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89 वर्षीय उद्योगपति के खिलाफ जारी लुक आउट सर्कुलर रद्द: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा - बिना ठोस आशंका यात्रा रोकना उचित नहीं

बलदेवराज तोपन राम तनेजा बनाम सहायक निदेशक, गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय और अन्य - बॉम्बे उच्च न्यायालय ने आईएसएमटी के संस्थापक बलदेवराज तनेजा के खिलाफ एलओसी को रद्द करते हुए कहा कि विदेश यात्रा का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है।

Shivam Y.
89 वर्षीय उद्योगपति के खिलाफ जारी लुक आउट सर्कुलर रद्द: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा - बिना ठोस आशंका यात्रा रोकना उचित नहीं

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 89 वर्षीय उद्योगपति बलदेवराज तोपन राम तनेजा के खिलाफ जारी लुक आउट सर्कुलर (LOC) को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि केवल जांच लंबित होने के आधार पर किसी व्यक्ति की विदेश यात्रा पर अनावश्यक रोक नहीं लगाई जा सकती, खासकर जब वह जांच में लगातार सहयोग कर रहा हो।

यह आदेश न्यायमूर्ति ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति श्याम सी. चांडक की पीठ ने 25 फरवरी 2026 को पारित किया।

Background of the Case

याचिकाकर्ता बलदेवराज तोपन राम तनेजा, जो पुणे के निवासी हैं, ने अपने खिलाफ जारी लुक आउट सर्कुलर को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। यह सर्कुलर गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) द्वारा जारी किया गया था।

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मामला कंपनी ISMT लिमिटेड के मामलों से जुड़ी जांच से संबंधित था, जिसे अक्टूबर 2020 में कंपनियों अधिनियम, 2013 की धारा 212(1) के तहत शुरू किया गया था। याचिकाकर्ता उस कंपनी के बोर्ड में निदेशक रहे थे और 10 मार्च 2022 को उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।

18 अप्रैल 2022 को जब तनेजा मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से विदेश यात्रा के लिए जा रहे थे, तब उन्हें इस लुक आउट सर्कुलर के कारण रोका गया। इसके बाद उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि तनेजा जांच में लगातार सहयोग करते रहे हैं और जांच एजेंसी ने कभी यह नहीं कहा कि उन्होंने जांच में बाधा डाली है।

वकील ने यह भी बताया कि याचिका लंबित रहने के दौरान अदालत ने उन्हें कुछ शर्तों के साथ विदेश यात्रा की अनुमति दी थी और हर बार वे निर्धारित समय पर भारत लौट आए।

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अधिवक्ता ने दलील दी कि इससे यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता के फरार होने की कोई आशंका नहीं है।

सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त लोक अभियोजक ने याचिका का विरोध किया। उनका कहना था कि एसएफआईओ की जांच रिपोर्ट के अनुसार याचिकाकर्ता कंपनी के संस्थापक थे और उन पर कंपनी की वित्तीय स्थिति को सही रूप में प्रस्तुत न करने का आरोप है।

सरकार ने अदालत से अनुरोध किया कि यदि लुक आउट सर्कुलर रद्द भी किया जाए, तो कम से कम याचिकाकर्ता को अपना पासपोर्ट जमा कराने और विदेश यात्रा से पहले ट्रायल कोर्ट से अनुमति लेने का निर्देश दिया जाए।

अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि याचिकाकर्ता पुणे के स्थायी निवासी हैं और उनके सामाजिक व व्यावसायिक संबंध भारत में मजबूत हैं।

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पीठ ने कहा कि जांच एजेंसी भी इस बात से इनकार नहीं कर सकी कि याचिकाकर्ता ने जांच में सहयोग किया है।

अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि पहले जब उन्हें विदेश यात्रा की अनुमति दी गई थी, तब उन्होंने किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया।

पीठ ने कहा,

“विदेश यात्रा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है। इस अधिकार पर बिना उचित कारण के लगाया गया प्रतिबंध व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्रभावित करता है।”

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अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि याचिकाकर्ता की उम्र 89 वर्ष है और वे अपने परिवार व मित्रों से मिलने विदेश जाना चाहते हैं।

इन सभी तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता के खिलाफ जारी लुक आउट सर्कुलर बनाए रखने का कोई उचित कारण नहीं है।

अदालत ने आदेश दिया कि 22 फरवरी 2021 को जारी किया गया लुक आउट सर्कुलर रद्द किया जाता है और याचिका स्वीकार की जाती है।

Case Title:- Baldevraj Topan Ram Taneja v. Assistant Director, Serious Fraud Investigation Office & Ors.

Case Number:- Criminal Writ Petition No. 4234 of 2022

Date of Judgment:- 25 February 2026

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