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बॉम्बे हाईकोर्ट ने सबूतों के अभाव में पति और ससुराल वालों को धारा 498-ए के आरोपों से मुक्त किया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने औरंगाबाद में पति और ससुराल वालों के खिलाफ 498-ए का मामला सबूतों की कमी, अतिशयोक्ति और चिकित्सीय स्थिति की पूर्व जानकारी के आधार पर खारिज किया।

Shivam Y.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सबूतों के अभाव में पति और ससुराल वालों को धारा 498-ए के आरोपों से मुक्त किया

बॉम्बे हाईकोर्ट, औरंगाबाद खंडपीठ ने तुषार संपत माने और उनके परिवार के खिलाफ दायर आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। यह मामला आईपीसी की

न्यायमूर्ति श्रीमती विभा कंकनवाड़ी और न्यायमूर्ति संजय ए. देशमुख ने कहा कि दंपति का विवाह 24 मार्च 2022 को हुआ था और वे लगभग एक वर्ष तीन माह तक साथ रहे। शिकायतकर्ता का कहना था कि बाद में उसे पति के मानसिक स्वास्थ्य उपचार की जानकारी मिली, जो विवाह से पहले छुपाई गई थी। हालांकि, अदालत ने पाया कि आरोपपत्र में शामिल विवाह पूर्व चैट से स्पष्ट था कि वह उनके चिकित्सा उपचार के बारे में जानती थी।

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अदालत ने यह भी माना कि सास और ननदों के खिलाफ लगाए गए आरोप सामान्य (ओम्निबस) थे और स्वतंत्र गवाह का समर्थन नहीं था।

"ताने मारना या छोटे घरेलू विवाद को धारा 498-A आईपीसी के तहत गंभीर क्रूरता नहीं माना जा सकता," पीठ ने कहा।

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न्यायालय ने कहा कि एफआईआर में बढ़ा-चढ़ाकर बातें कही गई हैं और पड़ोसियों या निष्पक्ष गवाहों से कोई सबूत नहीं मिला। चूंकि आरोप और मांगें ‘क्रूरता’ की कानूनी परिभाषा के अंतर्गत नहीं आतीं, इसलिए मुकदमा जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

इसी के साथ, अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत दायर आवेदन स्वीकार करते हुए नियमित आपराधिक मामला क्रमांक 290/2024 की कार्यवाही सभी आवेदकों के खिलाफ रद्द कर दी।

केस का शीर्षक:- तुषार संपत माने एवं अन्य बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य

केस संख्या:- आपराधिक आवेदन संख्या 1380/2024

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