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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पूछा – POCSO कोर्ट ने पीड़िता को अभियोजन गवाह के रूप में क्यों छोड़ा, कहा “उसका बयान मुकदमे के लिए महत्वपूर्ण”

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक बलात्कार मामले में POCSO कोर्ट द्वारा पीड़िता को अभियोजन गवाह के रूप में छोड़ने पर सवाल उठाए, कहा कि उसका बयान निष्पक्ष सुनवाई के लिए बेहद जरूरी है।

Vivek G.
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पूछा – POCSO कोर्ट ने पीड़िता को अभियोजन गवाह के रूप में क्यों छोड़ा, कहा “उसका बयान मुकदमे के लिए महत्वपूर्ण”

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक नाबालिग के साथ बलात्कार के मामले में विशेष POCSO कोर्ट द्वारा पीड़िता को अभियोजन गवाह के रूप में छोड़ने के निर्णय पर गंभीर चिंता जताई है। हाईकोर्ट ने इस कार्रवाई को असामान्य माना और ट्रायल कोर्ट से इस निर्णय के पीछे का कारण बताने को कहा है।

इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अमरजोत भट्टी ने की, जिन्होंने यह कहकर हैरानी जताई कि पीड़िता का बयान अब तक दर्ज नहीं हुआ है, जबकि निष्पक्ष सुनवाई के लिए उसका बयान बेहद आवश्यक है।

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“मुकदमे के उचित और अंतिम निपटारे के लिए पीड़िता का बयान दर्ज किया जाना आवश्यक है,”
— न्यायमूर्ति अमरजोत भट्टी

कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें याचिकाकर्ता विजय पर 2020 में 16 वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार का आरोप लगाया गया है। आरोपी की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि मामला झूठा है और आरोपी पिछले 4 साल 8 महीने से अधिक समय से हिरासत में है, जबकि ट्रायल में कोई विशेष प्रगति नहीं हुई है।

याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट का ध्यान 24 जुलाई 2024 के ज़िम्नी आदेश की ओर आकर्षित किया, जिसे करनाल की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट, POCSO के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने पारित किया था। इस आदेश में उल्लेख था कि पीड़िता को अभियोजन गवाह के रूप में छोड़ दिया गया है। राज्य की ओर से पेश लोक अभियोजक का बयान भी कोर्ट में प्रस्तुत किया गया।

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हाईकोर्ट ने इस पर गंभीर चिंता जताई और अभियोजन के इस निर्णय पर स्पष्टीकरण मांगा।

“यह अजीब है कि पीड़िता को अभियोजन गवाह के रूप में लोक अभियोजक द्वारा छोड़ दिया गया है और यह तथ्य ज़िम्नी आदेश दिनांक 24.07.2024 में उल्लेखित है,”
— न्यायमूर्ति अमरजोत भट्टी

इसी के तहत कोर्ट ने संबंधित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (POCSO), करनाल को निर्देश दिया कि वे यह रिपोर्ट पेश करें कि किन तथ्यों और परिस्थितियों में पीड़िता को अभियोजन गवाह के रूप में छोड़ने का निर्णय लिया गया।

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यह भी उल्लेखनीय है कि जनवरी 2025 में हुई एक पूर्व सुनवाई में हाईकोर्ट ने माना था कि घटना के समय पीड़िता की आयु 16 वर्ष से कम थी। कोर्ट ने कहा था कि यह गंभीर मामला है और इसकी त्वरित सुनवाई जरूरी है। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया था कि वह अभियोजन साक्ष्य को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास करे।

अब यह मामला आगे की सुनवाई के लिए 27 मई 2025 को सूचीबद्ध किया गया है।

यह न्यायिक टिप्पणी POCSO अधिनियम के तहत मामलों में पीड़िता की गवाही के महत्व को रेखांकित करती है, खासकर तब जब आरोपी लंबे समय से जेल में हो। हाईकोर्ट का यह हस्तक्षेप यह संकेत देता है कि आपराधिक न्याय प्रणाली में निष्पक्ष सुनवाई और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अदालतें गंभीर हैं।

श्री राहुल सिंह, याचिकाकर्ता के वकील।

सुश्री अदिति गिरधर, एएजी, हरियाणा।

शीर्षक: विजय बनाम हरियाणा राज्य

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