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युवा वकीलों के प्रति न्यायाधीशों को धैर्य दिखाना चाहिए: आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के विवाद के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने शिकायत निवारण पैनल गठित करने का सुझाव दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट जज-वकील विवाद में आगे हस्तक्षेप से इनकार करते हुए हाईकोर्ट्स को शिकायत निवारण समितियां बनाने का सुझाव दिया। - बार काउंसिल ऑफ इंडिया बनाम आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय

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युवा वकीलों के प्रति न्यायाधीशों को धैर्य दिखाना चाहिए: आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के विवाद के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने शिकायत निवारण पैनल गठित करने का सुझाव दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार सोमवार (11 मई) को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में एक जज और युवा वकील के बीच हुए विवाद से जुड़े मामले में आगे किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं बताई। अदालत ने कहा कि मामला हाईकोर्ट स्तर पर मुख्य न्यायाधीश और बार एसोसिएशन की पहल से सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझा लिया गया है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान न्यायपालिका को यह भी याद दिलाया कि युवा वकीलों के प्रति धैर्य, संवेदनशीलता और प्रोत्साहन का रवैया बनाए रखना आवश्यक है।

मामला क्या था?

यह विवाद उस समय सामने आया जब आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस तारलादा राजशेखर राव की और एक युवा अधिवक्ता के बीच अदालत में हुई तीखी बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

वीडियो में जज वकील को फटकार लगाते और पुलिस बुलाने की बात कहते दिखाई दिए थे। अदालत में मौजूद वकील का कहना था कि केस फाइलें गलती से हाथ से गिर गई थीं, जबकि जज को लगा कि उन्हें गुस्से में फेंका गया है।

इस घटना के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने गंभीर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकान्त और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने की।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका के सभी स्तरों पर जजों को युवा वकीलों के प्रति संयम और सहयोग का रवैया अपनाना चाहिए।

पीठ ने कहा,

“न्यायपालिका के सदस्यों को विशेष रूप से युवा वकीलों के प्रति धैर्य, करुणा और प्रोत्साहन की भावना प्रदर्शित करनी चाहिए।”

अदालत ने यह भी कहा कि पेशेवर अनुशासन और नैतिकता सिखाने की जिम्मेदारी केवल वरिष्ठ वकीलों की नहीं, बल्कि बेंच की भी है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी नोट किया कि जज की टिप्पणी किसी लिखित या लागू किए जाने योग्य आदेश में परिवर्तित नहीं हुई थी। अदालत के समक्ष रखी गई रिपोर्ट में बताया गया कि मामला हाईकोर्ट स्तर पर सुलझ चुका है और संबंधित अधिवक्ता को भी अब कोई शिकायत नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के हाईकोर्ट्स को सुझाव दिया कि वे बार काउंसिल और बार एसोसिएशन के सदस्यों को शामिल करते हुए शिकायत निवारण समितियां (Grievance Redressal Committees) गठित करें।

अदालत के अनुसार, ऐसी समितियां बार और बेंच के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों को समय रहते सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने में मदद करेंगी।

सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की कार्यवाही से जुड़े वीडियो क्लिप्स के प्रसार पर भी चिंता जताई।

पीठ ने कहा,

“संदर्भ से हटाकर वीडियो क्लिप प्रसारित करने से अनावश्यक पूर्वाग्रह पैदा हो सकता है। मीडिया को अधिक जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए।”

मुख्य न्यायाधीश की रिपोर्ट और दोनों पक्षों के बीच विवाद सुलझ जाने को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले में आगे कोई निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया और कार्यवाही समाप्त कर दी।

Case Details:

Case Title: BAR COUNCIL OF INDIA Versus HIGH COURT OF ANDHRA PRADESH

Case Number: W.P.(C) No. 602/2026 & connected matter

Judge: CJI Surya Kant and Justice Joymalya Bagchi

Decision Date: May 11, 2026

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