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सुप्रीम कोर्ट में कारज़ोन रेंट मामले की सुनवाई: मृत प्रतिवादी के वारिसों को जोड़ने वाली याचिका में खामियां दूर करने का निर्देश

कार्जोन रेंट (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड बनाम ग्रांधी भारत मल्लिका रत्ना कुमारी और अन्य। सुप्रीम कोर्ट में कारज़ोन रेंट केस की सुनवाई, अदालत ने मृत प्रतिवादी के वारिस जोड़ने वाली याचिका की खामियां दूर करने का निर्देश दिया।

Vivek G.
सुप्रीम कोर्ट में कारज़ोन रेंट मामले की सुनवाई: मृत प्रतिवादी के वारिसों को जोड़ने वाली याचिका में खामियां दूर करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को कार रेंटल कंपनी से जुड़े एक सिविल विवाद की सुनवाई के दौरान प्रक्रिया संबंधी कई मुद्दों पर निर्देश जारी किए गए। अदालत ने याचिकाकर्ता कंपनी को मृत प्रतिवादी के कानूनी वारिसों को रिकॉर्ड पर लाने के लिए दायर नई आवेदन में मौजूद खामियां तय समय सीमा में दूर करने का आदेश दिया।

मामला Carzon Rent (India) Pvt. Ltd. बनाम Grandhi Bharatha Mallika Ratna Kumari एवं अन्य से जुड़ा है, जिसकी सुनवाई रजिस्ट्रार कोर्ट में हुई।

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मामले की पृष्ठभूमि

रिकॉर्ड के अनुसार, इस सिविल अपील में कई प्रतिवादी पक्षकार हैं। इनमें से कुछ ने अदालत में जवाब दाखिल कर दिया है, जबकि कुछ के वकील अब तक अदालत में उपस्थित नहीं हुए।

रजिस्ट्रार के समक्ष सुनवाई के दौरान बताया गया कि प्रतिवादी नंबर 1 से 4 और 6 की ओर से पहले ही काउंटर एफिडेविट दाखिल किया जा चुका है। प्रतिवादी नंबर 13 की ओर से भी प्रतिनिधित्व दर्ज है और यदि कोई अतिरिक्त जवाब दाखिल करना है तो वह बाद में किया जा सकता है।

हालांकि, अदालत के रिकॉर्ड में यह भी दर्ज किया गया कि प्रतिवादी नंबर 7 से 10 तक के लिए नोटिस की सेवा पूरी होने के बावजूद उनकी ओर से कोई वकील अदालत में पेश नहीं हुआ।

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अदालत की कार्यवाही

सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण मुद्दा मृत प्रतिवादी के कानूनी वारिसों (Legal Representatives) को रिकॉर्ड में शामिल करने से संबंधित आवेदन का था।

रजिस्ट्रार ने पाया कि याचिकाकर्ता ने पहले दायर आवेदन में मौजूद खामियां दूर करने के बजाय एक नया आवेदन दाखिल कर दिया है। यह नया आवेदन भी तकनीकी रूप से दोषपूर्ण पाया गया।

अदालत ने इस पर निर्देश देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के वकील नई आवेदन में मौजूद सभी खामियां तय समय सीमा तक ठीक करें।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि:“यदि आवेदन में मौजूद कमियां निर्धारित समय के भीतर दूर कर दी जाती हैं, तो उसे नियमों के अनुसार आगे प्रक्रिया में लिया जाएगा।”

प्रतिस्थापित सेवा (Substituted Service) पर निर्देश

सुनवाई के दौरान एक अन्य आवेदन भी अदालत के सामने आया, जो प्रतिवादी नंबर 12 के लिए सब्स्टीट्यूटेड सर्विस यानी वैकल्पिक तरीके से नोटिस देने से संबंधित था।

रजिस्ट्रार ने कहा कि याचिकाकर्ता को पहले ही इस आवेदन में मौजूद खामियां दूर करने का अंतिम अवसर दिया जा चुका था, लेकिन अब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।

हालांकि, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि आवेदन में मौजूद कमियां उसी दिन दूर कर दी जाएंगी।

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अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि खामियां समय पर ठीक कर दी जाती हैं तो मामले को दोबारा सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। अन्यथा, मामले को आगे के निर्देशों के लिए जज-इन-चैंबर्स के सामने रखा जाएगा।

संबंधित अपील में भी निर्देश

इसी विवाद से जुड़े एक अन्य सिविल अपील में भी अदालत ने कुछ प्रक्रिया संबंधी निर्देश दिए।

रजिस्ट्रार ने नोट किया कि कुछ प्रतिवादी अदालत में उपस्थित हैं, लेकिन प्रतिवादी नंबर 2 के लिए नोटिस की सेवा पूरी होने के बावजूद कोई पेश नहीं हुआ।

अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि प्रतिवादी नंबर 7 के संबंध में अखबार में प्रकाशित नोटिस (paper publication) का हलफनामा और उसका प्रमाण अदालत में दाखिल किया जाए।

यह भी कहा गया कि यह अंतिम अवसर है और यदि निर्धारित समय तक यह दस्तावेज दाखिल नहीं किए जाते, तो मामले को आगे के निर्देशों के लिए जज-इन-चैंबर्स के सामने सूचीबद्ध किया जाएगा।

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अदालत का निर्णय

सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता मृत प्रतिवादी के कानूनी वारिसों को रिकॉर्ड पर लाने वाली आवेदन में मौजूद खामियां 23 मार्च 2026 तक दूर करें।

इसी के साथ अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि यदि आवेदन और आवश्यक दस्तावेज समय पर दाखिल कर दिए जाते हैं, तो मामले को 25 मार्च 2026 को दोबारा सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।

Case Title: Carzon Rent (India) Pvt. Ltd. vs Grandhi Bharatha Mallika Ratna Kumari & Ors.

Case No.: Civil Appeal No. 10582/2024 (with C.A. No. 3631/2025)

Decision Date: 09 March 2026

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