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सेवानिवृत्ति के बाद विभागीय जांच पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, MSWC का रिकवरी आदेश रद्द

कादिरखान अहमदखान पठान बनाम महाराष्ट्र स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन और अन्य। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिना स्पष्ट नियमों के सेवानिवृत्त कर्मचारी पर विभागीय जांच और रिकवरी आदेश अवैध है।

Vivek G.
सेवानिवृत्ति के बाद विभागीय जांच पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, MSWC का रिकवरी आदेश रद्द

नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की अदालत में मंगलवार को एक अहम सेवा कानून से जुड़ा मामला सुना गया। यह सवाल सीधे तौर पर हजारों सरकारी और सार्वजनिक उपक्रम कर्मचारियों से जुड़ा है-क्या सेवानिवृत्ति के बाद किसी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जा सकती है? अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि नियमों के बिना ऐसा करना कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला कादिरखान अहमदखान पठान बनाम महाराष्ट्र स्टेट वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन"] से जुड़ा है। कादिरखान पठान 31 अगस्त 2008 को स्टोरेज सुपरिंटेंडेंट पद से सेवानिवृत्त हुए थे।

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सेवानिवृत्ति के करीब 11 महीने बाद कॉरपोरेशन ने उन पर भंडारण और रेलवे परिवहन में हुए कथित नुकसान का आरोप लगाते हुए शो-कॉज नोटिस जारी किया। बाद में विभागीय जांच चलाकर करीब 18 लाख रुपये की रिकवरी का आदेश पारित कर दिया गया और ग्रेच्युटी सहित कुछ सेवानिवृत्ति लाभ रोक लिए गए।

इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए पठान ने बॉम्बे हाईकोर्ट की और रुख किया, जहां उन्हें वैकल्पिक अपील उपाय अपनाने की सलाह दी गई। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

अदालत में उठे मुख्य सवाल

सुनवाई के दौरान सबसे अहम प्रश्न यह था कि-
क्या सेवानिवृत्त कर्मचारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का अधिकार कॉरपोरेशन के पास था, जब उसके सेवा नियमों में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान मौजूद नहीं है?

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अपीलकर्ता की ओर से दलील दी गई कि महाराष्ट्र स्टेट वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के 1992 सेवा नियमों में सेवानिवृत्ति के बाद जांच की अनुमति नहीं है और पेंशन नियमों को बिना औपचारिक अपनाए लागू नहीं किया जा सकता।

कोर्ट की टिप्पणियां

न्यायमूर्ति जे.के. महेश्वरी और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने नियमों का गहराई से विश्लेषण किया।

पीठ ने कहा,

“जब तक सेवा नियमों में स्पष्ट प्रावधान न हो या सक्षम प्राधिकारी द्वारा उन्हें विधिवत अपनाया न गया हो, तब तक सेवानिवृत्त कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई नहीं की जा सकती।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि 1992 के नियमों में मौजूद सामान्य प्रावधान अपने-आप पेंशन नियमों को लागू करने का अधिकार नहीं देता। इसके लिए बोर्ड का ठोस निर्णय और राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य है।

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सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए कॉरपोरेशन की पूरी विभागीय कार्रवाई को अवैध ठहराया। अदालत ने निर्देश दिया कि-

  • कादिरखान पठान के खिलाफ शुरू की गई विभागीय जांच निरस्त मानी जाएगी।
  • रोके गए सभी सेवानिवृत्ति लाभ आठ सप्ताह के भीतर जारी किए जाएं।
  • यदि इस दौरान कोई राशि वसूल की गई है, तो उसे भी वापस किया जाए।

अदालत का यह निर्णय सेवानिवृत्त कर्मचारियों के अधिकारों को मजबूत करने वाला माना जा रहा है और यह स्पष्ट संदेश देता है कि नियमों से परे जाकर की गई कार्रवाई न्यायिक जांच में टिक नहीं सकती।

Case Title: Kadir Khan Ahmedkhan Pathan vs Maharashtra State Warehousing Corporation

Case No.: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 10869 of 2021

Case Type: Service Matter

Decision Date: 06 January 2026

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