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कलकत्ता हाईकोर्ट ने EPF विभाग की याचिका खारिज की, ट्रेनी मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव ‘कर्मचारी’ नहीं माने गए

क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त एवं अन्य बनाम कर्मचारी भविष्य निधि अपीलीय न्यायाधिकरण एवं अन्य।कलकत्ता हाईकोर्ट ने EPF विभाग की याचिका खारिज कर ट्रेनी मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव को कर्मचारी मानने से इनकार किया, ट्रिब्यूनल का आदेश बरकरार।

Vivek G.
कलकत्ता हाईकोर्ट ने EPF विभाग की याचिका खारिज की, ट्रेनी मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव ‘कर्मचारी’ नहीं माने गए

कोर्ट रूम में सन्नाटा था जब जस्टिस शम्पा दत्त (पॉल) ने लंबी बहस के बाद अपना फैसला सुनाया। मामला कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) के दायरे को लेकर था-क्या किसी कंपनी के ट्रेनी मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव को “कर्मचारी” माना जाए या नहीं?

इस सवाल का जवाब देते हुए अदालत ने साफ कर दिया कि ट्रेनी, जिन्हें स्टाइपेंड मिलता है और जिनका नियमित नियुक्ति पर कोई अधिकार नहीं होता, वे EPF कानून के तहत कर्मचारी नहीं माने जाएंगे।

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मामला क्या था

याचिका दायर की थी Employees' Provident Fund Organisation के क्षेत्रीय आयुक्त और अन्य अधिकारियों ने। उन्होंने Employees' Provident Fund Appellate Tribunal के 24 मार्च 2011 के आदेश को चुनौती दी थी।

EPF अधिकारियों ने कंपनी M/s. Klar Sehen Pvt. Ltd. के खिलाफ जांच शुरू की थी। आरोप था कि कंपनी अपने ट्रेनी मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव को EPF सदस्यता से वंचित कर रही है। जांच के बाद 6 फरवरी 2009 को विभाग ने आदेश पारित कर कहा कि ये ट्रेनी वास्तव में “कर्मचारी” हैं और उन्हें EPF लाभ मिलना चाहिए।

इसके तहत कंपनी पर मई 1999 से मार्च 2007 की अवधि के लिए ₹18,74,239 की देनदारी तय की गई। भुगतान न होने पर विभाग ने बैंक खाते पर अटैचमेंट आदेश भी जारी कर दिया।

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अपीलीय ट्रिब्यूनल ने क्या कहा

कंपनी ने अपील दायर की। ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा कि ट्रेनी को कर्मचारी नहीं माना जा सकता, खासकर तब जब वे प्रशिक्षण अवधि में हों और उन्हें केवल स्टाइपेंड मिल रहा हो।

ट्रिब्यूनल ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया-Supreme Court of India का निर्णय, Regional PF Commissioner vs. Central Arecanut & Coca Marketing & Processing Co-op. Ltd.

उस फैसले में कहा गया था कि यदि प्रशिक्षु “स्टैंडिंग ऑर्डर्स” के तहत नियुक्त हैं और उन्हें प्रशिक्षण भत्ता मिल रहा है, तो वे EPF अधिनियम की धारा 2(f) के तहत कर्मचारी की परिभाषा में नहीं आते।

ट्रिब्यूनल ने टिप्पणी की,

“रिपोर्ट में ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं है कि संबंधित व्यक्ति नियमित कर्मचारी का कार्य कर रहे थे। वे केवल ‘ट्रेनी’ थे।”

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हाईकोर्ट की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने पूरे रिकॉर्ड और ट्रिब्यूनल के आदेश का अवलोकन किया। अदालत ने माना कि जब किसी प्रतिष्ठान के स्थायी स्टैंडिंग ऑर्डर्स प्रमाणित नहीं होते, तब मॉडल स्टैंडिंग ऑर्डर्स लागू होते हैं। इन मॉडल नियमों में ‘अप्रेंटिस’ यानी प्रशिक्षु को अलग श्रेणी में रखा गया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख करते हुए अदालत ने दोहराया:

“प्रशिक्षण अवधि में स्टाइपेंड पाने वाले और नियुक्ति का कोई अधिकार न रखने वाले ट्रेनी, अधिनियम की धारा 2(f) के तहत कर्मचारी नहीं माने जा सकते।”

कोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामले में भी स्थिति समान है। इसलिए ट्रिब्यूनल का आदेश कानून के अनुरूप है और उसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

अंतिम निर्णय

अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अपीलीय ट्रिब्यूनल का 24 मार्च 2011 का आदेश सही है।

इस प्रकार, EPF विभाग की याचिका खारिज कर दी गई। साथ ही, संबंधित सभी अंतरिम आदेश भी समाप्त कर दिए गए।

फैसले के साथ ही WPA 11596 of 2011 का निस्तारण कर दिया गया।

Case Title: Regional Provident Fund Commissioner & Anr. vs. Employees Provident Fund Appellate Tribunal & Ors.

Case No.: WPA 11596 of 2011

Decision Date: 20 February 2026

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