तमिल फिल्म ‘जना नायकन’ के सर्टिफिकेशन को लेकर उठा विवाद आखिरकार मद्रास उच्च न्यायालय में सुलझ गया। अदालत ने साफ कहा कि जब परीक्षा समिति (एग्ज़ामिनिंग कमेटी) की सिफारिश मान ली गई और सुझाए गए कट्स लागू हो चुके हों, तो उसके बाद फिल्म को पुनरीक्षण समिति (रीवाइजिंग कमेटी) को भेजना अधिकार क्षेत्र से बाहर है। कोर्ट ने Central Board of Film Certification (CBFC) को तुरंत UA 16+ प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
फिल्म निर्माता M/s KVN Productions LLP ने दिसंबर 2025 में ‘जना नायकन’ के लिए सर्टिफिकेशन आवेदन किया। एग्ज़ामिनिंग कमेटी ने फिल्म देखकर UA 16+ श्रेणी की सिफारिश की, कुछ कट्स के साथ। निर्माता ने सभी सुझाए गए कट्स लागू कर 24 दिसंबर 2025 को संशोधित संस्करण जमा कर दिया।
Read also:- दहेज हत्या केस में हाईकोर्ट का स्पष्ट संदेश: ठोस साक्ष्य बिना नहीं जुड़ेंगे नए आरोपी
इसके बाद क्षेत्रीय कार्यालय ने बताया कि संशोधन सत्यापित हो चुके हैं और सर्टिफिकेट जारी होगा। लेकिन जनवरी 2026 की शुरुआत में अचानक एक ई-मेल के जरिए फिल्म को रीवाइजिंग कमेटी को भेजने की सूचना दी गई यह कहते हुए कि सामग्री को लेकर शिकायत मिली है।
निर्माता की ओर से दलील दी गई कि जब बोर्ड पहले ही एग्ज़ामिनिंग कमेटी की सिफारिश स्वीकार कर चुका है और कट्स की पुष्टि हो चुकी है, तब बाद में फैसला पलटना नियमों के खिलाफ है। CBFC की ओर से कहा गया कि सर्टिफिकेट जारी होने से पहले तक चेयरपर्सन को रीवाइजिंग कमेटी के पास भेजने का अधिकार है।
कोर्ट की अहम टिप्पणियां
मामले की सुनवाई Justice P. T. Asha की पीठ ने की। रिकॉर्ड देखकर अदालत ने पाया कि:
- 22 दिसंबर 2025 के पत्र से स्पष्ट है कि बोर्ड ने UA 16+ सिफारिश स्वीकार कर ली थी।
- निर्माता द्वारा कट्स लागू करने के बाद प्रक्रिया नियम 27 के चरण में पहुंच चुकी थी, जहां सर्टिफिकेट जारी होना शेष था।
- इसके बाद नियम 25 के तहत रीवाइजिंग कमेटी को भेजने का अधिकार समाप्त हो जाता है।
पीठ ने टिप्पणी की,
“एक बार बोर्ड ने एग्ज़ामिनिंग कमेटी की सर्वसम्मत सिफारिश स्वीकार कर ली, तो बाद में उसी निर्णय को पलटना अधिकार क्षेत्र से बाहर है।”
Read also:- न्याय का मजाक: सुप्रीम कोर्ट ने दहेज हत्या मामले में 23 साल से चल रही गतिरोध की निंदा की, SLP खारिज की
अदालत ने यह भी कहा कि एग्ज़ामिनिंग कमेटी के एक सदस्य द्वारा बाद में की गई शिकायत, पहले दी गई लिखित सिफारिश के विपरीत है और ऐसी ‘पलटी’ (volte face) से पूरी सर्टिफिकेशन प्रक्रिया की विश्वसनीयता कमजोर होगी।
फैसला
कोर्ट ने CBFC के उस निर्णय को रद्द कर दिया, जिसके तहत फिल्म को रीवाइजिंग कमेटी को भेजा गया था। साथ ही, क्षेत्रीय अधिकारी को निर्देश दिया गया कि ‘जना नायकन’ को नियमों के अनुसार तुरंत UA 16+ सर्टिफिकेट जारी किया जाए।
याचिका स्वीकार कर ली गई और कोई लागत नहीं लगाई गई।
Case Details:- KVN Productions LLP vs Central Board of Film Certification
Case No.:- W.P. No. 380 of 2026 (with W.M.P. No. 445 of 2026)










