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केरल मंदिर में पेड़ों की बेरहम कटाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: त्योहार की चढ़ावे से भरपाई करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने केरल के एक मंदिर में तीन विशाल वाइल्ड जैक पेड़ों की अवैध कटाई पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने मंदिर समिति को निर्देश दिया कि त्योहार में एकत्र चढ़ावे से वन विभाग को मुआवजा दिया जाए।

Vivek G.
केरल मंदिर में पेड़ों की बेरहम कटाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: त्योहार की चढ़ावे से भरपाई करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने 4 अप्रैल 2025 को केरल के थिरु केरळपुरम श्रीकृष्णस्वामी मंदिर, पेरूर गांव, में तीन वाइल्ड जैक पेड़ों की अवैध कटाई पर कड़ी नाराजगी जताई।

जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस उज्जल भुयान की पीठ मंदिर से जुड़ी संपत्ति विवाद में एक अंतरिम याचिका (Interlocutory Application) पर सुनवाई कर रही थी।

कोट्टायम ज़िले के कलेक्टर की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बताया गया कि यह पेड़ मंदिर की प्रशासनिक समिति के कहने पर काटे गए थे।

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“कोई भी धर्म इस तरह पेड़ों की बेरहम कटाई की अनुमति नहीं देता।”
जस्टिस अभय एस. ओका की कड़ी टिप्पणी

कोर्ट ने मंदिर समिति के वकील से यह पूछा कि प्रत्येक पेड़ के लिए कितना मुआवजा वन विभाग को देंगे और कितने नए पेड़ लगाए जाएंगे?

इस पर वकील ने बताया कि पेड़ों की कटाई पिछली समिति द्वारा कराई गई थी। वर्तमान समिति ने कोर्ट के पहले के status quo आदेश के बाद 100 पेड़ पहले ही लगाए हैं और वे 100 और पेड़ लगाने को तैयार हैं।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि समिति एक हलफनामा (affidavit) दाखिल करे, जिसमें बताया जाए कि अभी तक कितने पेड़ लगाए गए और कितना मुआवजा वे देने को तैयार हैं।

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जब वकील ने कहा कि मंदिर बहुत छोटा और गरीब है और अभी त्योहार चल रहा है, तो कोर्ट ने व्यावहारिक समाधान सुझाया:

“त्योहार में लोग भगवान को कुछ न कुछ चढ़ाते ही हैं, तो वही चढ़ावा वन विभाग को दे दीजिए। बस, इतनी सी बात।”
जस्टिस ओका का सुझाव

कोर्ट ने निर्देश दिया कि मंदिर समिति एक undertaking (प्रतिज्ञा पत्र) दाखिल करे, जिसमें बताया जाए कि आमतौर पर त्योहार में कितना चढ़ावा एकत्र होता है। वही राशि वन विभाग को मुआवजे के रूप में दी जाए।

“कोई तो पेड़ लगाएगा, कोई तो मुआवजा देगा और कोई तो ज़िम्मेदारी लेगा।”
जस्टिस ओका ने जोर देकर कहा

कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 9 अप्रैल 2025 तय की है, तब तक समिति को हलफनामा दाखिल करना होगा।

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मामले की पृष्ठभूमि

  • यह विवाद एक विशेष अनुमति याचिका (Special Leave Petition - SLP) से संबंधित है, जिसमें प्रत्यावादी (respondent) ने खुद को संपत्ति का मालिक बताया और याचिकाकर्ता (appellant) को अवैध कब्जा करने से रोकने की मांग की।
  • हाई कोर्ट ने प्रत्यावादी के पक्ष में फैसला दिया था, जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट में आया।
  • सुनवाई के दौरान प्रत्यावादी ने एक IA (Interlocutory Application) दाखिल की, जिसमें मंदिर परिसर में पेड़ों की कटाई का मुद्दा उठाया गया।

4 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि मंदिर परिसर में कई पेड़ काटे गए हैं और निर्माण कार्य भी चल रहा है। कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए आदेश दिया कि सभी पक्ष यथास्थिति (status quo) बनाए रखें और बिना अनुमति के कोई निर्माण या पेड़ों की कटाई न करें।

कोर्ट ने कोट्टायम के जिलाधिकारी को आदेश दिया कि वे राजस्व अधिकारियों को मंदिर भेजें, जो:

  • पेड़ों की कटाई का निरीक्षण करें
  • देखें कि क्या किसी सक्षम अधिकारी से अनुमति ली गई थी
  • मंदिर के रिकॉर्ड की जांच करें
  • संबंधित लोगों के बयान दर्ज करें

6 दिसंबर 2024 को कलेक्टर की रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि तीन वाइल्ड जैक पेड़, जिनका व्यास लगभग 1.5 से 2 मीटर था, प्रशासनिक समिति के कहने पर काटे गए थे।

कोर्ट ने आदेश दिया कि पेड़ की लकड़ी को लेकर status quo बनाए रखा जाए।

24 मार्च 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने 27 जनवरी 2025 के अंतरिम आदेश को तब तक जारी रखने का आदेश दिया जब तक SLP पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता। साथ ही कोर्ट ने साफ कहा कि अब आगे कोई पेड़ नहीं काटा जाएगा, जब तक कि कोर्ट से स्पष्ट अनुमति न ली जाए।

केस नं. – विशेष अनुमति अपील के लिए याचिका (सी) नं. 4983/2023

केस का शीर्षक – के.के. सुरेश एवं अन्य बनाम जयकुट्टन एवं अन्य।

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