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मध्यप्रदेश हिरासत मौत मामले में दो पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने CBI को फटकार लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश में देवा पारधी हिरासत मौत मामले में दो पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी न होने पर CBI को फटकार लगाई, अवमानना की चेतावनी दी।

Vivek G.
मध्यप्रदेश हिरासत मौत मामले में दो पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने CBI को फटकार लगाई

नई दिल्ली, 23 सितम्बर – सुप्रीम कोर्ट में आज कड़ी सुनवाई हुई जब जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और आर. महादेवन ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को फटकार लगाई। अदालत ने 26 वर्षीय देवा पारधी की कथित हिरासत मौत के आरोप में दो मध्यप्रदेश पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी न होने पर गहरा असंतोष जताया और चेतावनी दी कि कार्रवाई में देरी होने पर अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाएगी।

पृष्ठभूमि

यह मामला देवा पारधी की इस साल हुई मौत से जुड़ा है, जो चोरी के आरोप में पुलिस हिरासत में था। उसकी मां हंसुरा बाई का आरोप है कि बेटे को बुरी तरह प्रताड़ित किया गया। राज्य पुलिस ने हार्ट अटैक का दावा किया, लेकिन मई में सुप्रीम कोर्ट ने संभावित लीपापोती देखते हुए जांच CBI को सौंप दी। साथ ही अदालत ने आरोपी पुलिसकर्मियों की एक महीने के भीतर गिरफ्तारी और 90 दिनों में जांच पूरी करने का आदेश दिया।

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देवा का चाचा और एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी गंगाराम पारधी अब भी अलग मामलों में जेल में है। परिवार का कहना है कि ये मामले उसे डराने के लिए दर्ज किए गए। जेल में उस पर हमलों की खबरें आने के बाद उसकी सुरक्षा बड़ी चिंता का विषय बन गई है।

अदालत की टिप्पणियां

सुनवाई के दौरान माहौल तब गर्म हो गया जब CBI ने बताया कि छापेमारी, डिजिटल निगरानी और गैर-जमानती वारंट के बावजूद दोनों मुख्य आरोपी- संजिव सिंह मालवीय और उत्तम सिंह कुशवाहा- का कोई पता नहीं चला।

जस्टिस नागरत्ना ने तीखा रुख अपनाते हुए कहा, “ये ऐसे नहीं चलेगा। आप बेबसी की दलील दे रहे हैं। कृपया ऐसा मत कहिए। ये तो सुरक्षा देने जैसा लगता है।” उन्होंने याद दिलाया कि एजेंसी “अन्य मामलों में सेकंडों में गिरफ्तारी कर लेती है,” लेकिन “अपने ही लोगों को” नहीं पकड़ पा रही।

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जस्टिस महादेवन ने स्थिति को “बहुत दुर्भाग्यपूर्ण” बताया और चेतावनी दी कि अगर गंगाराम पारधी को कुछ हुआ तो CBI जिम्मेदार होगी। पीठ ने यह भी संकेत दिया कि आरोपियों को बचाने की कोशिश हो सकती है, कहते हुए, “फरार का मतलब संरक्षण है- यही दिख रहा है।”

याचिकाकर्ता के वकील ने आरोप लगाया कि जेल अधिकारियों ने गंगाराम पर हुए हमलों को अनदेखा किया और CBI अधिकारियों ने परिवार पर अवमानना याचिका वापस लेने का दबाव डाला।

फैसला

लंबी बहस के बाद अदालत ने CBI को निर्देश दिया कि वह गुरुवार तक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दाखिल करे, जिसमें दोनों अधिकारियों को खोजने और गिरफ्तार करने के लिए उठाए गए हर कदम का ब्यौरा हो। मुख्य सचिव, CBI निदेशक और जांच अधिकारी को शपथपत्र दायर करने का भी आदेश दिया गया।

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पीठ ने चेतावनी दी कि अगर दो दिन में गिरफ्तारी नहीं हुई तो अवमानना की कार्रवाई होगी, हालांकि एक छोटा मौका छोड़ते हुए कहा, “अगर अभी गिरफ्तारी होती है तो हम अवमानना पर पुनर्विचार कर सकते हैं,” जस्टिस नागरत्ना ने कहा और सुनवाई 25 सितम्बर तक के लिए स्थगित कर दी।

मामला: हंसुरा बाई बनाम हनुमान प्रसाद मीणा एवं अन्य - मध्य प्रदेश हिरासत में मृत्यु अवमानना

मामला संख्या: अवमानना ​​याचिका (सिविल) संख्या 594/2025

याचिकाकर्ता: हंसुरा बाई, मृतक की माँ।

प्रतिवादी: वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों सहित राज्य के अधिकारी; सीबीआई को जाँच का निर्देश।

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