नई दिल्ली में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक दशक से अधिक पुराने कर विवाद पर विराम लगाते हुए बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) में उत्पादित बिजली को घरेलू टैरिफ क्षेत्र (DTA) में भेजने पर कस्टम ड्यूटी लगाने का कोई वैधानिक आधार नहीं था। इस फैसले से Adani Power Limited को राहत मिली है और गुजरात हाईकोर्ट के 2019 के आदेश को रद्द कर दिया गया।
मामले की पृष्ठभूमि
अडानी पावर गुजरात के मुंद्रा SEZ में 5,200 मेगावाट क्षमता का ताप बिजली संयंत्र चलाती है। यहां उत्पादित बिजली का बड़ा हिस्सा घरेलू उपभोक्ताओं और राज्य विद्युत कंपनियों को आपूर्ति किया जाता है।
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वर्ष 2010 में केंद्र सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर SEZ से DTA में भेजी गई बिजली पर कस्टम ड्यूटी लगाने की व्यवस्था की। शुरुआत में यह ड्यूटी 16 प्रतिशत तक रखी गई और बाद में इसे प्रति यूनिट 10 पैसे और फिर 3 पैसे कर दिया गया।
कंपनी ने इस व्यवस्था को चुनौती दी। वर्ष 2015 में गुजरात उच्च न्यायालय ने कहा था कि SEZ में बनी बिजली को ‘आयात’ नहीं माना जा सकता, इसलिए उस पर कस्टम ड्यूटी नहीं लगाई जा सकती। उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था।
2015 के फैसले के बावजूद, सरकार ने बाद की अवधि (2010 से 2016) के लिए वसूली गई ड्यूटी वापस नहीं की। गुजरात हाईकोर्ट की एक अन्य पीठ ने 2019 में यह कहते हुए राहत देने से इनकार कर दिया कि नई अधिसूचनाओं को अलग से चुनौती नहीं दी गई थी। इसी आदेश को अडानी पावर ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
अदालत की अहम टिप्पणियां
सुप्रीम कोर्ट की पीठ न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया ने सुनवाई के दौरान कहा कि 2015 का फैसला केवल एक अधिसूचना या सीमित अवधि तक सीमित नहीं था, बल्कि उसने मूल सिद्धांत तय किया था।
पीठ ने कहा,
“जब किसी कर को एक बार कानून के खिलाफ घोषित कर दिया गया हो, तो उसे अलग नाम या अलग दर के साथ दोबारा लागू नहीं किया जा सकता।”
अदालत ने यह भी साफ किया कि कस्टम्स एक्ट के तहत ‘छूट देने’ की शक्ति का इस्तेमाल कर सरकार नया कर नहीं बना सकती। ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 265 के खिलाफ है, जो कहता है कि बिना कानून के किसी तरह का कर नहीं लगाया जा सकता।
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कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के 2019 के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि 2010 से 2016 के बीच SEZ से DTA में भेजी गई बिजली पर वसूली गई कस्टम ड्यूटी अवैध थी।
अदालत ने केंद्र सरकार और कस्टम विभाग को निर्देश दिया कि इस अवधि में अडानी पावर से वसूली गई राशि आठ सप्ताह के भीतर वापस की जाए। हालांकि, इस राशि पर ब्याज नहीं मिलेगा।
फैसला सुनाते हुए पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि संसद कोई नया कानून बनाती है, तो उस पर अदालत ने कोई राय नहीं दी है।
Case Title: Adani Power Ltd. & Anr. vs Union of India & Ors.
Case Number: Civil Appeal arising out of SLP (Civil) No. 24729 of 2019










