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थिरुपरंकुंड्रम पहाड़ी विवाद: मद्रास हाईकोर्ट ने कंधूरी पर लगाई रोक, उरूस आयोजन को दी सीमित अनुमति

एम. मनिकामूर्ति बनाम जिला कलेक्टर और अन्य - मद्रास उच्च न्यायालय के मदुरै पी.पी. ने थिरुपरंकुंड्रम पर्वत पर कंधूरी समारोह में रोक लगाई, उरूस को विशेष अनुमति दी।

Shivam Y.
थिरुपरंकुंड्रम पहाड़ी विवाद: मद्रास हाईकोर्ट ने कंधूरी पर लगाई रोक, उरूस आयोजन को दी सीमित अनुमति

धार्मिक परंपराओं और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन पर एक अहम सुनवाई में, मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै बेंच ने थिरुपरंकुंड्रम पहाड़ी पर होने वाले आयोजनों को लेकर अंतरिम दिशा-निर्देश जारी किए। अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्धारित शर्तों के तहत केवल उरूस (Santhanakoodu Urus) ही आयोजित किया जा सकेगा, जबकि कंधूरी (Kandhoori) की अनुमति नहीं दी जाएगी।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता एम. मणिकामूर्ति ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर कर प्रशासन से मांग की थी कि थिरुपरंकुंड्रम पहाड़ी पर कंधूरी आयोजन पर रोक लगाई जाए। याचिका में दलील दी गई कि पूर्व के न्यायिक आदेशों और प्रशासनिक शर्तों के मद्देनज़र ऐसे आयोजन कानून-व्यवस्था और शांति के लिए संवेदनशील हो सकते हैं।

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प्रशासन की ओर से बताया गया कि यह मुद्दा पहले भी विभिन्न मंचों पर विचाराधीन रहा है और पूर्व वर्षों में लागू शर्तों का पालन किया गया है।

राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अदालत को अवगत कराया कि इस वर्ष केवल Santhanakoodu Urus के आयोजन की अनुमति प्रस्तावित है, जिसकी तिथि 6 जनवरी 2026 निर्धारित है। उन्होंने कहा कि पूर्व के आदेशों के अनुरूप कंधूरी महोत्सव की अनुमति नहीं दी जाएगी।

पुलिस प्रशासन ने यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त निगरानी रखी जाएगी। वहीं, पांचवें प्रतिवादी की ओर से यह तर्क रखा गया कि मामला पहले ही निपटाया जा चुका है और res judicata का सिद्धांत लागू होता है।

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अदालत की टिप्पणियाँ

न्यायमूर्ति एस. श्रीमथी ने पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि धार्मिक आयोजन कानून के दायरे में रहकर ही किए जा सकते हैं।
अदालत ने कहा,

“पूर्व में पारित आदेशों और फुल बेंच के निर्णयों का सख्ती से पालन किया जाना आवश्यक है।”

अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि सार्वजनिक शांति और सौहार्द सर्वोपरि है।

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अंतरिम आदेश

अदालत ने निम्नलिखित अंतरिम निर्देश जारी किए:

  • केवल उरूस का आयोजन किया जाएगा; कंधूरी की अनुमति नहीं होगी।
  • आयोजन में भाग लेने वालों की संख्या अधिकतम 50 तक सीमित रहेगी।
  • पशु बलि, मांस का परिवहन, गैर-शाकाहारी भोजन पकाने या ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
  • ये शर्तें पहाड़ी के बेसमेंट से लेकर शिखर तक लागू होंगी।
  • पुलिस को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश दिए गए।

मामले में प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए 20 जनवरी 2026 की तिथि तय की गई। अदालत ने स्पष्ट किया कि तब तक ये अंतरिम आदेश प्रभावी रहेंगे।

Case Title:- M. Manickamoorthy v. The District Collector and Others

Case No:- W. P. Crl.(MD) NO. 2754 of 2025

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