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भारतीय रेलवे मानद वितरण लाइसेंसधारी नहीं है, उसे खुले उपयोग के लिए बिजली अधिभार का भुगतान करना होगा: सर्वोच्च न्यायालय

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय रेलवे बिजली वितरण लाइसेंसी नहीं है और ओपन एक्सेस से खरीदी गई बिजली पर क्रॉस-सब्सिडी व अतिरिक्त सरचार्ज देना होगा। - इंडियन रेलवे बनाम वेस्ट बंगाल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड और अन्य।

Shivam Y.
भारतीय रेलवे मानद वितरण लाइसेंसधारी नहीं है, उसे खुले उपयोग के लिए बिजली अधिभार का भुगतान करना होगा: सर्वोच्च न्यायालय

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रेलवे को बड़ा झटका देते हुए साफ कर दिया कि रेलवे को “डीम्ड डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी” यानी स्वतः बिजली वितरण लाइसेंस प्राप्त संस्था नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि रेलवे अपनी जरूरत के लिए बिजली का उपयोग करता है, न कि उपभोक्ताओं को बिजली सप्लाई करने के लिए। इसलिए उसे ओपन एक्सेस के जरिए खरीदी गई बिजली पर क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज और अतिरिक्त सरचार्ज देना होगा।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला इस सवाल से जुड़ा था कि क्या भारतीय रेलवे बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 14 के तहत “डीम्ड डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी” माना जा सकता है। रेलवे का कहना था कि वह रेलवे अधिनियम के तहत बिजली वितरण ढांचा स्थापित और संचालित करने का अधिकार रखता है, इसलिए उसे अलग लाइसेंस की जरूरत नहीं है।

रेलवे ने यह भी दलील दी कि वह देशभर में ट्रैक्शन सब-स्टेशनों और रेलवे नेटवर्क के संचालन के लिए बिजली खरीदता और वितरित करता है। इसलिए उसे ओपन एक्सेस के तहत बिना अतिरिक्त सरचार्ज के बिजली लेने की अनुमति मिलनी चाहिए।

दूसरी ओर विभिन्न राज्य विद्युत वितरण कंपनियों और नियामक आयोगों ने कहा कि रेलवे सिर्फ अपनी आंतरिक जरूरतों के लिए बिजली का इस्तेमाल करता है। वह आम उपभोक्ताओं को बिजली सप्लाई नहीं करता, इसलिए उसे वितरण लाइसेंसी नहीं माना जा सकता।

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि बिजली वितरण लाइसेंसी बनने के लिए केवल बिजली नेटवर्क चलाना पर्याप्त नहीं है। कानून के अनुसार किसी संस्था को उपभोक्ताओं तक बिजली सप्लाई भी करनी होती है।

पीठ ने कहा,

“रेलवे का बिजली नेटवर्क उसके अपने संचालन - जैसे लोकोमोटिव, सिग्नल सिस्टम और स्टेशन सुविधाओं - के लिए है। इसे उपभोक्ताओं को बिजली वितरण नहीं माना जा सकता।”

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि रेलवे अधिनियम की धारा 11 रेलवे को अपने संचालन के लिए बिजली ढांचा स्थापित करने की अनुमति देती है, लेकिन इससे उसे स्वतः बिजली वितरण लाइसेंसी का दर्जा नहीं मिल जाता।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेलवे “उपयुक्त सरकार” की परिभाषा के अंतर्गत आ सकता है, क्योंकि उसका नियंत्रण केंद्र सरकार के पास है। लेकिन केवल इस आधार पर उसे डीम्ड डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी का लाभ नहीं दिया जा सकता।

अदालत ने क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज की आवश्यकता पर भी विस्तार से टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि यह सरचार्ज बिजली वितरण कंपनियों की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी है, क्योंकि वे कृषि और गरीब उपभोक्ताओं को रियायती दरों पर बिजली देती हैं।

पीठ ने कहा कि यदि बड़े उपभोक्ता सीधे ओपन एक्सेस से बिजली लेने लगें और सरचार्ज न दें, तो वितरण कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने अपीलीय अधिकरण (APTEL) के फैसले को बरकरार रखते हुए भारतीय रेलवे की अपीलें खारिज कर दीं। अदालत ने माना कि रेलवे डीम्ड डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी नहीं है और उसे ओपन एक्सेस के तहत खरीदी गई बिजली पर लागू क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज तथा अतिरिक्त सरचार्ज का भुगतान करना होगा।

Case Details:

Case Title: Indian Railways v. West Bengal State Electricity Distribution Company Ltd. & Ors.

Case Number: Civil Appeal Nos. 4652-4659 of 2024

Judge: Justice Dipankar Datta and Justice Satish Chandra Sharma

Decision Date: 8 May 2026

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