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सुप्रीम कोर्ट ने बीमा कंपनी को दी राहत, कर्मचारियों के मुआवज़े में पेनल्टी नियोक्ता ही देगा

न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम रेखा चौधरी और अन्य, सुप्रीम कोर्ट ने Employees’ Compensation Act मामले में फैसला देते हुए कहा कि देरी पर लगी पेनल्टी नियोक्ता देगा, बीमा कंपनी नहीं।

Vivek G.
सुप्रीम कोर्ट ने बीमा कंपनी को दी राहत, कर्मचारियों के मुआवज़े में पेनल्टी नियोक्ता ही देगा

कर्मचारियों के मुआवज़े से जुड़े एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि देरी से भुगतान पर लगने वाली पेनल्टी (जुर्माना) का बोझ बीमा कंपनी पर नहीं डाला जा सकता। यह जिम्मेदारी नियोक्ता (एम्प्लॉयर) की ही रहेगी।

यह फैसला New India Assurance Co. Ltd. v. Rekha Chaudhary and Others मामले में आया, जिसमें बीमा कंपनी ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।

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मामले की पृष्ठभूमि

मृतक संदीप एक कमर्शियल ड्राइवर के रूप में कार्यरत थे। 13 फरवरी 2017 को ड्यूटी के दौरान वाहन चलाते समय उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

उनके परिजनों ने Employees’ Compensation Act, 1923 के तहत मुआवज़े की मांग की। श्रम आयुक्त ने पाया कि मृत्यु ड्यूटी के दौरान हुई और नियोक्ता मुआवज़ा देने के लिए जिम्मेदार है।

आयुक्त ने 7,36,680 रुपये मुआवज़ा और 12% ब्याज देने का आदेश दिया। साथ ही, समय पर भुगतान न करने पर 35% पेनल्टी (2,57,838 रुपये) भी नियोक्ता पर लगाई।

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हाईकोर्ट का फैसला

मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुँचा। हाईकोर्ट ने मुआवज़े की राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं की, लेकिन एक महत्वपूर्ण बदलाव किया-उसने मुआवज़ा, ब्याज और पेनल्टी तीनों की प्राथमिक जिम्मेदारी बीमा कंपनी पर डाल दी।

यहीं से विवाद शुरू हुआ। बीमा कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करते हुए कहा कि वह मुआवज़ा और ब्याज देने को तैयार है, लेकिन पेनल्टी देना उसका दायित्व नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और टिप्पणी

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की अगुवाई वाली पीठ ने विस्तार से कानून की व्याख्या की। अदालत ने माना कि यह कानून एक सामाजिक कल्याण कानून है और इसका उद्देश्य कर्मचारियों या उनके परिवार को शीघ्र राहत देना है।

हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पेनल्टी का प्रावधान नियोक्ता की व्यक्तिगत चूक के कारण लागू होता है।

पीठ ने कहा,

“Section 4A(3)(b) के तहत लगाया गया दंड नियोक्ता की व्यक्तिगत लापरवाही का परिणाम है। इसे बीमा कंपनी पर नहीं थोपा जा सकता।”

अदालत ने अपने पुराने फैसले Ved Prakash Garg v. Premi Devi का हवाला दिया, जिसमें यही सिद्धांत स्थापित किया गया था कि बीमा कंपनी केवल मुआवज़ा और ब्याज की भरपाई करेगी, पेनल्टी की नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी समझाया कि 1995 के संशोधन के बाद कानून में मुआवज़ा-ब्याज और पेनल्टी को अलग-अलग धाराओं में बांटा गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि पेनल्टी को अलग जिम्मेदारी के रूप में देखा गया है।

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अंतिम निर्णय

अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को उस सीमा तक रद्द कर दिया, जहाँ बीमा कंपनी पर पेनल्टी की जिम्मेदारी डाली गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2,57,838 रुपये की पेनल्टी राशि नियोक्ता ही अदा करेगा और उसे यह रकम आठ सप्ताह के भीतर जमा करनी होगी।

मुआवज़ा और 12% ब्याज की जिम्मेदारी बीमा कंपनी पर बनी रहेगी।

Case Title: New India Assurance Co. Ltd. v. Rekha Chaudhary and Others

Case No.: Civil Appeal No. 174 of 2026

Decision Date: 23 February 2026

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