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नाबालिग लड़की ने माता-पिता के पास लौटने से किया इनकार, राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा– बालिग होने तक चिल्ड्रन होम में रहेगी

रामेश्वर बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य, नाबालिग लड़की ने माता-पिता के पास लौटने से इनकार किया, राजस्थान हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि वह बालिग होने तक उदयपुर के चिल्ड्रन होम में रहेगी।

Vivek G.
नाबालिग लड़की ने माता-पिता के पास लौटने से किया इनकार, राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा– बालिग होने तक चिल्ड्रन होम में रहेगी

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई करते हुए अहम आदेश दिया है। अदालत ने नाबालिग लड़की की इच्छा को महत्व देते हुए निर्देश दिया कि वह बालिग होने तक चिल्ड्रन होम में ही रहेगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि बालिग होने के बाद लड़की अपनी पसंद की जगह रहने के लिए स्वतंत्र होगी।

यह मामला उस याचिका से जुड़ा था जिसमें लड़की के पिता ने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी को एक व्यक्ति ने अवैध रूप से अपने पास रखा हुआ है।

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मामले की पृष्ठभूमि

यह याचिका चित्तौड़गढ़ निवासी रमेश्वर ने दायर की थी। उन्होंने अदालत को बताया कि उनकी नाबालिग बेटी ‘एमएसटी. जी’ को प्रतिवादी नंबर-4 ने अवैध रूप से अपने पास रखा हुआ है।

याचिका में अदालत से बेटी को उनके संरक्षण में वापस दिलाने की मांग की गई थी।

सुनवाई के दौरान अदालत के निर्देश पर लड़की को कोर्ट के सामने पेश किया गया। अदालत ने उससे सीधे बातचीत भी की ताकि उसकी स्थिति और इच्छा स्पष्ट हो सके।

अदालत के सामने लड़की का बयान

जब लड़की को अदालत में पेश किया गया, तो उसने स्पष्ट रूप से कहा कि वह अपने माता-पिता के घर वापस नहीं जाना चाहती।

लड़की ने कोर्ट को बताया कि उसने घर अपनी इच्छा से छोड़ा था और उस पर किसी का दबाव नहीं था। साथ ही उसने यह भी कहा कि प्रतिवादी नंबर-4 ने उसे अवैध रूप से कहीं नहीं रखा था।

कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार, लड़की ने कहा कि वह फिलहाल चिल्ड्रन होम में रहना चाहती है और बालिग होने तक वहीं रहने की इच्छा रखती है।

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कोर्ट का अवलोकन

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी नोट किया कि लड़की की मानसिक स्थिति पहले स्थिर नहीं लग रही थी। इसी कारण उसे पहले चंदरिया स्थित चिल्ड्रन होम भेजा गया था, जहां काउंसलिंग की व्यवस्था की गई।

बाद में काउंसलर्स की रिपोर्ट भी अदालत के सामने पेश की गई।

कोर्ट ने कहा कि लड़की अपने फैसले पर दृढ़ है और उसे यह डर है कि यदि वह घर लौटी तो माता-पिता की ओर से उसे प्रताड़ना का सामना करना पड़ सकता है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा: “लड़की अपने बयान पर अडिग है कि वह माता-पिता के घर नहीं जाना चाहती और चिल्ड्रन होम में रहना चाहती है।”

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अदालत का निर्णय

दोनों पक्षों की दलीलें और काउंसलिंग रिपोर्ट देखने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि नाबालिग लड़की उदयपुर स्थित चिल्ड्रन होम में तब तक रहेगी जब तक वह बालिग नहीं हो जाती।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बालिग होने के बाद लड़की को अपनी पसंद की जगह रहने की पूरी स्वतंत्रता होगी।

साथ ही अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उदयपुर के सचिव को निर्देश दिया कि वे हर दो महीने में चिल्ड्रन होम का दौरा कर लड़की की स्थिति और देखभाल की निगरानी करें।

इसी के साथ अदालत ने हैबियस कॉर्पस याचिका का निपटारा कर दिया।

Case Title: Rameshwar v. State of Rajasthan & Others

Case No.: D.B. Habeas Corpus Petition No. 8/2026

Decision Date: 17 February 2026

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