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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: एकतरफा नियुक्ति से बने पंच अमान्य, भद्रा इंटरनेशनल बनाम AAI में पुरस्कार रद्द

भद्रा इंटरनेशनल (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड और अन्य बनाम एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया, सुप्रीम कोर्ट ने सेक्शन 12(5) के तहत एकतरफा आर्बिट्रेटर की नियुक्ति को अमान्य ठहराया, और भद्रा इंटरनेशनल बनाम AAI मामले में अवार्ड को रद्द कर दिया।

Vivek G.
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: एकतरफा नियुक्ति से बने पंच अमान्य, भद्रा इंटरनेशनल बनाम AAI में पुरस्कार रद्द

नई दिल्ली की अदालत कक्ष में सुनवाई के दौरान माहौल गंभीर था। Supreme Court of India ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी पक्ष को अकेले पंच (Arbitrator) नियुक्त करने का अधिकार दिया गया है, तो यह निष्पक्षता के मूल सिद्धांत के खिलाफ है। भद्रा इंटरनेशनल (इंडिया) प्रा. लि. बनाम एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) मामले में अदालत ने ऐसी एकतरफा नियुक्ति को कानूनन अमान्य ठहराया।

मामले की पृष्ठभूमि

भद्रा इंटरनेशनल और उसकी सहयोगी कंपनियों ने AAI के साथ 2010 में ग्राउंड हैंडलिंग सेवाओं के लिए लाइसेंस समझौता किया था। समझौते में विवाद होने पर मध्यस्थता का प्रावधान था, जिसमें AAI के चेयरमैन को एकमात्र पंच नियुक्त करने का अधिकार दिया गया था।

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2015 में दोनों पक्षों के बीच विवाद उभरा। भद्रा इंटरनेशनल ने मध्यस्थता की मांग की और उसी प्रावधान के तहत AAI ने एकमात्र पंच नियुक्त कर दिया। कार्यवाही चली, समय-सीमा बढ़ी और अंततः 2018 में ‘शून्य पुरस्कार’ (Nil Award) पारित हुआ, जिसमें दोनों पक्षों के दावे खारिज कर दिए गए।

मुख्य सवाल यह था कि क्या 2015 के संशोधन के बाद, जिसमें धारा 12(5) जोड़ी गई, किसी पक्ष द्वारा एकतरफा नियुक्त पंच वैध माना जा सकता है?

भद्रा इंटरनेशनल ने तर्क दिया कि संशोधन के बाद AAI का चेयरमैन स्वयं पंच नियुक्त करने के लिए अयोग्य हो गया था, इसलिए पूरी कार्यवाही शून्य है।

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अदालत की अहम टिप्पणियां

न्यायालय ने सुनवाई के दौरान कहा कि मध्यस्थता केवल प्रक्रिया नहीं, बल्कि विश्वास पर टिकी व्यवस्था है।

पीठ ने टिप्पणी की, “यदि नियुक्ति की प्रक्रिया ही पक्षपाती दिखे, तो निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद नहीं की जा सकती।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि:

  • 2015 के संशोधन के बाद, यदि कोई व्यक्ति सातवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, तो वह पंच बनने या नियुक्त करने—दोनों के लिए अयोग्य है।
  • केवल यह कहना कि दूसरे पक्ष ने कार्यवाही में भाग लिया, धारा 12(5) की अनिवार्यता को खत्म नहीं करता।
  • छूट (Waiver) तभी मानी जाएगी जब विवाद उत्पन्न होने के बाद स्पष्ट और लिखित सहमति हो।

दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले यह मान लिया था कि भद्रा इंटरनेशनल ने नियुक्ति पर सहमति दी थी, क्योंकि उसने शुरू में आपत्ति नहीं की।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस निष्कर्ष को गलत ठहराया।

पीठ ने कहा, “मध्यस्थता शुरू करने का नोटिस देना, भविष्य में होने वाली किसी नियुक्ति के लिए सहमति नहीं माना जा सकता।”

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अंतिम निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि:

  • AAI के चेयरमैन द्वारा की गई एकतरफा नियुक्ति कानूनन अमान्य थी।
  • ऐसा पंच धारा 12(5) के तहत स्वतः अयोग्य हो जाता है।
  • इस अयोग्यता को केवल लिखित और स्पष्ट समझौते से ही हटाया जा सकता है, जो इस मामले में नहीं था।

अदालत ने हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए भद्रा इंटरनेशनल की अपील स्वीकार कर ली और एकतरफा नियुक्त पंच द्वारा पारित पुरस्कार को अवैध ठहराया।

Case Title: Bhadra International (India) Pvt. Ltd. & Ors. vs Airports Authority of India

Case No.: Civil Appeal Nos. 37–38 of 2026

Case Type: Arbitration Appeal

Decision Date: January 2026

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