मेन्यू
समाचार खोजें...
होमSaved

बॉम्बे हाईकोर्ट ने पिता-बेटी की मुलाक़ात धीरे-धीरे शुरू करने पर जोर दिया, मुलाक़ात कार्यक्रम तय करने की अगली सुनवाई

बॉम्बे हाईकोर्ट ने पिता-बेटी की चरणबद्ध मुलाक़ात पर ज़ोर दिया, बच्चे के अधिकार को माना; अगली सुनवाई 11 सितंबर को।

Vivek G.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पिता-बेटी की मुलाक़ात धीरे-धीरे शुरू करने पर जोर दिया, मुलाक़ात कार्यक्रम तय करने की अगली सुनवाई

एक संवेदनशील मामले में, बॉम्बे हाईकोर्ट ने 11 वर्षीय बच्ची और उसके पिता के बीच मुलाक़ात का व्यावहारिक कार्यक्रम तय करने के लिए दोनों माता-पिता को निर्देशित किया है। पिता ने लगभग चार साल से बेटी से कोई मुलाक़ात नहीं की है।

पृष्ठभूमि

यह मामला अक्टूबर 2024 में पारित एक आदेश से जुड़ा है, जिसमें अंतरिम मुलाक़ात की अनुमति दी गई थी। हालांकि, पिता ने शुरुआत में सहमति जताने के बावजूद बाद में बेटी से मिलने से इनकार कर दिया और याचिका के अंतिम निपटारे की मांग की। इस साल फरवरी 2025 में, हाईकोर्ट ने उनकी अनिच्छा दर्ज की और अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, जिसने पिता की याचिका खारिज कर दी लेकिन उन्हें हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई का अनुरोध करने की अनुमति दी।

Read also:- केरल हाईकोर्ट ने एनडीपीएस मामले में व्यक्ति को किया बरी, सबूत दर्ज करने और सैंपलिंग प्रक्रिया में गंभीर खामियों का हवाला

अदालत की टिप्पणियाँ

न्यायमूर्ति माधव जे. जामदार ने कहा कि बच्चे का भावनात्मक विकास दोनों माता-पिता पर निर्भर करता है। अदालत ने टिप्पणी की—“एक बच्चा निर्जीव वस्तु नहीं है जिसे एक माता-पिता से दूसरे के पास फेंका जा सके।” उन्होंने कहा कि रातभर मुलाक़ात (overnight access) केवल तब दी जा सकती है जब पहले छोटे-छोटे नियमित मिलन हो जाएँ। अदालत ने यशिता साहू बनाम राजस्थान राज्य (2020) के फैसले का हवाला दिया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया था कि बच्चे को दोनों माता-पिता का प्यार और देखभाल पाना उसका मौलिक अधिकार है।

न्यायाधीश ने यह भी कहा कि आज की तकनीक के दौर में संपर्क केवल आमने-सामने मुलाक़ात तक सीमित नहीं होना चाहिए। फ़ोन कॉल और वीडियो बातचीत भी अहम हैं, खासकर जब माता-पिता अलग-अलग रहते हों।

Read also:- राजस्थान उच्च न्यायालय ने भाभी द्वारा आरोपित व्यक्ति के खिलाफ बलात्कार और हमले के आरोपों को बरकरार रखा

निर्णय

अदालत ने माँ और पिता दोनों को 11 सितंबर 2025 को दोपहर 3 बजे व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिये पेश होने का निर्देश दिया है। इस दौरान मुलाक़ात का कार्यक्रम तय किया जाएगा-पहले कुछ घंटों की मुलाक़ात से शुरुआत होगी, फिर धीरे-धीरे रातभर की मुलाक़ात दी जाएगी, साथ ही पिता और बेटी के बीच नियमित फ़ोन कॉल भी शामिल किए जाएँगे।

केस का शीर्षक: श्वेता चंद्रा बनाम ब्रह्मानंद बलदेव राय

आदेश की तिथि: 8 सितंबर 2025

केस संख्या: रिट याचिका संख्या 13980/2024

Mobile App

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Install App
CourtBook Mobile App

More Stories