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दिल्ली हाई कोर्ट ने दिव्यांग कोटा की खाली सीटों के न्यायपूर्ण आवंटन हेतु कानून संशोधन की सिफारिश की

दिल्ली हाई कोर्ट ने RPwD अधिनियम में संशोधन कर दिव्यांग कोटा की खाली कॉलेज सीटें सामान्य श्रेणी में जाने से रोकने की सिफारिश की।

Vivek G.
दिल्ली हाई कोर्ट ने दिव्यांग कोटा की खाली सीटों के न्यायपूर्ण आवंटन हेतु कानून संशोधन की सिफारिश की

नई दिल्ली, 16 सितम्बर – दिव्यांग अधिकार समूहों की कड़ी नज़र वाले इस फैसले में दिल्ली हाई कोर्ट ने उच्च शिक्षा में दिव्यांग आरक्षण नीति की खामियों को उजागर किया। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने जयहान्वी नागपाल की याचिका का निपटारा करते हुए सरकार को खुद कानून पर पुनर्विचार करने की सलाह दी।

पृष्ठभूमि

नागपाल, एक मेडिकल अभ्यर्थी, ने NEET-UG 2022 चक्र में दिव्यांग (PwD) कोटे के तहत सीट की मांग की थी। उनकी शिकायत सीधी थी: जब “बेंचमार्क दिव्यांगता” (कम से कम 40% दिव्यांगता) के लिए आरक्षित सीटें खाली रह जाती हैं, तो उन्हें सामान्य श्रेणी को लौटा दिया जाता है, न कि कम दिव्यांगता वाले उम्मीदवारों को। उनके वकील ने तर्क दिया, “यह समावेशिता की मूल भावना को ही समाप्त करता है,” और 2023 के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि ऐसी रिक्तियां आदर्श रूप से अधिक दिव्यांग व्यक्तियों की मदद करें।

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न्यायालय के अवलोकन

पीठ ने माना कि 2016 का अधिकारिता अधिनियम (RPwD Act) “दिव्यांग व्यक्ति” और “बेंचमार्क दिव्यांगता वाले व्यक्ति” के बीच स्पष्ट भेद करता है। उच्च शिक्षा में कम-से-कम 5% सीटें बेंचमार्क दिव्यांगता के लिए सुरक्षित करने वाली धारा 32 में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि खाली सीटों को अगले सत्र के लिए सुरक्षित रखा जाए या कम दिव्यांगता वाले लोगों को दी जाए।

“कानून को वैसा ही पढ़ा जाना चाहिए जैसा लिखा गया है, न कि उसमें कुछ जोड़कर,” अदालत ने कहा। फिर भी अदालत ने समानता के संवैधानिक वादे को रेखांकित किया। सुप्रीम कोर्ट के विकास कुमार फैसले का हवाला देते हुए न्यायाधीशों ने जोर दिया कि “किसी भी दिव्यांग व्यक्ति के लिए यथोचित सुविधा उपलब्ध कराना संवैधानिक दायित्व है।”

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फैसला

कानून को खुद से नहीं बदलते हुए भी न्यायालय ने सुधार की तात्कालिकता पर जोर दिया। आदेश में कहा गया, “यह समय की मांग है कि भारत सरकार इन मुद्दों पर ध्यान दे।” पीठ ने विधि आयोग से औपचारिक रूप से अनुरोध किया कि वह इस विषय पर अध्ययन कर सिफारिश करे ताकि खाली आरक्षित सीटों को अगले शैक्षणिक वर्ष में आगे बढ़ाया जा सके या कम दिव्यांगता वाले उम्मीदवारों को आवंटित किया जा सके। इसी अनुशंसा के साथ याचिका का निपटारा किया गया।

मामला: सुश्री जाह्नवी नागपाल बनाम भारत संघ एवं अन्य

मामला संख्या: डब्ल्यू.पी.(सी) 1975/2023

निर्णय तिथि: 16 सितंबर 2025

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