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सुप्रीम कोर्ट ने 50 लाख ज़ब्त नकदी पर गुजरात हाई कोर्ट का आदेश पलटा, केस प्रॉपर्टी ट्रायल कोर्ट को लौटाई

सुप्रीम कोर्ट ने ₹50 लाख ज़ब्त नकदी छोड़ने का गुजरात हाई कोर्ट का आदेश रद्द कर राशि ट्रायल कोर्ट को लौटाने का निर्देश दिया।

Vivek G.
सुप्रीम कोर्ट ने 50 लाख ज़ब्त नकदी पर गुजरात हाई कोर्ट का आदेश पलटा, केस प्रॉपर्टी ट्रायल कोर्ट को लौटाई

नई दिल्ली, 18 सितंबर: आपराधिक मुकदमों के दौरान ज़ब्त नकदी को लेकर एक अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को गुजरात हाई कोर्ट का वह आदेश रद्द कर दिया जिसमें एक निजी दावेदार को ₹50 लाख जारी करने का निर्देश दिया गया था। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने ट्रायल और सेशन कोर्ट के पहले के निर्णयों को बहाल करते हुए कहा कि इस रकम के असली मालिक का निर्धारण केवल मुकदमे के दौरान ही किया जा सकता है।

पृष्ठभूमि

मामला अप्रैल 2022 में शुरू हुआ जब महेसाणा के व्यापारी चिरागकुमार मोदी ने कारोबारी राजपूत विजयसिंह नटवरसिंह पर कास्टर सीड सौदों में 3.49 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का आरोप लगाया। आरोप है कि जारी किए गए चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद पुलिस ने जांच के दौरान ₹50 लाख को मुद्दामाल-यानी जांच में बरामद संपत्ति—के रूप में ज़ब्त कर लिया।

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एक गवाह ने दावा किया कि यह नकदी उसकी अपनी तंबाकू व्यापार से जुड़ी लेनदेन की है और उसकी रिहाई मांगी। मजिस्ट्रेट और सेशन कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि कई संभावित पीड़ित हैं और साक्ष्य इकट्ठा करने की प्रक्रिया जारी है।

अदालत की टिप्पणियां

दिसंबर 2024 में हाई कोर्ट ने अलग रुख अपनाते हुए 2002 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले (सुंदरभाई देसाई) का हवाला दिया था, जिसमें स्पष्ट स्वामित्व होने पर ज़ब्त संपत्ति को अंतरिम रूप से छोड़ने की अनुमति दी गई है।

लेकिन आज सर्वोच्च न्यायालय ने अहम अंतर पर जोर दिया। पीठ ने कहा, “जिस धनराशि को लेकर जांच चल रही है, वही विवाद का केंद्र है।” सिर्फ यह तथ्य कि ज़ब्त रकम गवाह के दावे से मेल खाती है, “यह साबित नहीं करता कि वही एकमात्र हकदार है।”

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जजों ने स्पष्ट किया कि सभी कथित पीड़ितों को सुने बिना किसी को भी असली मालिक नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि सुंदरभाई देसाई का निर्णय तभी लागू होता है जब स्वामित्व निर्विवाद या पूरी तरह सिद्ध हो।

फैसला

अपील को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का निर्देश रद्द किया और ट्रायल व सेशन कोर्ट के आदेशों को बहाल कर दिया। हाई कोर्ट के आदेश पर जो ₹50 लाख पहले ही निकाले जा चुके थे, उन्हें अब ब्याज सहित ट्रायल कोर्ट में दोबारा जमा करना होगा। निजी प्रतिवादी को यह भी निर्देश दिया गया कि यदि मूल करेंसी नोट अभी भी उपलब्ध हों तो उन्हें लौटाएं।

इस फैसले के साथ, ज़ब्त नकदी अब महेसाणा ट्रायल के पूरे होने और सभी दावों की पूरी तरह जांच होने तक न्यायिक अभिरक्षा में रहेगी।

केस का शीर्षक: राजपूत विजयसिंह नटवरसिंह बनाम गुजरात राज्य एवं अन्य - जब्त ₹50 लाख की रिहाई पर सर्वोच्च न्यायालय

निर्णय की तिथि: 18 सितंबर 2025

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