सुप्रीम कोर्ट ने लोनावला पुलिस थाने में दर्ज एक आपराधिक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए विदेश में रह रहे एक आईटी प्रोफेशनल को अग्रिम जमानत दे दी है। अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत खारिज करने के आदेश को पलट दिया और गिरफ्तारी की स्थिति में राहत प्रदान की। यह मामला सहमति से बने संबंध के टूटने के बाद दर्ज शिकायत से जुड़ा है।
मामले की पृष्ठभूमि
अपीलकर्ता प्रवीण मणिक कदम के खिलाफ महाराष्ट्र के लोनावला सिटी थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप भारतीय न्याय संहिता, 2023 और IT Act की कुछ धाराओं के तहत थे। गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत मांगी थी, लेकिन 15 अक्टूबर 2025 को हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
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अदालत में दलीलें
अपीलकर्ता की ओर से दलील दी गई कि वह लंदन में रहने वाला आईटी प्रोफेशनल है और शिकायतकर्ता एक वकील हैं। दोनों के बीच संबंध सहमति से थे, जो अब समाप्त हो चुके हैं, और विवाह का कोई इरादा नहीं था। ऐसे में आपराधिक मामला दर्ज करना अनुचित बताया गया।
वहीं राज्य सरकार और शिकायतकर्ता ने गंभीर आरोपों का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया और बताया कि आरोपी के खिलाफ लुकआउट नोटिस व अन्य कार्रवाई शुरू की गई थी।
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कोर्ट का अवलोकन
सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट की पीठ न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां ने माना कि उपलब्ध परिस्थितियों में अपीलकर्ता अग्रिम जमानत का हकदार है। पीठ ने कहा कि अंतरिम संरक्षण पहले ही दिया जा चुका था और मामले के तथ्यों को देखते हुए उसे जारी रखा जाना चाहिए।
फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश रद्द करते हुए निर्देश दिया कि गिरफ्तारी की स्थिति में अपीलकर्ता को 25,000 रुपये की नकद जमानत और दो जमानतदारों पर रिहा किया जाए।
साथ ही उसे जांच में पूरा सहयोग करने और गवाहों को प्रभावित न करने का आदेश दिया गया। विदेश में रहने के बावजूद भारत आने पर भी यह सुरक्षा लागू रहेगी।
अदालत ने लुकआउट नोटिस और अन्य घोषणाओं को भी फिलहाल स्थगित कर दिया।










