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दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका खारिज की, पूर्व वायुसेना अधिकारी को 50% दिव्यांग पेंशन बरकरार

भारत संघ बनाम 627281 Ex MWO (HFO) तेजपाल सिंह - दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारत संघ की याचिका खारिज कर दी, सेवानिवृत्त वायु सेना अधिकारी को विकलांगता पेंशन देने के सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के आदेश को बरकरार रखा।

Shivam Y.
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका खारिज की, पूर्व वायुसेना अधिकारी को 50% दिव्यांग पेंशन बरकरार

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में केंद्र सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) के आदेश को चुनौती दी गई थी। न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि मेडिकल बोर्ड बिना ठोस कारण बताए किसी सैनिक की बीमारी को “सेवा से असंबद्ध” नहीं बता सकता। अदालत ने पूर्व वायुसेना अधिकारी को 50% दिव्यांगता पेंशन देने के आदेश को सही ठहराया।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला 627281 Ex MWO (HFO) तेजपाल सिंह से जुड़ा है, जिन्होंने भारतीय वायुसेना में 28 अक्टूबर 1981 को सेवा शुरू की थी और 31 मार्च 2019 को 37 वर्ष से अधिक सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए।

रिलीज मेडिकल बोर्ड ने उन्हें “Primary Hypertension” और “CAD Silent ASMI” जैसी बीमारियों के साथ कम मेडिकल श्रेणी में रिहा किया। बोर्ड ने उच्च रक्तचाप (Primary Hypertension) को 30% दिव्यांगता आंका, लेकिन इसे सैन्य सेवा से न जुड़ा बताते हुए पेंशन के लिए अस्वीकार्य माना।

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सशस्त्र बल न्यायाधिकरण ने 3 अगस्त 2023 को आदेश देते हुए कहा कि अधिकारी को दिव्यांगता पेंशन का लाभ मिलेगा और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार 30% को 50% तक “ब्रॉडबैंड” किया जाएगा। साथ ही बकाया राशि तीन महीने में देने का निर्देश दिया गया।

केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट में दलील दी कि बीमारी “लाइफस्टाइल डिसऑर्डर” है और शांतिपूर्ण क्षेत्र में हुई है, इसलिए इसे सैन्य सेवा से जोड़ना उचित नहीं है। सरकार ने 2008 के एंटाइटलमेंट रूल्स का हवाला देते हुए कहा कि अब सामान्य अनुमान (presumption) लागू नहीं होता।

न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ ने कहा कि कानून की स्थिति स्पष्ट है। अगर नियुक्ति के समय कोई बीमारी दर्ज नहीं है, तो बाद में हुई बीमारी को सेवा से जुड़ा माना जाएगा, जब तक कि विभाग ठोस कारणों से इसे गलत साबित न करे।

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पीठ ने कहा,

“मेडिकल बोर्ड का यह दायित्व है कि वह स्पष्ट और ठोस कारण दर्ज करे। केवल यह कह देना कि बीमारी लाइफस्टाइल से जुड़ी है, पर्याप्त नहीं है।”

अदालत ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए पाया कि रिलीज मेडिकल बोर्ड ने यह नहीं बताया कि उच्च रक्तचाप सेवा से कैसे असंबद्ध है। न ही किसी ठोस कारण का उल्लेख किया गया।

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न्यायालय ने यह भी कहा कि हर व्यक्ति की जीवनशैली अलग होती है, इसलिए सामान्य टिप्पणी के आधार पर पेंशन से इनकार नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने माना कि न्यायाधिकरण का निष्कर्ष सही है और उसमें कोई कानूनी त्रुटि नहीं है। अदालत ने केंद्र सरकार की याचिका को “बिना मेरिट” बताते हुए खारिज कर दिया।

इसके साथ ही लंबित आवेदन भी निरर्थक मानकर समाप्त कर दिए गए।

Case Title:- Union of India vs. 627281 Ex MWO (HFO) Tejpal Singh

Case Number:- W.P.(C) 749/2026

Date of Decision:- 19 January 2026

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