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सुप्रीम कोर्ट ने पारिवारिक संपत्ति विवाद में संयुक्त वसीयत को मान्य ठहराया, उत्तराधिकारियों को मुआवज़ा देने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने सी.आर. पायस और उनकी पत्नी द्वारा बनाई गई संयुक्त वसीयत को वैध करार दिया और केरल हाई कोर्ट द्वारा भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 67 के तहत दिए गए फैसले को खारिज कर दिया।

Vivek G.
सुप्रीम कोर्ट ने पारिवारिक संपत्ति विवाद में संयुक्त वसीयत को मान्य ठहराया, उत्तराधिकारियों को मुआवज़ा देने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2025 के अपने निर्णय में एर्नाकुलम (केरल) के दिवंगत सी.आर. पायस और फिलोमीना पायस के बच्चों के बीच चल रहे लंबे समय से संपत्ति विवाद पर अंतिम मुहर लगा दी। विवाद का मुख्य मुद्दा 27 जनवरी 2003 को बनाई गई संयुक्त वसीयत था, जिसमें अधिकतर संपत्ति बेटे सी.पी. फ्रांसिस (अपीलकर्ता) के नाम की गई थी, साथ ही उसे अपने भाइयों-बहनों को निश्चित रकम देने का दायित्व सौंपा गया था।

अन्य भाई-बहनों का आरोप था कि वसीयत धोखाधड़ी और दबाव में बनाई गई और माता-पिता मानसिक रूप से सक्षम नहीं थे। वे सभी ने दावा किया कि माता-पिता बिना वसीयत (Intestate) मरे और प्रत्येक को संपत्ति में 1/8वां हिस्सा मिलना चाहिए।

  • मुनसिफ कोर्ट (2011): वसीयत को वैध ठहराया और विभाजन का मुकदमा खारिज किया।
  • अपील न्यायालय (2013): ट्रायल कोर्ट के निर्णय की पुष्टि की और कहा कि वसीयत स्वेच्छा से बनाई गई थी।
  • केरल हाई कोर्ट (2014): दोनों निर्णय पलट दिए और कहा कि चूंकि एक गवाह मुख्य लाभार्थी (फ्रांसिस) की पत्नी थी, इसलिए भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925 की धारा 67 के तहत वसीयत शून्य है।

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इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट ने धारा 67 को लागू करने में सीमा का उल्लंघन किया, क्योंकि यह मुद्दा अपील के समय उठाया ही नहीं गया था।

“दूसरी अपील के चरण पर धारा 67 का सहारा लेना केवल नया कानूनी तर्क नहीं है, बल्कि यह तो वादी के लिए पूरी तरह नया मामला बना देता है।”

कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट और अपीलीय अदालत दोनों ने ही वसीयत को वैध और प्रमाणित माना था, इसलिए हाई कोर्ट का निर्णय गलत था।

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जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की पीठ ने हाई कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया और वसीयत के आधार पर उत्तराधिकार बहाल किया। हालांकि, कोर्ट ने सभी उत्तराधिकारियों के साथ न्याय करते हुए मुआवज़ा बढ़ाने का आदेश दिया।

  • मारिया के उत्तराधिकारी (कविता एंटनी व सविता साचिन): ₹10,00,000
  • डेस्टी थॉमस: ₹5,00,000
  • क्लारा जैकब: ₹5,00,000
  • सी.पी. जोसेफ: ₹10,00,000
  • सी.पी. राफेल: ₹10,00,000
  • सी.पी. जॉर्ज: ₹10,00,000

भुगतान न होने पर राशि पर 6% वार्षिक ब्याज लगेगा और संपत्ति पर कानूनी चार्ज रखा जाएगा।

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“यह सिद्धांत है कि जब वसीयत विधि संगत रूप से साबित हो जाती है, तो अदालत को मृतक की इच्छा के अनुसार ही उत्तराधिकार को लागू करना चाहिए, न कि इसके विपरीत नया बंटवारा खोलना चाहिए।”

केस का शीर्षक: सी.पी. फ्रांसिस बनाम सी.पी. जोसेफ एवं अन्य
सिविल अपील संख्या 2025 [@ एसएलपी (सी) संख्या 13348/2025]

उद्धरण: 2025 आईएनएससी 1071

निर्णय की तिथि: 3 सितंबर, 2025

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