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बॉम्बे हाईकोर्ट का अहम आदेश: ‘कटारिया’ ब्रांड विवाद में कंपनी की अपील खारिज, पहले उपयोगकर्ता को मिली राहत

कटारिया इंश्योरेंस ब्रोकर्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम भावेश सुरेश कटारिया, बॉम्बे हाईकोर्ट ने ‘Kataria’ ट्रेडमार्क विवाद में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए कहा कि समान नाम से बीमा सेवाएं देने से उपभोक्ताओं में भ्रम पैदा हो सकता है।

Vivek G.
बॉम्बे हाईकोर्ट का अहम आदेश: ‘कटारिया’ ब्रांड विवाद में कंपनी की अपील खारिज, पहले उपयोगकर्ता को मिली राहत

बॉम्बे हाईकोर्ट ने ‘Kataria’ नाम के उपयोग को लेकर चल रहे ट्रेडमार्क विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने पाया कि बीमा सेवाओं से जुड़े व्यवसाय में ‘Kataria’ नाम का पहले और लगातार उपयोग करने वाले पक्ष का दावा मजबूत है। अदालत ने कहा कि इसी क्षेत्र में समान नाम का इस्तेमाल ग्राहकों में भ्रम पैदा कर सकता है और इससे मूल व्यवसाय की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद Bhavesh Suresh Kataria, जो ‘Kataria Jewellery Insurance Consultancy’ नाम से बीमा सेवाएं प्रदान करते हैं, और Kataria Insurance Brokers Pvt. Ltd. के बीच शुरू हुआ।

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वादकर्ता का कहना था कि उन्होंने वर्ष 1999 से बीमा क्षेत्र में काम शुरू किया और बाद में विशेष रूप से जेम्स और ज्वेलरी क्षेत्र के लिए बीमा सेवाएं प्रदान करने लगे। 2004 से उन्होंने ‘Kataria’ नाम को अपने व्यवसाय की पहचान के रूप में उपयोग करना शुरू किया।

उन्होंने अदालत को बताया कि समय के साथ ‘Kataria’ नाम उनके बीमा व्यवसाय से जुड़ी एक विशिष्ट पहचान बन चुका है और बाजार में उनकी प्रतिष्ठा इसी नाम से स्थापित है।

ट्रेडमार्क और डोमेन का दावा

वादकर्ता ने अदालत को बताया कि उन्होंने ‘Kataria Jewellery Insurance Consultancy’ और ‘Kataria’ नाम से ट्रेडमार्क पंजीकरण भी प्राप्त किया है। यह पंजीकरण बीमा और वित्तीय सेवाओं से संबंधित Class 36 में किया गया था।

इसके अलावा उन्होंने ‘kataria.insurance’ नाम से वेबसाइट भी शुरू की थी, जिससे उनके ग्राहकों को ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराई जाती थीं।

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विवाद कैसे शुरू हुआ

वादकर्ता के अनुसार, वर्ष 2014 में उन्हें पता चला कि एक कंपनी ‘Kataria Insurance Brokers Private Limited’ नाम से पंजीकृत हुई है और वह भी बीमा सेवाएं दे रही है।

उन्होंने इस नाम के उपयोग पर आपत्ति जताई और कंपनी को ‘cease and desist’ नोटिस भेजा। हालांकि, उनके अनुसार कंपनी ने नाम बदलने के बजाय उसी नाम से काम जारी रखा और ‘katariainsurance.co.in’ नाम से वेबसाइट भी शुरू कर दी।

वादकर्ता का कहना था कि इससे ग्राहकों में भ्रम पैदा हो सकता है और लोग दोनों व्यवसायों को एक ही समझ सकते हैं।

कंपनी का पक्ष

प्रतिवादी कंपनी ने अदालत में कहा कि ‘Kataria’ उनके समूह का पारिवारिक उपनाम है और यह नाम उनके व्यवसायों में लंबे समय से इस्तेमाल हो रहा है।

कंपनी के वकील ने दलील दी कि उनका समूह 1955 से ‘Kataria’ नाम का उपयोग विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों में कर रहा है, जैसे ऑटोमोबाइल और अन्य सेवाएं। इसलिए यह नाम उनके लिए भी वैध रूप से उपयोग करने योग्य है।

उन्होंने यह भी कहा कि वादकर्ता मुख्य रूप से ज्वेलरी बीमा से जुड़े हैं, जबकि कंपनी सामान्य बीमा सेवाएं प्रदान करती है।

सिंगल जज का आदेश

मामले की सुनवाई के दौरान पहले सिंगल जज ने पाया कि वादकर्ता का ट्रेडमार्क पंजीकृत है और उसका उपयोग लंबे समय से किया जा रहा है।

अदालत ने कहा कि प्रतिवादी कंपनी द्वारा ‘Kataria Insurance’ नाम का उपयोग वादकर्ता के ट्रेडमार्क से काफी मिलता-जुलता है। दोनों पक्ष एक ही क्षेत्र-बीमा सेवाओं-में कार्य कर रहे हैं, जिससे ग्राहकों के बीच भ्रम पैदा होने की संभावना है।

इसी आधार पर अदालत ने कंपनी को इस नाम के उपयोग से रोकने के लिए अंतरिम आदेश जारी किया।

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डिवीजन बेंच के सामने अपील

इस आदेश के खिलाफ कंपनी ने बॉम्बे हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील दायर की।

अपील में कंपनी ने कहा कि ‘Kataria’ उनका पारिवारिक नाम है और ट्रेडमार्क कानून की धारा 35 के तहत कोई भी व्यक्ति अपने नाम का उपयोग कर सकता है।

अदालत की प्रमुख टिप्पणी

डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि ट्रेडमार्क कानून में किसी पंजीकृत ट्रेडमार्क के समान नाम का उपयोग उसी प्रकार की सेवाओं में करने से उपभोक्ताओं में भ्रम पैदा हो सकता है।

अदालत ने यह भी माना कि वादकर्ता लंबे समय से ‘Kataria’ नाम का उपयोग बीमा सेवाओं के लिए कर रहे हैं और इससे बाजार में उनकी पहचान और प्रतिष्ठा स्थापित हो चुकी है।

अदालत का निर्णय

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पाया कि वादकर्ता ने अपने ट्रेडमार्क के उपयोग, प्रतिष्ठा और पूर्व उपयोग का पर्याप्त प्रारंभिक प्रमाण प्रस्तुत किया है।

अदालत ने माना कि समान नाम का उपयोग उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकता है और इससे वादकर्ता के व्यवसाय को अपूरणीय क्षति हो सकती है।

इसी आधार पर अदालत ने सिंगल जज द्वारा दिया गया अंतरिम आदेश बरकरार रखा।

Case Title: Kataria Insurance Brokers Pvt. Ltd. v. Bhavesh Suresh Kataria

Case No.: Commercial Appeal (L) No. 42036 of 2025

Decision Date: 23 February 2026

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