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मद्रास हाईकोर्ट का आदेश: संदिग्ध हिरासत मौत मामले में SC/ST एक्ट जोड़कर CB-CID जांच कराए राज्य, शांति समिति गठित

ए. राजेशकन्नन बनाम गृह सचिव और अन्य, मद्रास हाईकोर्ट ने कथित हिरासत मौत मामले में CB-CID जांच का आदेश दिया और SC/ST एक्ट जोड़ने के निर्देश दिए, साथ ही विरोध प्रदर्शनों पर पीस कमेटी गठित की।

Vivek G.
मद्रास हाईकोर्ट का आदेश: संदिग्ध हिरासत मौत मामले में SC/ST एक्ट जोड़कर CB-CID जांच कराए राज्य, शांति समिति गठित

मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने कथित पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। अदालत ने निर्देश दिया कि जांच अब क्राइम ब्रांच-सीआईडी (CB-CID) के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की जाए और मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रावधान भी शामिल किए जाएं। अदालत ने यह भी कहा कि मामले से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के कारण सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए एक पीस कमेटी गठित की जाएगी।

यह आदेश न्यायमूर्ति एल. विक्टोरिया गौरी की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए 11 मार्च 2026 को दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता ए. राजेश्कन्नन ने अदालत से मांग की थी कि उनके बेटे आकाश डेलिसन की मौत को पुलिस हिरासत में हुई यातना का मामला मानते हुए हत्या का केस दर्ज किया जाए और इसकी जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।

याचिका में कहा गया कि मृतक अनुसूचित जाति समुदाय से था, जिसका प्रमाण समुदाय प्रमाणपत्र से मिलता है। ऐसे में, आरोपों के मद्देनज़र SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधान स्वतः लागू होते हैं।

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि कानून के अनुसार इस अधिनियम के मामलों में एफआईआर दर्ज करने से पहले किसी प्रारंभिक जांच की आवश्यकता नहीं होती, फिर भी राज्य ने समय पर कार्रवाई नहीं की।

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पुलिस का पक्ष

राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि 5 मार्च 2026 की रात एक झगड़े के बाद पुलिस ने आकाश डेलिसन और उसके साथी को गिरफ्तार किया था।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के दौरान आकाश डेलिसन ने भागने की कोशिश की और रेलवे पुल से कूद गया, जिससे उसे चोटें आईं। उसे पहले मनामदुरै के सरकारी अस्पताल ले जाया गया और बाद में इलाज के लिए सिवगंगई मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया।

बाद में उसे न्यायिक हिरासत में भेजते हुए मदुरै के सरकारी राजाजी अस्पताल के कैदी वार्ड में भर्ती कराया गया। वहीं उपचार के दौरान 8 मार्च 2026 की सुबह उसे सांस लेने में दिक्कत हुई और डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद उसकी मौत हो गई।

अदालत के सामने आए तथ्य

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने पेश रिमांड रिपोर्ट में कुछ ऐसे तथ्य सामने आए जो कथित पुलिस यातना की ओर संकेत करते थे।

रिपोर्ट के अनुसार, मृतक के पैर पर जांघ से लेकर पैर तक प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) का बड़ा बैंडेज था और उसने मजिस्ट्रेट के सामने पुलिस द्वारा मारपीट और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था।

मृत्यु के बाद की प्रारंभिक चिकित्सा जानकारी में बताया गया कि मौत का कारण फैट एम्बोलिज़्म हो सकता है, जो आमतौर पर लंबी हड्डियों के फ्रैक्चर के बाद होता है।

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कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां

अदालत ने कहा कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम एक विशेष कानून है, जिसका उद्देश्य इन समुदायों के खिलाफ अत्याचार रोकना और मामलों की त्वरित जांच सुनिश्चित करना है।

पीठ ने कहा: “राज्य, जो कि आपराधिक कानून लागू करने का संवैधानिक संरक्षक है, उसका कर्तव्य है कि ऐसे विशेष कानूनों को उनके वास्तविक उद्देश्य के साथ लागू किया जाए।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने से पहले किसी प्रकार की प्रारंभिक जांच आवश्यक नहीं होती।

जांच को लेकर अदालत का निर्देश

उपलब्ध रिकॉर्ड, समुदाय प्रमाणपत्र और रिमांड रिपोर्ट को देखते हुए अदालत ने माना कि prima facie परिस्थितियां ऐसी हैं जिनमें SC/ST एक्ट के प्रावधान लागू किए जाने चाहिए।

अदालत ने निर्देश दिया कि:

  • मामले की जांच CB-CID के एक पुलिस अधिकारी (डीएसपी रैंक से कम नहीं) को सौंपी जाए।
  • जांच अधिकारी मृतक की जाति स्थिति को ध्यान में रखते हुए SC/ST एक्ट की संबंधित धाराएं मामले में शामिल करें।
  • आगे की जांच उसी आधार पर जारी रखी जाए।

विरोध प्रदर्शन पर अदालत की चिंता

सुनवाई के दौरान राज्य ने अदालत को बताया कि घटना के बाद कुछ संगठनों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए मनामदुरै-रामेश्वरम राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया, जिससे यातायात लगभग 80 किलोमीटर तक प्रभावित हुआ।

अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इससे आम जनता को परेशानी नहीं होनी चाहिए, खासकर जब सड़कें अवरुद्ध हो जाएं और परीक्षाओं का समय हो।

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पीस कमेटी का गठन

स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से संभालने के लिए अदालत ने तीन अधिवक्ताओं की एक पीस कमेटी गठित की।

अदालत ने निर्देश दिया कि यह समिति प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उन्हें समझाए कि वे अपना विरोध मनामदुरै पुराने बस स्टैंड पर स्थानांतरित करें ताकि राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात सामान्य हो सके।

मामले की अगली सुनवाई अनुपालन रिपोर्ट के लिए 12 मार्च 2026 को सूचीबद्ध की गई।

Case Title: A. Rajeshkannan vs The Home Secretary & Others

Case No.: WP CRL.(MD) No.1392 of 2026

Decision Date: 11 March 2026

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