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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्र पर लगाई ‘अपमानजनक शर्त’ हटाई, कहा- ऐसी सज़ा से भविष्य पर पड़ता है बुरा असर

X बनाम अध्यक्ष, यूजीसी और अन्य - इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने छात्र निष्कासन मामले में अपमानजनक तख्ती की शर्त हटा दी, कहा कि सजा से करियर पर दाग लगेगा, शर्तों के साथ पढ़ाई की अनुमति दी।

Shivam Y.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्र पर लगाई ‘अपमानजनक शर्त’ हटाई, कहा- ऐसी सज़ा से भविष्य पर पड़ता है बुरा असर

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक छात्र की अपील पर सुनवाई करते हुए उस शर्त को रद्द कर दिया, जिसमें उसे विश्वविद्यालय के गेट पर तख्ती लेकर खड़े होने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने कहा कि ऐसी शर्त अपमानजनक है और इससे छात्र के चरित्र पर स्थायी दाग पड़ सकता है। यह मामला विशेष अपील संख्या 80/2026 से जुड़ा है, जिसमें पहले एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती दी गई थी।

मामले की पृष्ठभूमि

छात्र को पहले विश्वविद्यालय से निलंबित (रस्टिकेट) किया गया था। बाद में एकल न्यायाधीश ने निलंबन तो रद्द कर दिया, लेकिन पढ़ाई जारी रखने के लिए कुछ शर्तें लगा दीं। इनमें 95% उपस्थिति, लिखित माफी और परिसर में अनुशासन से जुड़ी बातें शामिल थीं।

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विवादित शर्त यह थी कि छात्र 30 दिनों तक रोज़ 30 मिनट गेट पर खड़ा होकर तख्ती पकड़े, जिस पर लिखा हो कि वह किसी लड़की से दुर्व्यवहार नहीं करेगा। विश्वविद्यालय को इसकी फोटो लेने का भी निर्देश था।

अदालत की टिप्पणियाँ

मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की पीठ ने कहा कि शर्त संख्या (II) “किसी भी हाल में उचित नहीं” है। पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसी सज़ा “न सिर्फ अपमानजनक है, बल्कि छात्र के चरित्र पर स्थायी दाग” छोड़ सकती है। अदालत ने यह भी माना कि अन्य शर्तें जैसे उपस्थिति, लिखित माफी और पुलिस की निगरानी छात्र के पहले के व्यवहार को देखते हुए उचित हैं।

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फैसला

हाईकोर्ट ने एकल न्यायाधीश के आदेश से विवादित शर्त (तख्ती लेकर खड़े होने वाली) को हटा दिया। अदालत ने यह भी कहा कि यदि इसी शर्त के उल्लंघन के आधार पर छात्र को फिर से निलंबित किया गया हो, तो उसे लिखित माफी की शर्त पूरी करने का एक मौका दिया जाए। इसके बाद निलंबन अपने आप खत्म माना जाएगा, बशर्ते वह उपस्थिति से जुड़ी शर्त का ईमानदारी से पालन करे।

इसी के साथ अपील का निपटारा कर दिया गया।

Case Title: X v. Chairman, UGC & Others

Case Number: Special Appeal Defective No. 80 of 2026

Decision Date: February 4, 2026

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