जोधपुर में आज राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने चार नए नर्सिंग कॉलेजों की याचिकाएं खारिज कर दीं। इन संस्थानों ने मांग की थी कि उन्हें शैक्षणिक सत्र 2025-26 की बी.एससी. नर्सिंग काउंसलिंग में शामिल किया जाए या अलग से एक और राउंड कराया जाए।
मामले की सुनवाई डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की पीठ ने की। कोर्ट ने साफ कहा कि “अकादमिक कैलेंडर से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती।”
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मामले की पृष्ठभूमि
मुहम्मदों में प्रमुख रूप से आर्यमन नर्सिंग कॉलेज, माँ जीजाबाई कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग, एमएलडी कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग एजुकेशन और आयुष्मान इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस एंड कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग शामिल थे।
इन संस्थानों को राज्य सरकार से 5 दिसंबर 2025 को NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) मिला और 23 दिसंबर 2025 को मान्यता भी प्रदान कर दी गई।
लेकिन समस्या यह थी कि बी.एससी. नर्सिंग कोर्स के लिए केंद्रीय काउंसलिंग पहले ही पूरी हो चुकी थी। Rajasthan University of Health Sciences (RUHS) ने जुलाई 2025 से काउंसलिंग शुरू की थी और चारों राउंड 4 नवंबर 2025 तक समाप्त हो गए थे।
कॉलेजों का कहना था कि उन्होंने सभी नियमों का पालन किया है, भारी निवेश किया है, और अब छात्रों के बिना उनका ढांचा खाली पड़ा है।
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याचिकाकर्ताओं की दलील
कॉलेजों की ओर से कहा गया कि जब उन्हें वैध NOC और मान्यता मिल चुकी है तो उन्हें छात्रों का आवंटन (allotment) मिलना चाहिए।
उनका तर्क था कि “काउंसलिंग का एक अतिरिक्त राउंड कराया जा सकता है, जैसा पहले वर्षों में हुआ है।”
वकीलों ने यह भी दलील दी कि संस्थानों को छात्रों से वंचित करना अनुचित है और यह उनकी “वैध अपेक्षा” (legitimate expectation) के खिलाफ है।
सरकार और विश्वविद्यालय का पक्ष
राज्य और RUHS की ओर से अदालत को बताया गया कि:
- चारों राउंड की काउंसलिंग पूरी हो चुकी है
- 90% से अधिक सीटें भर चुकी हैं
- कक्षाएं 18 अगस्त 2025 से चल रही हैं
- लगभग 70% सिलेबस पूरा हो चुका है
साथ ही, Indian Nursing Council ने 30 नवंबर 2025 को अंतिम तिथि तय की थी। इसके बाद दाखिले को “अनियमित बैच” माना जाएगा।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया, जिनमें कहा गया है कि प्रोफेशनल कोर्स में तय समय सीमा से छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए।
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अदालत की टिप्पणी
पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “संस्थान स्थापित करने का अधिकार और छात्रों का आवंटन पाने का अधिकार अलग-अलग बातें हैं।”
कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ताओं को NOC और मान्यता काउंसलिंग खत्म होने के बाद मिली। ऐसे में उनकी शिकायत “बहिष्कार” की नहीं, बल्कि “समय-क्रम” (chronology) की है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए पीठ ने कहा,
“मिड-स्ट्रीम एडमिशन से अकादमिक अनुशासन बिगड़ता है और छात्रों की पढ़ाई पर असर पड़ता है।”
कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि एक बार काउंसलिंग प्रक्रिया समाप्त हो जाए तो उसे दोबारा खोलना कानून के दायरे से बाहर है।
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अंतिम निर्णय
हाईकोर्ट ने सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।
कोर्ट ने कहा कि न तो अतिरिक्त काउंसलिंग कराई जा सकती है और न ही अंतिम तिथि बढ़ाई जा सकती है।
हालांकि, भविष्य के लिए पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि अगले शैक्षणिक सत्र में NOC के आवेदन पहली काउंसलिंग से कम से कम 45 दिन पहले निपटाए जाएं, ताकि संस्थानों को समय पर शामिल किया जा सके।
लेकिन 2025-26 सत्र के लिए किसी भी प्रकार की राहत देने से अदालत ने साफ इनकार कर दिया।
Case Title: Aryaman Nursing College & Ors. v. State of Rajasthan & Ors.
Case No.: D.B. Civil Writ Petition No. 610/2026 & Connected Matters
Decision Date: 11 February 2026








