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6 साल की कैद के बाद राहत: सुप्रीम कोर्ट ने UAPA मामले में NSCN(IM) नेता अलेमला जमीर को दी ज़मानत

अलेमला जमीर बनाम राष्ट्रीय जांच एजेंसी, सुप्रीम कोर्ट ने 6 साल से जेल में बंद NSCN(IM) नेता अलेमला जमीर को UAPA आतंक फंडिंग मामले में ज़मानत दी, ट्रायल की प्रगति को आधार बनाया।

Vivek G.
6 साल की कैद के बाद राहत: सुप्रीम कोर्ट ने UAPA मामले में NSCN(IM) नेता अलेमला जमीर को दी ज़मानत

छह साल से अधिक समय तक जेल में बंद रहने के बाद, Alemla Jamir को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। आतंक फंडिंग से जुड़े UAPA मामले में शीर्ष अदालत ने उनकी ज़मानत याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि लंबी हिरासत और ट्रायल की प्रगति को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

अलेमला जमीर पर National Socialist Council of Nagaland (Isak-Muivah) के लिए धन जुटाने और एकत्र करने के आरोप लगे थे। 2019 में उन्हें दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से ₹72 लाख नकद के साथ रोके जाने के बाद गिरफ्तार किया गया।
जांच बाद में National Investigation Agency (NIA) को सौंपी गई, जिसने IPC, Arms Act और Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA) की कई धाराओं में आरोपपत्र दाख़िल किया।

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दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले उनकी ज़मानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत का मानना था कि वह संगठन में प्रभावशाली पद पर हैं और गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

यह मामला Supreme Court of India के समक्ष न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ के सामने आया।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि ट्रायल लंबा खिंच गया है और बिना निष्कर्ष के वर्षों तक जेल में रखना अनुचित है।

सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या सिंह भाटी ने अदालत से आरोपी की “प्रोफ़ाइल” पर ध्यान देने का आग्रह किया। इस पर पीठ ने टिप्पणी की,

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“हमने उनकी स्थिति देखी है। कई गवाहों की गवाही हो चुकी है और वह छह साल से अधिक समय से जेल में हैं।”

न्यायमूर्ति सुंदरेश ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा,

“उनके पति फरार हैं, लेकिन उन्हें यूं ही पीड़ा में नहीं छोड़ा जा सकता।”

अदालत की टिप्पणी

पीठ ने आदेश में साफ़ कहा कि ट्रायल का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है और कई अहम गवाहों की गवाही दर्ज की जा चुकी है। साथ ही यह तथ्य भी अहम माना गया कि आरोपी एक महिला हैं और लंबे समय से हिरासत में हैं।
अदालत ने कहा,

“इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए हम ज़मानत देने के पक्ष में हैं।”

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फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने अलेमला जमीर की अपील स्वीकार करते हुए नियमित ज़मानत मंज़ूर कर दी और दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप किया। अदालत ने माना कि मौजूदा हालात में आगे की कैद न्यायसंगत नहीं होगी।

Case Title: Alemla Jamir vs National Investigation Agency

Case No.: Diary No. 33716/2025

Case Type: Criminal – UAPA Bail

Decision Date: January 2026

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