भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने एक अहम कानूनी सवाल पर स्पष्ट रेखा खींच दी। अदालत ने कहा कि फैक्ट्री या बंद परिसरों में इस्तेमाल होने वाली भारी निर्माण मशीनें जैसे डंपर, लोडर और एक्सकेवेटर अगर सार्वजनिक सड़कों पर नहीं चलतीं, तो उन्हें मोटर वाहन मानकर रोड टैक्स नहीं लगाया जा सकता।
यह फैसला सीमेंट निर्माता अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड की अपील पर आया, जिसने गुजरात सरकार द्वारा लगाए गए मोटर वाहन कर को चुनौती दी थी।
मामले की पृष्ठभूमि
मामला उन भारी मशीनों से जुड़ा था, जिनका इस्तेमाल अल्ट्राटेक अपने गुजरात स्थित सीमेंट प्लांट्स में खनन और निर्माण कार्यों के लिए करता है। इनमें डंपर, लोडर, एक्सकेवेटर, सरफेस माइनर और रॉक ब्रेकर जैसी मशीनें शामिल थीं।
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कंपनी का कहना था कि ये मशीनें कभी भी सार्वजनिक सड़कों पर नहीं चलाई जातीं। इन्हें ट्रेलरों पर लादकर फैक्ट्री परिसर तक लाया जाता है और पूरा इस्तेमाल बंद, निजी क्षेत्र के भीतर ही होता है।
हालांकि, गुजरात परिवहन विभाग ने इन्हें “मोटर वाहन” मानते हुए न केवल पंजीकरण की मांग की, बल्कि रोड टैक्स, ब्याज और जुर्माने के साथ भारी रकम वसूल ली। इस आदेश के खिलाफ कंपनी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली। अंततः मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
अदालत की अहम टिप्पणियां
न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान संविधान और मोटर वाहन कानून की बारीकी से व्याख्या की।
पीठ ने स्पष्ट किया कि संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत राज्य केवल उन्हीं वाहनों पर कर लगा सकता है, जो सार्वजनिक सड़कों पर चलने के लिए उपयुक्त हों।
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अदालत ने कहा:
“मोटर वाहन की परिभाषा में ऐसे विशेष वाहन शामिल नहीं किए जा सकते, जो केवल फैक्ट्री या अन्य बंद परिसरों में उपयोग के लिए बनाए गए हों।”
पीठ ने यह भी नोट किया कि वाहन निर्माता कंपनियों और ऑटोमोटिव रिसर्च संस्थानों द्वारा जारी प्रमाणपत्र साफ तौर पर बताते हैं कि ये मशीनें ऑफ-रोड इस्तेमाल के लिए डिज़ाइन की गई हैं और सड़क पर चलाने योग्य नहीं हैं।
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कानूनी तर्क
सुप्रीम कोर्ट ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 2(28) का हवाला देते हुए कहा कि कानून खुद ही कुछ खास किस्म के वाहनों को मोटर वाहन की परिभाषा से बाहर रखता है खासकर वे वाहन, जो केवल फैक्ट्री या बंद परिसर में इस्तेमाल के लिए अनुकूलित हों।
अदालत ने यह भी माना कि गुजरात मोटर वाहन कर अधिनियम की अनुसूची में इन निर्माण उपकरण वाहनों के लिए कोई स्पष्ट टैक्स दर तय नहीं है। ऐसे में इन पर कर वसूलना कानून के दायरे से बाहर होगा।
पीठ ने पहले के फैसलों का उल्लेख करते हुए दो टूक कहा कि केवल पंजीकरण हो जाना किसी वाहन को कर योग्य नहीं बनाता, अगर वह सार्वजनिक सड़क का इस्तेमाल ही नहीं करता।
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अंतिम फैसला
सभी दलीलों पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया।
अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि:
“जो वाहन सार्वजनिक सड़कों पर नहीं चलते और केवल औद्योगिक या बंद परिसरों में उपयोग होते हैं, उन पर मोटर वाहन कर नहीं लगाया जा सकता।”
इसके साथ ही अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड की अपील स्वीकार कर ली गई और गुजरात सरकार द्वारा की गई कर वसूली को अवैध ठहराया गया।
Case Title: UltraTech Cement Ltd. v. State of Gujarat & Others










