देशभर में बढ़ते डॉग बाइट मामलों और सार्वजनिक संस्थानों में आवारा कुत्तों की बढ़ती मौजूदगी पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि स्कूल, अस्पताल, खेल परिसर, बस अड्डे और रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील परिसरों से हटाए गए आवारा कुत्तों को उसी स्थान पर दोबारा छोड़ना अनिवार्य नहीं है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला स्वतः संज्ञान याचिका “सिटी हाउंडेड बाय स्ट्रेज़, किड्स पे प्राइस” से जुड़ा है। अदालत ने पहले नवंबर 2025 में आदेश जारी कर राज्यों और स्थानीय निकायों को निर्देश दिया था कि वे शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों और अन्य सार्वजनिक परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाकर सुरक्षित आश्रय स्थलों में भेजें।
इसके बाद कई पशु कल्याण संगठनों और व्यक्तियों ने अदालत में आवेदन दायर कर कहा कि यह आदेश पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 के खिलाफ है। उनका तर्क था कि नियमों के अनुसार नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को उसी इलाके में छोड़ा जाना चाहिए जहां से उन्हें पकड़ा गया था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि पशु जन्म नियंत्रण नियम का उद्देश्य आवारा कुत्तों को हर प्रकार के परिसर में रहने का स्थायी अधिकार देना नहीं है। अदालत ने माना कि अस्पताल, स्कूल और अन्य संस्थागत परिसर ऐसे स्थान हैं जहां सुरक्षा, स्वच्छता और नियंत्रित वातावरण बनाए रखना आवश्यक है।
पीठ ने कहा,
“इन संस्थानों में बच्चे, मरीज, बुजुर्ग और अन्य संवेदनशील लोग आते हैं। ऐसे परिसरों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी गंभीर सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी खतरे पैदा कर सकती है।”
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नियमों में प्रयुक्त “उसी स्थान या क्षेत्र” का अर्थ सार्वजनिक सड़कें और खुले क्षेत्र हैं। इसे अस्पतालों, कॉलेजों या नियंत्रित परिसरों तक नहीं बढ़ाया जा सकता।
आवेदकों की ओर से कहा गया कि कुत्तों को किसी क्षेत्र से हटाने पर वहां दूसरे बिना नसबंदी वाले कुत्ते आ सकते हैं, जिससे समस्या और बढ़ सकती है। उन्होंने अदालत को बताया कि नसबंदी और टीकाकरण आधारित व्यवस्था ही वैज्ञानिक और मानवीय तरीका माना जाता है।
संगठनों ने यह भी कहा कि देशभर में बड़ी संख्या में कुत्तों को हटाने और उनके लिए आश्रय स्थल बनाने में भारी आर्थिक और प्रशासनिक बोझ पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी आपत्तियों को खारिज करते हुए अपने पहले के निर्देशों को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि स्कूल, अस्पताल, खेल परिसर, बस अड्डे और रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील परिसरों को पशु जन्म नियंत्रण नियम के तहत सामान्य “सड़क के कुत्तों” वाले क्षेत्र नहीं माना जा सकता।
इसलिए वहां से हटाए गए कुत्तों को उसी स्थान पर दोबारा छोड़ना आवश्यक नहीं होगा।
Case Title: In Re: “City Hounded by Strays, Kids Pay Price” with connected matters











