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कर्नाटक हाईकोर्ट ने केएसआरटीसी का आदेश रद्द किया, मृत कर्मचारी के भाई को सहानुभूतिपूर्ण नियुक्ति देने का निर्देश

कर्नाटक हाईकोर्ट ने केएसआरटीसी का आदेश रद्द कर मृत कर्मचारी के भाई को सहानुभूतिपूर्ण नियुक्ति देने का निर्देश दिया, कहा कि पत्नी और संतान न होने पर भाई को नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता।

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कर्नाटक हाईकोर्ट ने केएसआरटीसी का आदेश रद्द किया, मृत कर्मचारी के भाई को सहानुभूतिपूर्ण नियुक्ति देने का निर्देश

कर्नाटक हाईकोर्ट, धारवाड़ खंडपीठ ने कर्नाटक रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (KSRTC) के एक मृत ड्राइवर के परिवार द्वारा दायर रिट याचिका को स्वीकार करते हुए निगम को उसके भाई को सहानुभूतिपूर्ण नियुक्ति देने का आदेश दिया है। यह आदेश 19 अगस्त 2025 को न्यायमूर्ति सुरज गोविंदराज ने स्म्ट. मंतव्वा एवं श्री संगन्ना बनाम डिविजनल कंट्रोलर, के.के.आर.टी.सी., बल्लारी डिवीजन (रिट याचिका संख्या 101661/2025) में पारित किया।

मामला पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता स्म्ट. मंतव्वा (माता) और श्री संगन्ना (भाई), दिवंगत वीरेश मंतप्पा लोला सर की मां और भाई हैं। वीरेश, जो मार्च 2008 से निगम में ड्राइवर के पद पर कार्यरत थे, 21 सितंबर 2023 को ड्यूटी के दौरान निधन हो गया।

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उनकी मृत्यु के बाद, परिवार ने सहानुभूतिपूर्ण नियुक्ति के लिए आवेदन किया और भाई संगन्ना को नौकरी देने की मांग की। लेकिन निगम ने 4 नवंबर 2024 को आवेदन अस्वीकार कर दिया, यह कहते हुए कि चूंकि मृतक विवाहित थे, इसलिए उनके भाई को नियुक्ति नहीं दी जा सकती।

याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि यद्यपि वीरेश विवाहित थे, उनकी पत्नी सुनींदा का निधन 9 अप्रैल 2022 को ही हो गया था और उनकी कोई संतान नहीं थी। पत्नी की मृत्यु के बाद वीरेश अपनी मां और भाई का भरण-पोषण कर रहे थे। ऐसे में भाई को नौकरी से वंचित करना अनुचित है और सहानुभूतिपूर्ण नियुक्ति के उद्देश्य के विपरीत है।

न्यायमूर्ति सुरज गोविंदराज ने निगम की इस दलील को खारिज कर दिया और सहानुभूतिपूर्ण नियुक्ति के उद्देश्य पर जोर दिया।

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सहानुभूतिपूर्ण आधार पर नियुक्ति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मृत कर्मचारी का परिवार सुरक्षित रहे और उसकी मृत्यु के कारण परिवार पर वित्तीय बोझ न पड़े, अदालत ने कहा।

अदालत ने पाया कि मृतक की पत्नी पहले ही गुजर चुकी थी और कोई संतान नहीं थी। ऐसे में भाई, जो अपनी मां की देखभाल की जिम्मेदारी निभा रहा है, नियुक्ति का हकदार है।

"यदि कर्मचारी की पत्नी उससे पहले ही गुजर चुकी हो और कोई संतान न हो, तो केवल विवाह होने के आधार पर सहानुभूतिपूर्ण नियुक्ति का आवेदन खारिज नहीं किया जा सकता," न्यायाधीश ने कहा।

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हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए निगम का अस्वीकार आदेश रद्द कर दिया और श्री संगन्ना को उनकी योग्यता के अनुसार उपयुक्त पद पर 12 सप्ताह के भीतर नियुक्त करने का निर्देश दिया। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संगन्ना अपनी मां की देखभाल नहीं करते, तो मां को नियुक्ति रद्द करवाने का अधिकार रहेगा।

मामले का शीर्षक :स्म्ट. मंतव्वा एवं श्री संगन्ना बनाम डिवीजनल कंट्रोलर, के.के.आर.टी.सी., बल्लारी डिवीजन

मामला संख्या :रिट याचिका संख्या 101661/2025 (एस-केएसआरटीसी)

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