दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित ड्रग तस्करी और संगठित अपराध से जुड़े एक अहम मामले में आरोपी महिला अनुराधा @ चीकू को जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि इस स्तर पर यह मानने के पर्याप्त आधार नहीं हैं कि आरोपी दोषी नहीं है या जमानत पर रहते हुए अपराध दोहराएगी नहीं।
यह आदेश दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव नरूला ने 6 जनवरी 2026 को सुनाया।
मामले की पृष्ठभूमि
मामले की शुरुआत मार्च 2025 में हुई, जब पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि दिल्ली के सुल्तानपुरी और मंगोलपुरी इलाके में एक परिवार द्वारा ड्रग तस्करी का संगठित नेटवर्क चलाया जा रहा है। छापेमारी के दौरान घर से हेरोइन और ट्रामाडोल बरामद किए गए।
Read also:- सप्लायर की चूक का खामियाजा खरीदार क्यों भुगते? ₹1.11 करोड़ ITC मामले में त्रिपुरा हाईकोर्ट की सख़्त टिप्पणी
पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी अमित अपनी मां कुसुम और बहनों-दीपा तथा अनुराधा-के साथ मिलकर यह नेटवर्क चला रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने इलाके में सीसीटीवी कैमरे और लोहे के गेट लगाकर पुलिस की आवाजाही पर नजर रखी थी।
शुरुआत में मामला NDPS एक्ट के तहत दर्ज हुआ था। हालांकि बाद में पुलिस ने आरोप लगाया कि यह केवल एक अलग-थलग घटना नहीं, बल्कि एक संगठित अपराध सिंडिकेट का हिस्सा है। इसी आधार पर महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) की धाराएं लगाई गईं।
जांच एजेंसी ने अनुराधा को इस सिंडिकेट की “फाइनेंशियल हैंडलर” बताया। बैंक खातों में बड़ी नकद जमा, UPI ट्रांजैक्शन, गवाहों के बयान और सह-आरोपियों के इकबालिया बयान कोर्ट के सामने रखे गए।
Read also:- सुप्रीम कोर्ट ने IFGL Refractories को राहत दी, ओडिशा औद्योगिक नीति के तहत सब्सिडी रोकना गलत ठहराया
बचाव पक्ष की दलीलें
अनुराधा की ओर से दलील दी गई कि:
- उसके खिलाफ कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है
- MCOCA लगाने की कानूनी शर्तें पूरी नहीं होतीं
- उसके खाते में आए पैसे ड्रग तस्करी से जुड़े होने का कोई सीधा सबूत नहीं है
- सह-आरोपी के बयान पर पूरा मामला टिका है, जो कानूनन कमजोर हैं
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि जब बरामदगी “कमर्शियल क्वांटिटी” नहीं मानी गई, तो कठोर जमानत शर्तें लागू नहीं होनी चाहिए।
कोर्ट की अहम टिप्पणियां
कोर्ट ने MCOCA की धारा 21(4) का हवाला देते हुए कहा कि इस कानून के तहत जमानत के लिए दो शर्तें बेहद सख्त हैं-
- यह मानने के उचित आधार हों कि आरोपी दोषी नहीं है
- जमानत पर रहते हुए वह अपराध नहीं करेगा
Read also:- सेवानिवृत्ति के बाद विभागीय जांच पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, MSWC का रिकवरी आदेश रद्द
न्यायमूर्ति नारुला ने कहा,
“रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री इस स्तर पर आरोपी के पक्ष में ऐसी संतुष्टि दर्ज करने की अनुमति नहीं देती।”
कोर्ट ने यह भी माना कि गवाहों को प्रभावित करने और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
फैसला
सभी दलीलों और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पर विचार करने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने अनुराधा @ चीकू की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह टिप्पणियां केवल जमानत निर्णय तक सीमित हैं और ट्रायल के merits को प्रभावित नहीं करेंगी।
Case Title:- Anuradha @ Chiku vs State (NCT of Delhi)
Case Number: CRL.A. 1543/2025 with CRL.M.A. 32856/2025










