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लोकसभा जांच के दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा ने इस्तीफा दिया

Shivam Y.
लोकसभा जांच के दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा ने इस्तीफा दिया

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह कदम उस समय उठाया गया है जब उनके खिलाफ कथित नकदी बरामदगी से जुड़ी जांच प्रक्रिया जारी थी।

मामले की पृष्ठभूमि

पूरा विवाद मार्च 2025 में सामने आया था। उस समय दिल्ली में स्थित उनके आधिकारिक आवास के एक हिस्से में आग बुझाने के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी मिलने की सूचना सामने आई। उस वक्त जस्टिस वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट में कार्यरत थे।

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इस घटना के बाद मामला तेजी से चर्चा में आया और न्यायपालिका की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे। इसके बाद एक आंतरिक जांच समिति गठित की गई, जिसने प्रारंभिक स्तर पर कुछ गंभीर बिंदुओं की ओर संकेत किया।

लोकसभा में 146 सांसदों द्वारा महाभियोग प्रस्ताव लाए जाने के बाद स्पीकर ने न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया।

यह समिति आरोपों की जांच कर रही थी और जस्टिस वर्मा को अपना पक्ष रखने के लिए समय भी दिया गया था। जानकारी के अनुसार, उन्हें अप्रैल 2026 में समिति के समक्ष पेश होना था।

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राष्ट्रपति को भेजे गए अपने पत्र में जस्टिस वर्मा ने लिखा:

“गहरे मनोभाव के साथ मैं तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे रहा हूँ।”

उन्होंने आगे कहा कि वे अपने निर्णय के पीछे के कारणों को विस्तार से बताकर राष्ट्रपति के पद की गरिमा को प्रभावित नहीं करना चाहते। साथ ही, उन्होंने न्यायिक सेवा को अपने लिए सम्मानजनक अवसर बताया।

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विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनसे न्यायिक कार्य वापस ले लिया था और उन्हें उनके मूल उच्च न्यायालय, यानी इलाहाबाद हाईकोर्ट, वापस भेज दिया गया था।

जांच से जुड़ी रिपोर्ट को आगे की कार्रवाई के लिए उच्च संवैधानिक पदों तक भेजा गया था। साथ ही, जस्टिस वर्मा द्वारा जांच समिति के गठन को चुनौती देने वाली याचिका भी अदालत ने खारिज कर दी थी।

जस्टिस वर्मा के इस्तीफे के बाद उनके खिलाफ चल रही संसदीय जांच और महाभियोग प्रक्रिया के आगे बढ़ने पर विराम लगने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

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