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मणिपुर हाई कोर्ट ने शिक्षक की रिट पर रास्ता साफ किया, कहा-स्कूल सेवा नियमों में वैकल्पिक उपाय होने के बावजूद निलंबन को चुनौती सुनी जा सकती है

मणिपुर हाई कोर्ट ने शिक्षक की निलंबन रिट सुनने की अनुमति दी, कहा-जब दंड नहीं लगाया गया हो और समिति की वैधता पर सवाल हो, तो वैकल्पिक उपाय बाधा नहीं।

Shivam Y.
मणिपुर हाई कोर्ट ने शिक्षक की रिट पर रास्ता साफ किया, कहा-स्कूल सेवा नियमों में वैकल्पिक उपाय होने के बावजूद निलंबन को चुनौती सुनी जा सकती है

मणिपुर हाई कोर्ट ने गुरुवार को एक सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल के शिक्षक की लंबे समय से चली आ रही शिकायत पर सुनवाई करते हुए कहा कि निलंबन आदेश को सीधे रिट क्षेत्राधिकार में चुनौती दी जा सकती है। इम्फाल में सुने गए इस मामले में बकाया वेतन, विवादित स्कूल प्रबंधन समितियों और वर्षों से लंबित निलंबन का सवाल शामिल है।

अदालत के इस आदेश ने कम से कम एक मुद्दे पर स्थिति साफ कर दी-क्या शिक्षक सही मंच पर आया है या नहीं। फिलहाल, जवाब है-हां।

पृष्ठभूमि

यह मामला तांगजेंग निंगथौ हाई स्कूल (एडेड), थौबल में कार्यरत शिक्षक श्री मुतुम श्यामो सिंह द्वारा दायर किया गया था। उन्होंने 10 जून 2022 को जारी कारण बताओ नोटिस और उसके पांच दिन बाद जारी निलंबन आदेश को चुनौती दी। इसके साथ ही उन्होंने लगभग चार वर्षों से लंबित वेतन बकाया की मांग की और स्कूल प्रबंधन समिति के गठन पर भी सवाल उठाए।

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राज्य सरकार और स्कूल प्रबंधन ने याचिका का विरोध किया। स्कूल प्रबंधन समिति का कहना था कि यह रिट याचिका सुनवाई योग्य ही नहीं है, क्योंकि शिक्षक को पहले सरकारी सहायता प्राप्त निजी स्कूल शिक्षकों (अनुशासन, दंड और अपील) नियमों के तहत उपलब्ध वैकल्पिक उपाय अपनाने चाहिए थे। साधारण शब्दों में, उनका तर्क था—पहले विभागीय अपील में जाइए, हाई कोर्ट बाद में।

अदालत की टिप्पणियां

पीठ ने सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों पर लागू सेवा नियमों का विस्तार से परीक्षण किया। अदालत ने यह रेखांकित किया कि नियमों में दंड—जैसे सेवा समाप्ति या अनिवार्य सेवानिवृत्ति-और निलंबन के बीच स्पष्ट अंतर है। निलंबन केवल जांच या जांच प्रक्रिया के दौरान एक अस्थायी व्यवस्था है।

अदालत ने कहा कि “नियम 1 के अंतर्गत निलंबन को दंड के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया गया है,” और यह स्पष्ट किया कि अपील की व्यवस्था तभी लागू होती है जब जांच के बाद कोई दंड लगाया जाए।

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पीठ ने वैकल्पिक उपाय को लेकर दी गई दलील पर भी विचार किया। अदालत ने याद दिलाया कि हालांकि उच्च न्यायालय आम तौर पर पहले वैधानिक उपाय अपनाने पर जोर देते हैं, लेकिन यह कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। अदालत ने कहा, “वैकल्पिक उपाय की उपलब्धता विवेक का नियम है, बाध्यता का नहीं।”

खास बात यह रही कि शिक्षक ने केवल निलंबन को ही नहीं, बल्कि उस स्कूल प्रबंधन समिति की वैधता को भी चुनौती दी थी जिसने यह आदेश जारी किया। चूंकि अभी तक कोई अंतिम दंड नहीं लगाया गया है, इसलिए नियमों के तहत अपील का रास्ता फिलहाल खुलता ही नहीं, ऐसा अदालत का निष्कर्ष रहा।

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निर्णय

इन सभी तथ्यों को देखते हुए मणिपुर हाई कोर्ट ने माना कि रिट याचिका सुनवाई योग्य है और केवल वैकल्पिक उपाय के आधार पर इसे खारिज नहीं किया जा सकता। स्कूल प्रबंधन समिति द्वारा जारी निलंबन आदेश को चुनौती देने वाली याचिका अब आगे सुनी जाएगी।

मामले को संबंधित अन्य याचिकाओं के साथ 16 जनवरी 2026 को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है, जबकि मूल विवादित मुद्दों पर निर्णय बाद में होगा।

Case Title: Shri Mutum Shyamo Singh vs The State of Manipur & Others

Case No.: WP(C) No. 184 of 2023

Case Type: Writ Petition (Service Matter – Suspension / Maintainability)

Decision Date: 19 December 2025

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