इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में मंगलवार को एक अहम मामले की सुनवाई शाम तक चली। मामला अनुच्छेद 227 के तहत दायर याचिका का था, जिसे सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर छह महीने के भीतर निपटाया जाना था। समयसीमा के अंतिम दिन अदालत ने सुनवाई पूरी की, लेकिन फैसला सुरक्षित रख लिया।
पीठ की अध्यक्षता न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी कर रहे थे।
मामले की पृष्ठभूमि
यह याचिका चंद्रलेखा सिंह बनाम कैनरा बैंक एवं अन्य शीर्षक से दायर की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज कुदेसिया ने अपने सहयोगी वकीलों के साथ पक्ष रखा। वहीं, प्रतिवादी संख्या 3 और 4 की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप कुमार उपस्थित थे।
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प्रतिवादी संख्या 1 के रूप में Canara Bank की ओर से भी पक्ष रखा गया।
मामला पहले सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। 25 अगस्त 2025 को शीर्ष अदालत ने इसे दोबारा हाईकोर्ट को भेजते हुए अनुरोध किया था कि याचिका का निस्तारण “यथाशीघ्र, अधिमानतः छह माह के भीतर” किया जाए।
अदालत में क्या हुआ
मंगलवार को जब यह मामला सूचीबद्ध हुआ, तब अदालत में पहले से भारी काम का बोझ था। जज ने खुली अदालत में बताया कि उस दिन 92 नए मामले, 101 नियमित मामले, 39 ताज़ा विविध आवेदन और तीन अतिरिक्त सूची के मामले सूचीबद्ध थे।
पीठ ने कहा कि केवल 29 क्रमांक तक के नए मामलों की ही सुनवाई हो सकी।
इसके बावजूद, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को ध्यान में रखते हुए इस याचिका की सुनवाई शाम 4:15 बजे शुरू की गई और रात 7:10 बजे तक चली।
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने विस्तार से अपने-अपने तर्क रखे। अदालत ने सभी दलीलों को सुना और रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों पर भी गौर किया।
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न्यायालय की टिप्पणी
सुनवाई समाप्त होने के बाद न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने खुलकर अपनी स्थिति अदालत के सामने रखी।
उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देखते हुए इस मामले की सुनवाई प्राथमिकता से की गई। लेकिन आज पूरे दिन की लंबी कार्यवाही के बाद मैं स्वयं को थका हुआ और शारीरिक रूप से असमर्थ महसूस कर रहा हूं।”
पीठ ने यह भी उल्लेख किया कि दिनभर की सुनवाई और कार्यभार के कारण तुरंत फैसला लिखवाना संभव नहीं है।
अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि परिस्थितियों को देखते हुए निर्णय सुरक्षित रखा जा रहा है।
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निर्णय
सभी पक्षों को सुनने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया।
अदालत ने संकेत दिया कि निर्णय बाद में सुनाया जाएगा।
Case Title: Chandralekha Singh vs Canara Bank & Others
Case No.: Matters Under Article 227 No. 3164 of 2025
Decision Date: February 24, 2026










