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दिल्ली HC ने हिरासत विस्तार को बरकरार रखा, मकोका मामले में एसआई सुखबीर सिंह को डिफ़ॉल्ट जमानत देने से इनकार किया

दिल्ली हाई कोर्ट ने एमसीओसीए मामले में एसआई सुखबीर सिंह की डिफॉल्ट बेल याचिका खारिज की, कहा एसपीपी नियुक्ति में देरी प्रक्रिया संबंधी थी, अवैध नहीं।

Shivam Y.
दिल्ली HC ने हिरासत विस्तार को बरकरार रखा, मकोका मामले में एसआई सुखबीर सिंह को डिफ़ॉल्ट जमानत देने से इनकार किया

8 अगस्त 2025 को दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के सब-इंस्पेक्टर सुखबीर सिंह की याचिका खारिज कर दी, जो एक चर्चित संगठित अपराध मामले में आरोपी हैं। यह मामला 7 दिसंबर 2024 को सुनील जैन की हत्या से जुड़ा है, जिसे पुलिस के अनुसार गैंगवार में हुई पहचान की गलती के कारण अंजाम दिया गया था।

सुखबीर सिंह को 16 फरवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया। उनकी कार की तलाशी में पुलिस को कई मोबाइल फोन, जीपीएस डिवाइस, ₹5.12 लाख नकद और 31 जिंदा कारतूस मिले। जांच एजेंसियों का आरोप है कि उन्होंने हत्या में शामिल दो शूटरों को मिलवाया और उनमें से एक को गिरफ्तारी से बचाने में मदद की।

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21 अप्रैल 2025 को MCOCA की धाराएं लगाई गईं, जिससे जांच की अवधि 90 दिनों से बढ़ाकर अधिकतम 180 दिन तक की जा सकती थी। सिंह ने दो अहम आदेशों को चुनौती दी - 13 जून 2025 का आदेश, जिसमें उनकी हिरासत और जांच की अवधि बढ़ाई गई, और 8 जुलाई 2025 का आदेश, जिसमें उनकी डिफॉल्ट बेल अर्जी खारिज की गई। उनके वकील का तर्क था कि 13 जून 2025 को मौजूद विशेष लोक अभियोजक (SPP) की नियुक्ति उस समय धारा 8 MCOCA के तहत वैध नहीं थी, इसलिए विस्तार का आदेश अवैध है।

राज्य ने जवाब में कहा कि SPP अखंड प्रताप सिंह की नियुक्ति 24 मई 2025 को मंजूर हुई और 8 जुलाई 2025 को औपचारिक रूप से पिछली तारीख से लागू की गई। कोर्ट ने पाया कि SPP की रिपोर्ट को केस डायरी के साथ देखा गया था, जिससे धारा 21(2)(b) MCOCA की आवश्यकताओं की पूर्ति हुई।

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जस्टिस स्वरना कांत शर्मा ने माना कि SPP की नियुक्ति की औपचारिक अधिसूचना में देरी केवल प्रक्रिया संबंधी अनियमितता थी, न कि कानूनी खामी। कोर्ट ने कहा कि आरोपी को कोई हानि नहीं हुई और कानूनी सुरक्षा उपाय पूरे किए गए। याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने राज्य को गंभीर मामलों में तेजी से कार्रवाई करने की नसीहत दी।

केस का शीर्षक:- सुखबीर सिंह बनाम राज्य एनसीटी दिल्ली, SHO के माध्यम से

केस नंबर:- W.P.(CRL) 2100/2025

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