मेन्यू
समाचार खोजें...
होमSaved

सुप्रीम कोर्ट ने समाधान योजना में देरी पर SRA की अपील खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT के फैसले को बरकरार रखते हुए Taguda PTE Ltd. की अपील खारिज की, क्योंकि तीन साल बाद भी समाधान योजना लागू नहीं हो पाई।

Vivek G.
सुप्रीम कोर्ट ने समाधान योजना में देरी पर SRA की अपील खारिज की

23 जुलाई 2025 को भारत के सुप्रीम कोर्ट ने Taguda PTE Limited द्वारा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया एवं अन्य के खिलाफ दायर सिविल अपील को खारिज कर दिया। यह अपील इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के अंतर्गत एक कॉर्पोरेट समाधान योजना को लागू न करने से संबंधित थी।

मामले की पृष्ठभूमि

अपीलकर्ता Taguda PTE Limited को कॉरपोरेट दिवालियापन प्रक्रिया के दौरान Successful Resolution Applicant (SRA) के रूप में अनुमोदित किया गया था। यह समाधान योजना 3 फरवरी 2022 को मंज़ूर की गई थी। लेकिन तीन साल बीतने के बाद भी, यह योजना लागू नहीं हो पाई, क्योंकि अपीलकर्ता आवश्यक मंज़ूरियां लेने में असफल रहा

Read also:-सुप्रीम कोर्ट ने पोक्सो मामले में 78 वर्षीय बुजुर्ग को एक साथ सजा सुनाई

“यह निर्विवाद तथ्य है कि समाधान योजना 03.02.2022 को मंज़ूर की गई थी। तीन साल बीतने के बाद भी यह योजना लागू नहीं हो पाई...” — सुप्रीम कोर्ट पीठ

इस मामले की सुनवाई करते हुए, न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT), दिल्ली के निर्णय में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

“हम NCLAT, दिल्ली द्वारा दिए गए फैसले से भिन्न राय नहीं रख सकते। हमें हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं दिखता।” — सुप्रीम कोर्ट की पीठ

इसी के साथ सिविल अपील संख्या 7648/2025 को खारिज कर दिया गया और लंबित आवेदनों को भी निपटा दिया गया

Read also:-तलाशी, जब्ती और सबूत में खामियों के कारण पटना उच्च न्यायालय ने एनडीपीएस मामले में आरोपी को बरी किया

अपीलकर्ता (Taguda PTE Ltd.) की ओर से:वरिष्ठ अधिवक्ता चंदर उदय सिंह ने अधिवक्ताओं की टीम का नेतृत्व किया, जिनमें श्री कैलाश पांडे, श्री रंजीत सिंह, श्री कृष्ण यादव, और अन्य शामिल थे।

प्रतिवादी (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया) की ओर से:वरिष्ठ अधिवक्ता नवीन पाहवा ने श्री वैजयंत पालीवाल और सुश्री कीर्ति गुप्ता के साथ उपस्थिति दर्ज की।

सर्वोच्च न्यायालय ने दोहराया कि दिवालियापन मामलों में समाधान योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करना अत्यंत आवश्यक है। यदि समाधान आवेदक आवश्यक मंज़ूरियां लंबे समय तक प्राप्त नहीं कर पाता, तो यह IBC के उद्देश्यों को कमजोर करता है और किसी भी प्रकार की देरी को न्यायोचित नहीं ठहरा सकता।

Read also:-ओडिशा हाईकोर्ट ने बलात्कार मामले में जमानत याचिका खारिज की: पीड़िता का बयान अब तक नहीं हुआ

मामले का शीर्षक: Taguda PTE Limited बनाम स्टेट बैंक ऑफ इंडिया एवं अन्यनिर्णय की तिथि: 23 जुलाई 2025अपील संख्या: सिविल अपील संख्या 7648/202

ऑर्डर डाउनलोड करें

Mobile App

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Install App
CourtBook Mobile App

More Stories