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NDPS केस में 75.4 किलो गांजा बरामदगी के बावजूद गौहाटी हाईकोर्ट ने दी जमानत, गिरफ्तारी को बताया अवैध

श्री बप्पी सरकार और 2 अन्य बनाम असम राज्य, गौहाटी हाईकोर्ट ने 75.4 किलो गांजा बरामदगी मामले में गिरफ्तारी को अवैध मानते हुए तीन आरोपियों को जमानत दी।

Vivek G.
NDPS केस में 75.4 किलो गांजा बरामदगी के बावजूद गौहाटी हाईकोर्ट ने दी जमानत, गिरफ्तारी को बताया अवैध

गौहाटी हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश में 75.4 किलो संदिग्ध गांजा बरामदगी के मामले में तीन आरोपियों को जमानत दे दी। अदालत ने साफ कहा कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में कानून के जरूरी प्रावधानों का पालन नहीं हुआ, इसलिए गिरफ्तारी अवैध मानी जाएगी।

यह आदेश न्यायमूर्ति संजीव कुमार शर्मा की एकल पीठ ने 6 फरवरी 2026 को सुनाया।

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मामले की पृष्ठभूमि

मामला बोंगाईगांव जीआरपीएस केस संख्या 86/2025 से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, 19 जुलाई 2025 की शाम करीब 7:30 बजे तीनों आरोपी-बप्पी सरकार, नबा दास और संजय सिंह-ट्रॉली बैग के साथ संदिग्ध हालत में घूमते पाए गए।

पुलिस का दावा है कि पुलिस को देखते ही वे भागने की कोशिश करने लगे, जिसके बाद उन्हें रोका गया। तलाशी लेने पर उनके बैग से कुल 75.4 किलोग्राम संदिग्ध गांजा बरामद हुआ।

तीनों को 20 जुलाई 2025 को गिरफ्तार कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बोंगाईगांव के समक्ष पेश किया गया और तब से वे न्यायिक हिरासत में थे।

आरोपियों ने भारतीय न्याय संहिता प्रक्रिया (BNSS), 2023 की धारा 483 के तहत जमानत याचिका दायर की। उन पर NDPS Act की धारा 20(b)(ii)(C)/29 के तहत मामला दर्ज है।

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बचाव पक्ष की दलील

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने गिरफ्तारी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि BNSS की धारा 47 और 48 के तहत दिए जाने वाले नोटिस कानून के अनुरूप नहीं थे।

वकील ने अदालत को बताया, “नोटिस अंग्रेजी भाषा में तैयार किए गए, जबकि याचिकाकर्ता अंग्रेजी समझते ही नहीं हैं। दो ने अंग्रेजी में हस्ताक्षर किए, लेकिन वे भाषा नहीं जानते। तीसरे का अंगूठा निशान लिया गया, जो उसकी अशिक्षा दर्शाता है।”

सिर्फ यही नहीं, धारा 48 के तहत परिजनों को भेजे गए नोटिस भी अंग्रेजी में थे और व्हाट्सएप के जरिए भेजे गए। बचाव पक्ष का कहना था कि न तो परिवारजन अंग्रेजी समझते हैं और न ही नोटिस की विधिवत सेवा का कोई सबूत रिकॉर्ड पर है।

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अदालत की टिप्पणी

अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि नोटिस वास्तव में अंग्रेजी में तैयार किए गए थे और व्हाट्सएप के माध्यम से भेजे गए।

न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “रिकॉर्ड में नोटिस की वास्तविक सेवा का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है। ऐसी स्थिति में यह नहीं माना जा सकता कि धारा 48 BNSS का विधिवत पालन हुआ।”

पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले Vihaan Kumar Vs. State of Haryana & Another (2025 SCC OnLine SC 269) का हवाला देते हुए कहा कि गिरफ्तारी से जुड़े प्रावधानों का सख्ती से पालन अनिवार्य है।

अदालत ने माना कि जब नोटिस की वैध सेवा सिद्ध नहीं है, तो गिरफ्तारी प्रक्रिया कानून के अनुरूप नहीं कही जा सकती।

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निर्णय

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि उपरोक्त परिस्थितियों में आरोपियों की गिरफ्तारी अवैध मानी जाएगी और वे जमानत के हकदार हैं।

पीठ ने निर्देश दिया कि तीनों आरोपियों को एक-एक लाख रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के दो-दो जमानतदारों पर रिहा किया जाए, बशर्ते कि ट्रायल कोर्ट संतुष्ट हो।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि रिहाई के बाद जांच अधिकारी को रिमांड या हिरासत की आवश्यकता महसूस होती है, तो वह उचित कारणों के साथ आवेदन कर सकता है। ऐसे आवेदन पर मजिस्ट्रेट प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए शीघ्र, और संभव हो तो एक सप्ताह के भीतर निर्णय लेगा।

इसी के साथ जमानत याचिका का निस्तारण कर दिया गया।

Case Title: Sri Bappi Sarkar & 2 Ors. vs The State of Assam

Case No.: Bail Appln./4109/2025

Decision Date: 06 February 2026

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