मेन्यू
समाचार खोजें...
होमSaved

सुप्रीम कोर्ट ने 2004 की बलिया गोलीबारी मामले में बड़ा फैसला सुनाया, एकमात्र गवाह पर भरोसा न होने से आरोपी बरी

अंजनी सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य - सुप्रीम कोर्ट ने 2004 के बलिया गोलीबारी मामले में अंजनी सिंह को अविश्वसनीय प्रत्यक्षदर्शी गवाही और संदेह से परे सबूतों की कमी का हवाला देते हुए बरी कर दिया।

Court Book
सुप्रीम कोर्ट ने 2004 की बलिया गोलीबारी मामले में बड़ा फैसला सुनाया, एकमात्र गवाह पर भरोसा न होने से आरोपी बरी

नई दिल्ली स्थित भारत के सर्वोच्च न्यायालय में सोमवार को 22 साल पुराने एक आपराधिक मामले में अहम फैसला सुनाया गया। अदालत ने उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की 2004 की गोलीबारी घटना में दोषी ठहराए गए अनजनी सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

यह फैसला उस अपील पर आया, जिसमें आरोपी ने हाईकोर्ट द्वारा बरकरार रखी गई सजा को चुनौती दी थी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 20 अक्टूबर 2004 का है। गांव में दुर्गा प्रतिमा स्थापना के अवसर पर एक नाटक का आयोजन किया गया था। आरोप के अनुसार, इसी कार्यक्रम के दौरान विवाद हुआ और बाद में गोलीबारी की घटना सामने आई।

Read also:- सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप: अवमानना याचिका में स्टाम्प राशि वापसी का स्पष्ट आदेश

अभियोजन का दावा था कि अनजनी सिंह, उसके भाई और पिता ने मिलकर फायरिंग की, जिसमें दो लोगों की मौके पर मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए। निचली अदालत ने तीनों को दोषी ठहराया था।

हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाद में आरोपी पिता को बरी कर दिया, जबकि अनजनी सिंह और उसके भाई की सजा बरकरार रखी गई। अपील लंबित रहने के दौरान अनजनी के भाई की मृत्यु हो गई, जिससे मामला केवल अनजनी सिंह तक सीमित रह गया।

अभियोजन का पक्ष

अभियोजन का पूरा मामला मुख्य रूप से एक ही प्रत्यक्षदर्शी सूचक (PW-1) की गवाही पर आधारित था। उसने दावा किया कि आरोपी ने उसे निशाना बनाकर गोलीबारी की।

Read also:- 17 साल पुराने संपत्ति विवाद में सुप्रीम कोर्ट का संतुलित फैसला, विशिष्ट निष्पादन से इनकार लेकिन ₹3 करोड़ रुपये देने का आदेश

हालांकि, घटना में घायल हुए अन्य सभी गवाहों ने अदालत में यह कहा कि उस समय पंडाल में अंधेरा था और वे यह नहीं देख पाए कि गोली किसने चलाई। कई गवाह अपने पहले के बयानों से भी पलट गए।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अदालत ने गवाहों के बयानों में मौजूद विरोधाभासों पर गहरी चिंता जताई। पीठ जस्टिस मनोज मिश्रा और जॉयमाल्या बागची ने पाया कि -

“केवल एक गवाह की अस्थिर और अस्पष्ट गवाही के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना सुरक्षित नहीं माना जा सकता।”

अदालत ने यह भी नोट किया कि:

  • अन्य घायल गवाहों ने आरोपी की पहचान नहीं की
  • कथित हथियार और बरामद कारतूस के बीच फॉरेंसिक मेल नहीं बैठता
  • जिन दो व्यक्तियों की मौत हुई, उनके खिलाफ आरोपी का कोई स्पष्ट उद्देश्य सामने नहीं आया

Read also:- SEZ से घरेलू क्षेत्र में भेजी गई बिजली पर कस्टम ड्यूटी अवैध: सुप्रीम कोर्ट ने अडानी (Adani) पावर के पक्ष में फैसला सुनाया

पीठ के अनुसार, अगर आरोपी का लक्ष्य सिर्फ सूचक था, तो निर्दोष लोगों की नजदीक से गोली मारकर हत्या होना अभियोजन की कहानी पर सवाल खड़े करता है।

अदालत का अंतिम फैसला

सभी साक्ष्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।

अदालत ने कहा कि निचली अदालत और हाईकोर्ट को इस मामले में संदेह का लाभ देना चाहिए था। इसके साथ ही अनजनी सिंह की दोषसिद्धि रद्द कर दी गई और उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।

बेल पर रिहा अनजनी सिंह के बंधपत्र भी समाप्त कर दिए गए।

Case Title: Anjani Singh v. State of Uttar Pradesh

Case Number: Criminal Appeal No. 591 of 2020

More Stories