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चंडीगढ़ हाई कोर्ट फायरिंग विवाद: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने ASI दिलबाग सिंह को जमानत दे दी

ASI दिलबाग सिंह बनाम केंद्र शासित प्रदेश राज्य, चंडीगढ़ - पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने गंभीर आरोपों के बावजूद, माफी के बाद चंडीगढ़ उच्च न्यायालय फायरिंग मामले में एएसआई दिलबाग सिंह को अग्रिम जमानत दे दी।

Shivam Y.
चंडीगढ़ हाई कोर्ट फायरिंग विवाद: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने ASI दिलबाग सिंह को जमानत दे दी

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट, चंडीगढ़ ने असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) दिलबाग सिंह को अग्रिम जमानत प्रदान की है। उन पर इस महीने की शुरुआत में हाईकोर्ट परिसर के अंदर एक वरिष्ठ कोर्ट अधिकारी को धमकाने का आरोप लगा था। यह आदेश न्यायमूर्ति एन.एस. शेखावत ने 22 अगस्त 2025 को सुनाया।

घटना की पृष्ठभूमि

यह मामला चीफ कोर्ट ऑफिसर दलविंदर सिंह की शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि 6 अगस्त 2025 को पूछताछ के दौरान पीएसओ (पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर) के तौर पर तैनात एएसआई दिलबाग सिंह आपा खो बैठे। शिकायत के अनुसार, दिलबाग सिंह ने अपनी सर्विस पिस्तौल निकाली, उसे शिकायतकर्ता की ओर तान दिया और गोली चलाने की कोशिश की। सौभाग्य से कोई फायर नहीं हुआ और मौके पर मौजूद अन्य कर्मचारियों ने उन्हें काबू कर लिया। कोर्ट परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में यह घटना रिकॉर्ड होने की भी बात कही गई।

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कोर्ट में पक्षों की दलीलें

बचाव पक्ष का तर्क था कि आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है और वास्तव में कोई फायरिंग नहीं हुई। याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि पुलिस ने एएसआई की सर्विस पिस्तौल और सभी दस जिंदा कारतूस सुरक्षित बरामद कर लिए हैं। ऐसे में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109(1) का आरोप संदेहास्पद है। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि यह सिर्फ गरमागरम बहस थी और इस दौरान वह खुद भी चोटिल हुए थे।

वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट परिसर में हथियार लहराना बेहद गंभीर मामला है।

राज्य के वकील ने दलील दी:

"अगर शाखा अधिकारियों ने समय पर हस्तक्षेप न किया होता तो शिकायतकर्ता को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते।"

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सुनवाई के दौरान एएसआई दिलबाग सिंह ने व्यक्तिगत रूप से शिकायतकर्ता से माफी मांगी और स्वीकार किया कि यह टकराव "गुस्से के क्षण" में हुआ। उन्होंने एक शपथपत्र भी दाखिल किया जिसमें आश्वासन दिया कि भविष्य में वे शिकायतकर्ता या उनके परिवार को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।

न्यायमूर्ति शेखावत ने माना कि आरोप गंभीर हैं और एक अनुशासित बल का सदस्य होने के नाते याचिकाकर्ता से जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा थी। उन्होंने टिप्पणी की - "सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात रहते हुए उन्हें अधिक अनुशासन और सावधानी से काम करना चाहिए था।" हालांकि, अदालत ने बिना शर्त माफी और दिए गए आश्वासन को देखते हुए नरमी बरतते हुए अग्रिम जमानत दे दी।

हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली और बीएनएस की धारा 482(2) के तहत शर्तों सहित अग्रिम जमानत प्रदान की। जांच अधिकारी को यह अधिकार दिया गया है कि यदि आवश्यकता हो तो लिखित नोटिस जारी कर याचिकाकर्ता को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।

केस का शीर्षक: ASI दिलबाग सिंह बनाम केंद्र शासित प्रदेश राज्य, चंडीगढ़

केस नंबर: CRM-M-46352-2025 (O&M)

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