जोधपुर की अदालत में बुधवार को माहौल कुछ अलग था। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि सरकारी विभाग अदालत के आदेशों को हल्के में नहीं ले सकता। मामला एम.आर. कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी बनाम राज्य सरकार से जुड़ा है, जहां निरीक्षण रिपोर्ट और एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) को लेकर लापरवाही सामने आई।
18 फरवरी 2026 को सुनवाई के दौरान न्यायालय ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दे दिया।
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मामले की पृष्ठभूमि
यह याचिका एम.आर. कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी द्वारा दायर की गई है। कॉलेज का कहना था कि बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद राज्य सरकार ने निरीक्षण रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं की।
रिकॉर्ड के अनुसार, पहली बार 26 नवंबर 2024 को अतिरिक्त महाधिवक्ता को निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया गया था । इसके बाद लगभग एक साल बीत जाने पर 20 नवंबर 2025 को फिर से वही निर्देश दोहराए गए ।
2 दिसंबर 2025 को मामला सूचीबद्ध हुआ, फिर 6 दिसंबर 2025 को भी सुनवाई हुई, लेकिन तब भी आदेशों का पालन नहीं हुआ । अदालत ने “न्याय के हित में” अंतिम अवसर देते हुए अनुपालन करने को कहा था।
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अदालत की सख्त टिप्पणी
बुधवार को जब मामला फिर से लगा, तो स्थिति वही रही। निरीक्षण रिपोर्ट अब तक रिकॉर्ड पर नहीं आई थी।
राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने बताया कि विभाग को आदेशों की जानकारी भेजी जा चुकी है, लेकिन अनुपालन के लिए और समय चाहिए ।
इस पर न्यायालय ने कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि विभाग का रवैया “जानबूझकर और सोची-समझी अवहेलना” (willful and deliberate non-compliance) जैसा प्रतीत होता है ।
पीठ ने यह भी कहा कि यह कोई अकेला मामला नहीं है। अन्य मामलों में भी जहां संस्थानों की निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए, वहां भी विभाग समय पर पालन नहीं कर पाया ।
अदालत ने टिप्पणी की कि इससे “पारदर्शिता की कमी और जवाबदेही में ढिलाई” झलकती है ।
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न्यायालय का आदेश
स्थिति को गंभीर मानते हुए अदालत ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को 25 फरवरी 2026 को दोपहर 2 बजे व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहने का निर्देश दिया ।
साथ ही उन्हें व्यक्तिगत हलफनामा (शपथपत्र) दाखिल करने को कहा गया है, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि आदेशों के पालन में देरी क्यों हुई ।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि हलफनामे में यह बताया जाए कि कॉलेज को समय पर एनओसी क्यों नहीं दी गई ।
पीठ ने स्पष्ट संकेत दिया कि अब और ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
Case Title: M.R. College of Physiotherapy vs State of Rajasthan
Case No.: S.B. Civil Writ Petition No. 17817/2024
Case Type: Civil Writ Petition
Decision Date: 18 February 2026










