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90 दिन की समय-सीमा पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी व्याख्या: अंतरिम राहत बरकरार, हाई कोर्ट का आदेश पलटा

रीजेंटा होटल्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम मैसर्स होटल ग्रैंड सेंटर पॉइंट और अन्य। सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता कानून की 90 दिन की समय-सीमा पर अहम फैसला देते हुए कहा कि नोटिस मिलते ही प्रक्रिया शुरू मानी जाएगी।

Vivek G.
90 दिन की समय-सीमा पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी व्याख्या: अंतरिम राहत बरकरार, हाई कोर्ट का आदेश पलटा

नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान Supreme Court of India ने मध्यस्थता कानून से जुड़े एक अहम सवाल पर स्पष्ट रुख अपनाया। होटल फ्रेंचाइज़ विवाद में अदालत ने कहा कि मध्यस्थता की शुरुआत नोटिस मिलने से मानी जाएगी, न कि अदालत में अर्जी दाखिल करने की तारीख से। इसी आधार पर कर्नाटक हाई कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया गया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद Regenta Hotels Private Limited और श्रीनगर स्थित होटल ग्रैंड सेंटर पॉइंट के साझेदारों के बीच है। 2019 में दोनों पक्षों के बीच फ्रेंचाइज़ समझौता हुआ था, जिसके तहत होटल का संचालन रेगेंटा ब्रांड के तहत होना था।

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समय के साथ होटल के साझेदारों के बीच आपसी मतभेद बढ़े। आरोप लगा कि एक साझेदार होटल के रोज़मर्रा के कामकाज में दखल दे रहा है। इस पर रेगेंटा होटल्स ने मध्यस्थता कानून की धारा 9 के तहत बेंगलुरु की ट्रायल कोर्ट में अंतरिम रोक लगाने की मांग की।

ट्रायल कोर्ट ने फरवरी 2024 में अस्थायी राहत दी, लेकिन अक्टूबर में इसे यह कहते हुए हटा दिया कि मध्यस्थता की प्रक्रिया तय समय में शुरू नहीं हुई। इसी फैसले को High Court of Karnataka ने भी बरकरार रखा।

कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि मध्यस्थता की “शुरुआत” का मतलब कानून में पहले से तय है। अदालत ने टिप्पणी की,

“मध्यस्थता की प्रक्रिया उस दिन से शुरू मानी जाएगी, जिस दिन विवाद को मध्यस्थता में भेजने का नोटिस प्रतिवादी को मिलता है।”

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पीठ ने यह भी कहा कि हाई कोर्ट ने धारा 11 की याचिका दायर करने की तारीख को गलत तरीके से मध्यस्थता की शुरुआत मान लिया, जबकि कानून ऐसा नहीं कहता।

मुख्य सवाल यह था कि क्या अंतरिम राहत मिलने के 90 दिनों के भीतर केवल मध्यस्थता नोटिस भेजना पर्याप्त है, या फिर मध्यस्थ की नियुक्ति के लिए अदालत में याचिका दाखिल करना ज़रूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नोटिस मिलते ही मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। अदालत में अर्जी दाखिल करना अगला कदम हो सकता है, लेकिन उससे शुरुआत तय नहीं होती।

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अदालत का निर्णय

इन तथ्यों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट का फैसला रद्द कर दिया और ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम राहत को बहाल कर दिया। अदालत ने यह भी कहा कि मध्यस्थ की नियुक्ति से जुड़ी याचिका पर हाई कोर्ट कानून के अनुसार जल्द फैसला करे।

इसके साथ ही अपील स्वीकार कर ली गई और अवमानना याचिका पर फिलहाल आगे कार्रवाई नहीं की गई।

Case Title: Regenta Hotels Pvt. Ltd. vs M/s Hotel Grand Centre Point & Ors.

Case No.: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 30212 of 2024

Decision Date: 7 January 2026

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