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बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: MSRTC कर्मचारी की कोविड मौत पर पत्नी को ₹45 लाख मुआवजा

श्रीमती सुनीता बापू जगताप बनाम महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम लिमिटेड एवं अन्य। बॉम्बे हाईकोर्ट ने MSRTC कर्मचारी की कोविड मौत पर पत्नी को ₹45 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया, 5 लाख पहले ही दिए गए थे।

Vivek G.
बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: MSRTC कर्मचारी की कोविड मौत पर पत्नी को ₹45 लाख मुआवजा

कोविड महामारी के कठिन दौर में ड्यूटी निभाते हुए जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिवारों को राहत देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल (MSRTC) को आदेश दिया कि वह मृत कर्मचारी की पत्नी को 45 लाख रुपये का मुआवजा दे।

यह मामला स्म्ट. सुनीता बापू जगताप बनाम महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन निगम व अन्य से जुड़ा है। निर्णय 24 फरवरी 2026 को सुनाया गया।

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मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता सुनीता जगताप के पति बापू जगताप MSRTC में कार्यरत थे। मार्च 2021 में उन्हें मुंबई के वडाला स्थित BEST डिपो में अतिरिक्त ट्रैफिक की निगरानी के लिए भेजा गया था।

24 मार्च से 28 मार्च तक उन्होंने ड्यूटी की। इसके बाद तबीयत खराब होने पर वे छुट्टी पर चले गए। 5 अप्रैल 2021 को उन्हें कोविड पॉजिटिव पाया गया और 7 अप्रैल 2021 को येवला के उपजिला अस्पताल में उनका निधन हो गया।

मृत्यु प्रमाणपत्र में कारण “कोविड निमोनिया से उत्पन्न श्वसन विफलता” बताया गया है।

पत्नी ने 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की, जिसका आधार राज्य सरकार का 29 मई 2020 का शासन निर्णय (GR) और MSRTC का 1 जून 2020 का सर्कुलर था।

हालांकि, निगम ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि मृतक न तो ड्राइवर थे और न ही अंतरराज्यीय परिवहन में लगे थे। बाद में उन्हें 5 लाख रुपये की राशि दी गई।

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अदालत में क्या हुआ?

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि सरकारी योजना सभी राज्य उपक्रमों के कर्मचारियों पर लागू होती है। यह योजना 1 जनवरी 2021 से 30 जून 2021 तक बढ़ाई गई थी।

MSRTC की ओर से कहा गया कि 50 लाख रुपये का लाभ केवल ड्राइवर, कंडक्टर, कंट्रोलर और सुरक्षा गार्ड जैसे कर्मचारियों के लिए था, जो सीधे यात्रियों के संपर्क में आते हैं।

न्यायमूर्ति एम.एस. कर्णिक और न्यायमूर्ति एस.एम. मोडक की पीठ ने दोनों पक्षों को विस्तार से सुना।

अदालत की टिप्पणी

पीठ ने साफ कहा कि योजना का उद्देश्य कोविड काल में जोखिम उठाने वाले कर्मचारियों को सुरक्षा देना था।

अदालत ने कहा, “योजना को संकीर्ण अर्थ में नहीं पढ़ा जा सकता। यह एक कल्याणकारी योजना है, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों को सुरक्षा देना है।”

अदालत ने यह भी माना कि ट्रैफिक की निगरानी करने वाला कर्मचारी केवल कार्यालय में बैठकर काम नहीं करता। उसे ड्राइवर और कंडक्टर से संपर्क करना पड़ता है, जिससे संक्रमण का जोखिम उतना ही रहता है।

पीठ ने कहा, “कोविड के समय सार्वजनिक सेवाएं सीमित रूप में जारी थीं। ऐसे कठिन हालात में ड्यूटी निभाना स्वयं जोखिम भरा था।”

अदालत ने यह भी जोड़ा कि निगम ने सर्कुलर की व्याख्या बहुत संकीर्ण तरीके से की।

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अंतिम फैसला

हाईकोर्ट ने MSRTC द्वारा 21 जनवरी 2022, 5 मार्च 2022 और 2 मार्च 2023 को भेजे गए अस्वीकृति पत्र रद्द कर दिए।

अदालत ने निर्देश दिया कि पहले से दिए गए 5 लाख रुपये समायोजित कर शेष 45 लाख रुपये 8 सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को अदा किए जाएं।

यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया तो 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।

याचिका इसी निर्देश के साथ मंजूर कर दी गई।

Case Title: Smt. Sunita Bapu Jagtap v. Maharashtra State Road Transport Corporation Ltd. & Ors.

Case No.: Writ Petition No. 5699 of 2024

Decision Date: 24 February 2026

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