2025









