कटक स्थित ओडिशा हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश में साफ कर दिया है कि Record of Rights (R.O.R.) यानी जमीन के सरकारी रिकॉर्ड से किसी मृत व्यक्ति का नाम हटाने के लिए अदालत सीधे “ब्लैंकेट ऑर्डर” नहीं दे सकती। इसके लिए म्यूटेशन (Mutation) की कानूनी प्रक्रिया अपनाना जरूरी है।
यह फैसला जयन्ती बिस्वास और अन्य बनाम राज्य सरकार मामले में आया, जहां याचिकाकर्ताओं ने तहसीलदार को सीधे निर्देश देने की मांग की थी कि जमीन रिकॉर्ड से मृत व्यक्ति का नाम हटाया जाए।
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मामले की पृष्ठभूमि
मामला मालकानगिरी जिले के कालिमेला तहसील से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में यह मांग रखी कि मौजा-एरबनपाली स्थित खाता नंबर 181/61 के R.O.R. से लक्ष्मण बिस्वास का नाम हटाया जाए, क्योंकि उनकी मृत्यु हो चुकी है।
याचिकाकर्ताओं की तरफ से अधिवक्ता निरंजन पांडा पेश हुए, जबकि राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता एस. नायक ने पक्ष रखा।
अदालत का अवलोकन
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अनंद चंद्र बेहरा ने कहा कि जमीन रिकॉर्ड में नाम हटाने या जोड़ने का तरीका पहले से कानून में तय है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी रिकॉर्डेड टेनेंट (दर्ज खातेदार/किरायेदार) की मृत्यु होने पर उसका नाम हटाने के लिए:
- पहले इच्छुक पक्ष को आवेदन देना होगा,
- फिर तहसीलदार म्यूटेशन केस दर्ज करेंगे,
- उसके बाद जांच (enquiry) होगी,
- और फिर आदेश पारित कर नाम हटाकर कानूनी उत्तराधिकारियों (LRs) का नाम दर्ज किया जाएगा।
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, “मृत व्यक्ति का नाम R.O.R. से हटाने के लिए कानून के अनुसार कुछ औपचारिकताएं जरूरी हैं, जो म्यूटेशन प्रक्रिया के जरिए ही पूरी होंगी।”
हाईकोर्ट ने साफ कहा कि इस तरह की मांग पर वह सीधे तहसीलदार को नाम हटाने का आदेश नहीं दे सकता, क्योंकि यह काम प्रक्रियात्मक जांच के बिना नहीं किया जा सकता।
अदालत के मुताबिक, अगर बिना म्यूटेशन के आदेश दे दिया जाए तो यह:
- रिकॉर्ड में बदलाव की स्थापित कानूनी व्यवस्था को दरकिनार करेगा,
- और बिना जांच के किसी के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
कोर्ट ने कहा कि इसलिए याचिका को पूरी तरह मंजूर करने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता।
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फ़ैसला
अंत में हाईकोर्ट ने याचिका को पूरी तरह खारिज नहीं किया, बल्कि आंशिक रूप से मंजूर किया।
कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता अब तहसीलदार, कालिमेला के पास आवेदन दे सकते हैं। इसके बाद:
- तहसीलदार म्यूटेशन केस दर्ज करेंगे,
- आवश्यक जांच करेंगे,
- और फिर कानून के अनुसार नाम हटाने/दर्ज करने का आदेश पारित करेंगे।
इसी के साथ यह रिट याचिका अंतिम रूप से निस्तारित कर दी गई।
Case Title: Jayanti Biswas & Others vs State of Odisha & Others
Case No.: WP(C) No.35230 of 2025
Case Type: Writ Petition (Articles 226 & 227)
Decision Date: 08 January 2026










