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हत्या मामले में बड़ा मोड़: सुप्रीम कोर्ट ने ‘मजबूत सबूत’ कसौटी पर Imran उर्फ Guddu को दी ज़मानत, राज्य की आपत्ति खारिज

एमडी इमरान @ डी.सी. गुड्डू बनाम झारखंड राज्य, सुप्रीम कोर्ट ने हत्या मामले में धारा 319 CrPC के तहत जोड़े गए आरोपी Imran को ज़मानत दी, राज्य की अपील खारिज।

Vivek G.
हत्या मामले में बड़ा मोड़: सुप्रीम कोर्ट ने ‘मजबूत सबूत’ कसौटी पर Imran उर्फ Guddu को दी ज़मानत, राज्य की आपत्ति खारिज

नई दिल्ली की सुप्रीम कोर्ट की अदालत में मंगलवार को एक पुराने हत्या मामले की सुनवाई के दौरान माहौल बेहद गंभीर रहा। सवाल यह था-क्या धारा 319 CrPC के तहत बाद में जोड़े गए आरोपी को सिर्फ संदेह के आधार पर जेल में रखा जा सकता है? इसी बहस के केंद्र में थे MD Imran @ D.C. Guddu। आखिरकार, Supreme Court of India ने ज़मानत से जुड़े कानून की कसौटी को दोहराते हुए अहम फैसला सुनाया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला झारखंड के डेली मार्केट थाना से जुड़ा है, जहां वर्ष 2018 में एक व्यक्ति की हत्या हुई थी। मृतक के पिता द्वारा दर्ज FIR में कुल 9 आरोपियों के नाम थे।
जांच के बाद पुलिस ने केवल 3 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, जबकि शेष 6 आरोपियों पर क्लोजर रिपोर्ट दे दी गई।

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ट्रायल के दौरान, मृतक के परिजनों-जो कथित तौर पर घटना के प्रत्यक्षदर्शी थे-ने अदालत में बयान दिए और सभी 9 लोगों की भूमिका बताई। इन बयानों के आधार पर वर्ष 2022 में शिकायतकर्ता ने धारा 319 CrPC के तहत आवेदन देकर छूटे हुए आरोपियों को दोबारा आरोपी बनाने की मांग की।

धारा 319 CrPC और गिरफ्तारी

ट्रायल कोर्ट ने इस आवेदन को आंशिक रूप से स्वीकार किया और 6 में से 3 आरोपियों को तलब करने का आदेश दिया। इन्हीं में से एक थे MD Imran @ D.C. Guddu
इस आदेश को कभी चुनौती नहीं दी गई और यह अंतिम हो गया। बाद में Imran को गैर-जमानती वारंट के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

दूसरी ओर, शेष दो सह-आरोपी-Md. Samsher और Md. Arshad-ने हाईकोर्ट से अग्रिम ज़मानत ले ली, जिसे हाईकोर्ट ने मंज़ूर कर दिया।

एक ओर Imran ने अपनी ज़मानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, वहीं दूसरी ओर झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट द्वारा दी गई अग्रिम ज़मानत को चुनौती दी।
दोनों मामलों की सुनवाई एक साथ हुई।

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कोर्ट की अहम टिप्पणियां

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने ज़मानत के सिद्धांतों को स्पष्ट शब्दों में रखा।
पीठ ने कहा:

“धारा 319 CrPC के तहत जोड़े गए आरोपी के मामले में, ज़मानत पर विचार करते समय अदालत को केवल संभावना नहीं, बल्कि मजबूत और ठोस सबूत देखने होते हैं।”

कोर्ट ने आगे स्पष्ट किया कि यह कसौटी-

  • चार्ज फ्रेम करने से ऊंची,
  • लेकिन दोषसिद्धि के स्तर से कम होती है।

साथ ही अदालत ने अपराध की प्रकृति, सबूतों की गुणवत्ता, फरार होने की आशंका और साक्ष्य से छेड़छाड़ की संभावना जैसे पहलुओं पर ज़ोर दिया।

कोर्ट के सामने यह तथ्य भी रखा गया कि जिन दो सह-आरोपियों को अग्रिम ज़मानत मिली है, वे नियमित रूप से ट्रायल कोर्ट में पेश हो रहे हैं। इस आधार पर राज्य द्वारा उनकी ज़मानत रद्द करने की मांग को अदालत ने अस्वीकार कर दिया।

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अंतिम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि:

  • MD Imran @ D.C. Guddu को शर्तों के साथ नियमित ज़मानत दी जाती है,
  • राज्य सरकार की ओर से दायर अग्रिम ज़मानत रद्द करने की अपील खारिज की जाती है।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि तीनों आरोपी ट्रायल कोर्ट में नियमित रूप से उपस्थित रहें और मुकदमे के शीघ्र निपटारे में सहयोग करें।

साथ ही यह स्पष्ट किया गया कि ज़मानत पर की गई टिप्पणियां केवल ज़मानत तक सीमित हैं और ट्रायल कोर्ट इन्हीं से प्रभावित हुए बिना कानून के अनुसार आगे की कार्यवाही करेगा।

Case Title: MD Imran @ D.C. Guddu vs State of Jharkhand

Case No.: Criminal Appeal arising out of SLP (Crl) No. 12110/2025

Decision Date: 07 January 2026

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