नई दिल्ली में हुई सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे संपत्ति विवाद पर अंतिम मुहर लगाई, जिसमें जमीन, स्कूल प्रबंधन और पारिवारिक अधिकार-तीनों उलझे हुए थे। अदालत ने साफ कहा कि समझौते की पुष्टि करने वाला हलफनामा (Affidavit) ही इस मामले की निर्णायक कड़ी है।
मामले की पृष्ठभूमि
विवाद के केंद्र में केरल के कुंडझियूर इलाके की करीब 3 एकड़ 35 सेंट जमीन थी, जिस पर अलीमुल इस्लाम हायर सेकेंडरी स्कूल संचालित होता है। यह जमीन मूल रूप से स्वर्गीय सीथी थंगल की थी, जिनकी मृत्यु के बाद यह उनके नौ बच्चों में बंटी।
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साल 2007 में, परिवार के सबसे बड़े बेटे ने पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर यह जमीन बेचने का समझौता किया। कुल कीमत 2.70 करोड़ रुपये तय हुई और 25 लाख रुपये अग्रिम दिए गए। समय-सीमा कई बार बढ़ाई गई, लेकिन एक बेटी-सकीना बीवी-ने अपनी 1/11 हिस्सेदारी की बिक्री से इनकार कर दिया।
2013 में खरीदार ने विशेष निष्पादन (Specific Performance) की मांग करते हुए मुकदमा दायर किया।
- ट्रायल कोर्ट ने कहा कि दावा समय-सीमा (Limitation) से बाहर है।
- केरल हाईकोर्ट ने यह मानते हुए अपील खारिज कर दी कि खरीदार ने “तत्परता और इच्छा” (Readiness & Willingness) साबित नहीं की।
सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड का बारीकी से अध्ययन करते हुए सकीना बीवी के 30 अप्रैल 2013 के हलफनामे को निर्णायक माना। इस हलफनामे में उन्होंने न सिर्फ पुराने पावर ऑफ अटॉर्नी के तहत हुए कामों को स्वीकार किया था, बल्कि स्कूल की जमीन और प्रबंधन के हस्तांतरण पर कोई आपत्ति न होने की बात भी कही थी।
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पीठ ने कहा,
“जब प्रतिवादी ने स्वयं हलफनामे के जरिए बिक्री पर सहमति दी, तो उसी तारीख से समय-सीमा की गणना होगी।”
अदालत ने यह भी नोट किया कि सकीना बीवी खुद गवाही देने नहीं आईं, जबकि उनके बेटे ने बयान दिया-जिससे हलफनामे की विश्वसनीयता और मजबूत हुई।
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि:
- Limitation की शुरुआत 2013 के हलफनामे से मानी जाएगी, न कि 2008 से।
- खरीदार ने शेष आठ हिस्सेदारों से जमीन खरीदकर भुगतान भी पूरा किया, इसलिए उसकी तत्परता और इच्छा पर संदेह नहीं किया जा सकता।
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अंतिम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों निचली अदालतों के फैसले रद्द करते हुए कहा कि खरीदार को सकीना बीवी की 1/11 हिस्सेदारी भी बेची जाए। ट्रायल कोर्ट अब शेष भुगतान की गणना करेगा, जिस पर 9% साधारण ब्याज जोड़ा जाएगा। राशि जमा होने के बाद बिक्री विलेख पंजीकृत किया जाएगा।
इसके साथ ही, स्कूल प्रबंधन को लेकर हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश भी रद्द कर दिया गया।
मामले का पटाक्षेप करते हुए अदालत ने कहा-
“अपील स्वीकार की जाती है। कोई लागत नहीं।”
Case Title: Muslimveetil Chalakkal Ahammed Haji vs Sakeena Beevi
Case No.: Civil Appeal Nos. 3894–3895 of 2022
Decision Date: 07 January 2026










