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दिल्ली हाईकोर्ट ने तिरुपति लड्डू विवाद से जुड़े मानहानि मामले में अंतरिम रोक से किया इनकार

येरराम वेंकट सुब्बा रेड्डी और अन्य बनाम उषोदया एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड और अन्य। तिरुपति लड्डू विवाद पर दिल्ली हाईकोर्ट ने मानहानि मामले में अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया, प्रतिवादियों को जवाब का अवसर दिया।

Vivek G.
दिल्ली हाईकोर्ट ने तिरुपति लड्डू विवाद से जुड़े मानहानि मामले में अंतरिम रोक से किया इनकार

दिल्ली हाईकोर्ट में तिरुपति तिरुमला देवस्थानम से जुड़े एक संवेदनशील विवाद पर मंगलवार को सुनवाई हुई। यह मामला कथित मानहानिकारक खबरों और सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा है, जिनमें तिरुपति मंदिर के लड्डुओं में घी की खरीद को लेकर आरोप लगाए गए थे। अदालत ने फिलहाल इन प्रकाशनों पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह वाद येर्रम वेंकट सुब्बा रेड्डी एवं अन्य द्वारा दायर किया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कुछ मीडिया संस्थानों और अन्य पक्षों ने उनके खिलाफ ऐसी रिपोर्टें और वीडियो प्रकाशित किए, जिनसे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा।

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याचिकाकर्ता नंबर-1 तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) की प्रबंधन समिति के अध्यक्ष रह चुके हैं और यह पद उन्होंने जून 2019 से अगस्त 2023 तक संभाला था। उनके अनुसार, लड्डुओं में इस्तेमाल होने वाले घी की खरीद को लेकर लगाए गए आरोप न सिर्फ अप्रमाणित हैं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था से भी जुड़े हैं।

कोर्ट में क्या दलीलें रखी गईं

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन ने दलील दी कि यह विषय पहले से ही जांच के दायरे में है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सितंबर और अक्टूबर 2024 के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस तरह के आरोपों का सार्वजनिक प्रसार अनुचित है।

उन्होंने कहा, “जब मामला जांचाधीन हो, तो किसी भी पक्ष द्वारा निष्कर्षात्मक आरोप लगाना गलत संदेश देता है।”

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अदालत की टिप्पणियां

मामले की सुनवाई कर रहे Justice Amit Bansal ने कहा कि अंतरिम रोक जैसे आदेश असाधारण परिस्थितियों में ही दिए जाते हैं।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले का हवाला देते हुए टिप्पणी की, “एकतरफा अंतरिम निषेधाज्ञा केवल विशेष हालात में ही दी जा सकती है। इस स्तर पर प्रतिवादियों को अपना पक्ष रखने का अवसर देना अधिक उचित होगा।”

अंतरिम राहत पर फैसला

कोर्ट ने फिलहाल याचिकाकर्ताओं की उस मांग को स्वीकार नहीं किया, जिसमें कथित मानहानिकारक प्रकाशनों और पोस्ट पर तुरंत रोक लगाने की अपील की गई थी। हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि आज के बाद यदि कोई नई सामग्री प्रकाशित की जाती है, तो उसे अदालत की इस टिप्पणी के आलोक में देखा जाएगा और उसके अपने परिणाम हो सकते हैं।

अदालत ने वाद को विधिवत पंजीकृत करने का आदेश दिया और प्रतिवादियों को समन जारी किए। कुछ प्रतिवादियों की ओर से वकीलों ने समन स्वीकार कर लिया है।
साथ ही, याचिकाकर्ताओं को अतिरिक्त दस्तावेज और कथित वीडियो रिकॉर्डिंग पेन ड्राइव में दाखिल करने की अनुमति भी दी गई है।

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अंतिम आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस चरण पर किसी भी प्रकार की अंतरिम रोक लगाने से इनकार करते हुए प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने का समय दिया। मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी 2026 को निर्धारित की गई है।

Case Title: Yerram Venkata Subba Reddy & Anr. vs Ushodaya Enterprises Pvt. Ltd. & Ors.

Case No.: CS(OS) 954/2025

Case Type: Civil Suit (Defamation & Injunction)

Decision Date: 23 December 2025

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