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झारखंड हाईकोर्ट ने कोडरमा चौकीदार भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कीं

झारखंड हाईकोर्ट ने कोडरमा चौकीदार भर्ती को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कीं, ज़िला-स्तरीय चयन नियमों को बरकरार रखा।

Vivek G.
झारखंड हाईकोर्ट ने कोडरमा चौकीदार भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कीं

झारखंड हाईकोर्ट, रांची ने ग्रामीन चौकीदार की कोडरमा ज़िले में हुई भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली तीन याचिकाओं को खारिज कर दिया है। याचिकाएं पिंटू कुमार, रविंद्र कुमार और कंचन कुमारी सिन्हा ने दायर की थीं, जिनमें शॉर्टलिस्टिंग और मेरिट लिस्ट तैयार करने में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने यह आदेश 19 सितंबर 2025 को सुनाया।

पृष्ठभूमि

विवाद तब शुरू हुआ जब कोडरमा के उपायुक्त ने ग्रामीन चौकीदारों की भर्ती के लिए विज्ञापन संख्या 01/2024 जारी किया। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, विज्ञापन में स्पष्ट लिखा था कि उम्मीदवार उसी बीट क्षेत्र का स्थायी निवासी होना चाहिए, जहाँ से आवेदन किया गया है। लेकिन शॉर्टलिस्टिंग ज़िला-स्तरीय श्रेणीवार कट-ऑफ पर की गई, जिससे कई स्थानीय उम्मीदवार बाहर हो गए।

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याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यह तरीका अनुचित है। उनके वकील ने कहा-“ज़िले-स्तर पर परिणाम प्रकाशित करना मनमाना और भेदभावपूर्ण है।” उन्होंने यह भी बताया कि कई बीट बिना स्थानीय चौकीदार के रह गए।

विशेष रूप से, याचिकाकर्ता कंचन कुमारी सिन्हा ने दावा किया कि उन्होंने लिखित परीक्षा में 70% अंक हासिल किए थे, जो न्यूनतम क्वालिफाईंग अंकों से ऊपर है, फिर भी उन्हें शारीरिक परीक्षा में शामिल होने का अवसर नहीं दिया गया।

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न्यायालय की टिप्पणियां

पीठ ने झारखंड चौकीदार कैडर नियमावली, 2015 का बारीकी से अध्ययन किया, जो भर्ती प्रक्रिया को नियंत्रित करती है। न्यायाधीशों ने नोट किया कि नियमों में जहाँ एक ओर उम्मीदवार का संबंधित बीट का स्थायी निवासी होना ज़रूरी है, वहीं वास्तविक नियुक्ति ज़िला स्तर पर की जानी है।

न्यायमूर्ति राजेश शंकर ने आदेश लिखते हुए कहा-“नियमों में प्रयुक्त शब्द यथासंभव इस बात का संकेत देता है कि बीट में पदस्थापन वांछनीय है, लेकिन अनिवार्य नहीं। इसी तरह सामान्यतः यह दर्शाता है कि गैर-स्थानांतरण का प्रावधान बाध्यकारी नहीं बल्कि निर्देशात्मक है।”

अदालत ने कानून की उद्देश्यमूलक व्याख्या पर ज़ोर दिया और सर्वोच्च न्यायालय के कई फैसलों का हवाला दिया। “यदि शाब्दिक अर्थ से बेतुकी स्थिति पैदा होती है, तो उद्देश्यमूलक व्याख्या को प्राथमिकता दी जानी चाहिए,” पीठ ने टिप्पणी की।

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कंचन कुमारी सिन्हा की विशेष दलील पर अदालत ने कहा कि भले ही उन्होंने 30% न्यूनतम अंकों से अधिक हासिल किया हो, लेकिन लिखित परीक्षा का कट-ऑफ 80% तय था। अदालत ने स्पष्ट किया-“सिर्फ क्वालिफाईंग अंक पाने भर से शारीरिक परीक्षा में बुलाए जाने का अधिकार नहीं बनता।”

फैसला

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, खंडपीठ ने निष्कर्ष निकाला कि भर्ती प्रक्रिया कैडर नियमों और ज़िला-स्तरीय रोस्टर सिस्टम के अनुसार हुई है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की बीट-वार नियुक्ति की व्याख्या कानून के अनुरूप नहीं है।

इन दलीलों में कोई ठोस आधार न पाते हुए, अदालत ने तीनों याचिकाओं को खारिज कर दिया और लंबित अंतरिम आवेदनों को भी समाप्त कर दिया।

इस प्रकार, कोडरमा में चौकीदार भर्ती प्रक्रिया को झारखंड हाईकोर्ट ने वैध ठहराया।

Case Title: Pintu Kumar & Ors. vs. State of Jharkhand & Ors.

Case Numbers: W.P.(S) No.1498 of 2025, W.P.(S) No.1529 of 2025, W.P.(S) No.4064 of 2025

Date of Decision: 19 September 2025

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