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निजी अस्पताल में वर्षों से भर्ती महिला को घर ले जाने का आदेश, ₹1 करोड़ से ज्यादा बकाया बिल पर कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

कलकत्ता हाईकोर्ट ने लंबे समय से निजी अस्पताल में भर्ती मरीज को घर ले जाने का निर्देश दिया और कहा कि अस्पताल पति से ₹1 करोड़ से अधिक का बकाया बिल नहीं वसूलेगा। - अपोलो मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल्स लिमिटेड और अन्य बनाम पश्चिम बंगाल राज्य और अन्य।

Shivam Y.
निजी अस्पताल में वर्षों से भर्ती महिला को घर ले जाने का आदेश, ₹1 करोड़ से ज्यादा बकाया बिल पर कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में निजी अस्पताल और लंबे समय से भर्ती मरीज से जुड़े विवाद पर फैसला सुनाते हुए कहा कि मरीज को अस्पताल से छुट्टी देकर घर ले जाया जा सकता है और पति उसकी देखभाल करेगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अस्पताल मरीज या उसके पति से बकाया चिकित्सा बिल की वसूली नहीं करेगा।

न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने यह आदेश अपोलो मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल्स लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर दिया। अस्पताल ने राज्य सरकार से ऐसे मामलों के लिए दिशानिर्देश बनाने की मांग की थी, जहां मरीज डिस्चार्ज होने के बावजूद निजी अस्पतालों में पड़े रहते हैं और उन्हें घर ले जाने वाला कोई नहीं होता।

मामले की पृष्ठभूमि

अस्पताल के अनुसार, पूनम गुप्ता को सितंबर 2021 में सड़क दुर्घटना के बाद गंभीर सिर की चोट के कारण भर्ती कराया गया था। उनकी इमरजेंसी सर्जरी हुई और लंबे समय तक इलाज चला। अस्पताल ने अदालत को बताया कि मरीज के पति जयप्रकाश गुप्ता ने भर्ती के समय केवल ₹15,000 जमा किए और बाद में कोई भुगतान नहीं किया।

रिकॉर्ड के मुताबिक, सितंबर 2024 तक अस्पताल का कुल बिल ₹1.09 करोड़ से अधिक हो चुका था। बीमा कंपनी ने लगभग ₹5.7 लाख का भुगतान स्वीकृत किया था, जबकि बाकी राशि लंबित थी।

अस्पताल ने यह भी कहा कि मरीज अब ऐसी स्थिति में नहीं थीं कि उन्हें लगातार अस्पताल में भर्ती रखने की आवश्यकता हो, लेकिन परिवार उन्हें वापस घर ले जाने को तैयार नहीं था। दूसरी ओर, पति ने अदालत में कहा कि वह आर्थिक रूप से कमजोर है और पत्नी की देखभाल करने में सक्षम नहीं है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने कलकत्ता मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक समिति गठित करने का निर्देश दिया। समिति ने मरीज की जांच के बाद रिपोर्ट अदालत में पेश की।

रिपोर्ट में कहा गया कि मरीज होश में हैं, खुद खाना खा सकती हैं और उन्हें अब इनडोर उपचार की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, उन्हें फिजिकल रिहैबिलिटेशन और ट्रेकियोस्टॉमी ट्यूब की नियमित देखभाल की जरूरत रहेगी, जो घर पर प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ की मदद से संभव है।

अदालत ने नोट किया कि राज्य सरकार ने भी कहा है कि जरूरत पड़ने पर सरकारी अस्पतालों में मरीज को प्राथमिकता के आधार पर इलाज उपलब्ध कराया जाएगा।

सभी पक्षों की दलीलें और मेडिकल रिपोर्ट पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने पति को निर्देश दिया कि वह एक सप्ताह के भीतर पत्नी को अस्पताल से घर ले जाए और उनकी उचित देखभाल सुनिश्चित करे। अदालत ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में मरीज को इलाज की आवश्यकता होती है, तो उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया जा सकता है।

कोर्ट ने राज्य अधिकारियों को मरीज को मुफ्त व्हीलचेयर उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया। सबसे महत्वपूर्ण रूप से अदालत ने कहा कि पति की आर्थिक स्थिति को देखते हुए अस्पताल मरीज या उसके पति से इलाज का बकाया बिल नहीं मांगेगा, हालांकि कानून अनुमति दे तो बीमा कंपनी से दावा कर सकता है।

अदालत ने स्पष्ट किया,

“यह आदेश विशेष परिस्थितियों में पारित किया गया है और इसे भविष्य के मामलों में मिसाल के रूप में नहीं माना जाएगा।”

Case Details

Case Title: Apollo Multispecialty Hospitals Limited & Anr. v. State of West Bengal & Ors.

Case Number: WPA No. 26195 of 2024

Judge: Justice Krishna Rao

Decision Date: 08 May 2026

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