सुप्रीम कोर्ट में भूमि और प्रशासनिक विवादों से जुड़ी कई सिविल अपीलों की सुनवाई के दौरान रजिस्ट्रार कोर्ट ने प्रक्रिया संबंधी अहम निर्देश दिए। अदालत ने पाया कि कई मामलों में प्रतिवादियों को नोटिस दिए जाने के बावजूद कोई वकील पेश नहीं हुआ है। ऐसे मामलों में अदालत ने आगे की कार्यवाही के लिए आवश्यक दस्तावेज दाखिल करने और कुछ मामलों को जज-इन-चैंबर्स के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
यह आदेश 9 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार मशरूर आलम खान की अदालत में पारित किया गया।
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मामले की पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष K. Leela बनाम District Collector and Arbitrator सहित कई सिविल अपीलें लंबित हैं। इन अपीलों में विभिन्न पक्षों के बीच प्रशासनिक और भूमि संबंधी विवादों को चुनौती दी गई है।
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य आया कि कुछ मामलों में नोटिस की सेवा पूरी होने के बावजूद कई प्रतिवादियों की ओर से कोई प्रतिनिधित्व नहीं किया गया। वहीं कुछ मामलों में तकनीकी प्रक्रियाएं अभी पूरी नहीं हुई थीं, जैसे आवश्यक प्रतियां दाखिल करना या कुछ पक्षकारों को दोबारा नोटिस जारी करना।
अदालत की कार्यवाही के दौरान क्या सामने आया
रजिस्ट्रार कोर्ट के समक्ष सुनवाई के दौरान कई अलग-अलग अपीलों पर क्रमवार विचार किया गया।
एक अपील में अदालत को बताया गया कि अपीलकर्ता के अधिवक्ता का निधन हो चुका है और वैकल्पिक व्यवस्था के लिए भेजा गया नोटिस वापस लौट आया है क्योंकि संबंधित व्यक्ति का पता नहीं चल सका।
अदालत ने इस स्थिति पर निर्देश देते हुए कहा कि मामले को आगे के निर्देशों के लिए जज-इन-चैंबर्स के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए।
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अदालत ने रिकॉर्ड में कहा: “कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार अपीलकर्ता के अधिवक्ता का निधन हो चुका है और वैकल्पिक व्यवस्था के लिए भेजा गया नोटिस ‘पता नहीं चल सका’ टिप्पणी के साथ लौट आया है। मामले को जज-इन-चैंबर्स के समक्ष निर्देशों के लिए सूचीबद्ध किया जाए।”
प्रतिवादियों की अनुपस्थिति पर अदालत की टिप्पणी
कई अपीलों में अदालत ने नोट किया कि नोटिस की सेवा पूरी होने के बावजूद प्रतिवादियों की ओर से कोई वकील उपस्थित नहीं हुआ।
ऐसे मामलों में अदालत ने प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई करने का आदेश दिया और मामलों को नियमित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
रजिस्ट्रार कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जहां आवश्यक हो वहां नए नोटिस जारी किए जाएं और इसके लिए अपीलकर्ता के वकीलों को आवश्यक प्रतियां दाखिल करनी होंगी।
अतिरिक्त प्रतियां दाखिल करने का निर्देश
कुछ अपीलों में अदालत ने अपीलकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे कुछ प्रतिवादियों के संबंध में आवश्यक अतिरिक्त प्रतियां दाखिल करें ताकि नोटिस जारी किया जा सके।
अदालत ने कहा कि यदि निर्धारित तिथि तक ये प्रतियां दाखिल कर दी जाती हैं तो नोटिस जारी कर मामले को फिर से सूचीबद्ध किया जाएगा।
अदालत ने स्पष्ट किया: “यदि आवश्यक प्रतियां दाखिल की जाती हैं तो NLPA जारी किया जाए और मामला 7 अप्रैल 2026 को पुनः सूचीबद्ध किया जाए।”
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विशेष परिस्थितियां भी सामने आईं
एक मामले में अदालत के रिकॉर्ड में यह भी उल्लेख आया कि एक प्रतिवादी के संबंध में भेजा गया नोटिस “2016 से फरार” होने की टिप्पणी के साथ वापस आया।
इस पर अदालत ने अपीलकर्ता के वकील को निर्देश दिया कि वह संबंधित प्रतिवादी को नोटिस की सेवा सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाएं।
साथ ही, जिन प्रतिवादियों की मृत्यु हो चुकी है, उनके संबंध में भी आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट का अंतिम आदेश
सुनवाई के अंत में रजिस्ट्रार कोर्ट ने अलग-अलग अपीलों के लिए निम्न निर्देश जारी किए:
- जहां प्रतिवादी उपस्थित नहीं हुए, वहां मामलों को नियमों के अनुसार आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।
- जिन मामलों में नोटिस जारी करने के लिए अतिरिक्त प्रतियां आवश्यक हैं, वहां अपीलकर्ता 16 मार्च 2026 तक प्रतियां दाखिल करें।
- प्रतियां दाखिल होने पर नोटिस जारी कर मामले को 7 अप्रैल 2026 को फिर से सूचीबद्ध किया जाए।
- कुछ मामलों को आगे के निर्देशों के लिए जज-इन-चैंबर्स के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
Case Title: K. Leela vs The District Collector and Arbitrator & Anr.
Case No.: Civil Appeal No. 10354/2024 (with connected appeals)
Decision Date: 09 March 2026










